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Baghpat News: मैं हूं प्रेम, मैं ही हूं क्रांति की आवाज, शब्दों से बांध दूं चुप्पियों का राज
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बड़ौत। दशलक्षण पर्व के समापन पर पंच परमेष्ठी प्रचार समिति के तत्वावधान में रविवार की रात नगर के दिगंबर जैन कॉलेज परिसर में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जहां कवियों ने अपनी कविता पढ़कर श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया।
अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ़ कुमार विश्वास ने सबसे पहले मैं हूं प्रेम, मैं ही हूं क्रांति की आवाज, शब्दों से बांध दूं चुप्पियों का राज को पढ़कर सुनाया। उन्होंने अपनी चर्चित कविता कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है भी सुनाई। वहीं उन्होंने कविता के बीच में टैरिफ बढ़ाने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी तंज कसे कि भारतीय टैरिफ बढ़ाने से नहीं डरते हैं। वीर रस के कवि डॉ़ अर्जुन सिसौदिया ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वे भी बहुत अभागे, या तो प्रण को तोड़ा होगा, या रण से भागे होंगे।
इनके अलावा कवि शशिकांत यादव ने कहा कि लेखनी उठाई जब भी मैंने बसंत पर, जाने क्यों हमारा स्वाभिमान डोलने लगा, चोली, बिंदिया के गीत कभी मैं ना गा सकूंगा, यही एहसास मन को टटोलने लगा, देश की घिनौनी राजनीति देखकर रक्त खोलने लगा। वहीं सान्या रॉय, एकता भारती, महेंद्र मधुर, दुर्गेश तिवारी, आजम साकरी, दीपक पारेख आदि कवियों ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं से खूब तालियां बजवाई। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, संस्था के अध्यक्ष संजय जैन, रालोद नेता अश्वनी तोमर, धनेंद्र जैन, विजय जैन, राजेश जैन, विवेक जैन व विशाल जैन आदि उपस्थित रहे।
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अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ़ कुमार विश्वास ने सबसे पहले मैं हूं प्रेम, मैं ही हूं क्रांति की आवाज, शब्दों से बांध दूं चुप्पियों का राज को पढ़कर सुनाया। उन्होंने अपनी चर्चित कविता कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है भी सुनाई। वहीं उन्होंने कविता के बीच में टैरिफ बढ़ाने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी तंज कसे कि भारतीय टैरिफ बढ़ाने से नहीं डरते हैं। वीर रस के कवि डॉ़ अर्जुन सिसौदिया ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वे भी बहुत अभागे, या तो प्रण को तोड़ा होगा, या रण से भागे होंगे।
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इनके अलावा कवि शशिकांत यादव ने कहा कि लेखनी उठाई जब भी मैंने बसंत पर, जाने क्यों हमारा स्वाभिमान डोलने लगा, चोली, बिंदिया के गीत कभी मैं ना गा सकूंगा, यही एहसास मन को टटोलने लगा, देश की घिनौनी राजनीति देखकर रक्त खोलने लगा। वहीं सान्या रॉय, एकता भारती, महेंद्र मधुर, दुर्गेश तिवारी, आजम साकरी, दीपक पारेख आदि कवियों ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं से खूब तालियां बजवाई। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, संस्था के अध्यक्ष संजय जैन, रालोद नेता अश्वनी तोमर, धनेंद्र जैन, विजय जैन, राजेश जैन, विवेक जैन व विशाल जैन आदि उपस्थित रहे।
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