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आज भी जुबानी याद है आपातकाल का काला अध्याय

Sat, 25 Jun 2022 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jun 2022 12:06 AM IST
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Even today remember the dark chapter of emergency
बड़ौत (बागपत)। आपातकाल को भले ही 47 साल बीत चुके हो, मगर भारतीय राजनीति का वह काला अध्याय आज भी प्रताड़ना झेलने वाले लोगों को याद है। हालांकि उस दौर में प्रताड़ना झेलने वाले अधिकतर लोकतंत्र के सेनानी अब दुनिया को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन जो जीवित हैं वे 25 जून 1975 की काली रात के मंजर को याद कर सहम जाते हैं।
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आपातकाल के दौर में बड़ौत से भी कई लोग जेल गए और घोर यातनाएं सहीं। उस दौर को याद करते हुए भाजपा विधि प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य और आरएसएस के सायं नगर कार्यवाह रहे विनोद जैन एडवोकेट बताते हैं कि तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने सभी राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगा दिया था। जनसंघ और आरएसएस पर खासा शिकंजा कसा गया था। 18 महीने के आपातकाल को कुछ लोगों ने छिपकर बिताया तो कुछ सत्याग्रह करके जेल की काल कोठरी में पहुंच गए, मगर तमाम दमनकारी नीतियों के बावजूद अपनी नीतियों से समझौता नहीं किया गया।
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विनोद बताते हैं कि उस समय बड़ौत के गांधी पार्क में केशव शाखा लगती थी, जिसमें बाल स्वयंसेवक संघ का ध्वज लेकर जाते थे। आपातकाल लगने के बाद पुलिस वाले शाखा नहीं लगने देते थे और सभी बाल स्वयंसेवकों को जेल भेजने की धमकी देकर भगा दिया करते थे। इसके बाद बाल स्वयंसेवक चोरी छिपे कभी जैन कॉलेज के सी-फिल्ड तो कभी बी-फिल्ड में शिविर लगाया करते थे। पुलिस को इसकी भनक लग जाती थी और वह शिविर बीच में ही बंद कराकर भगा दिया करते थे। कई बार बिजरौल रोड पर आम के बाग में भी सांयकालीन शिविर लगाया जाता था। बाद में सन 1977 में आपातकाल खत्म होने के बाद जनता पार्टी की सरकार बनी और संघ से प्रतिबंध हटाया गया। इसकी खुशी में आरएसएस ने बड़ौत में भव्य पथ संचलन निकाला था।
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