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Baghpat News: गांव रंगाना की बेटी आयुषी ने तेलंगाना में दौड़ में सबको पीछे छोड़ा
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ऊन। गांव रंगाना की बेटी आयुषी ने तेलंगाना में चल रही नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश व जिले का नाम रोशन किया। पदक जीतने से गांव में खुशी का माहौल है।
गांव रंगाना के किसान परिवार से आने वाली आयुषी चौधरी ने दौड़ के ट्रैक पर ऐसी रफ्तार पकड़ी कि अब उनका नाम राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक गूंज रहा है। लगभग पांच वर्षों की कड़ी मेहनत और संघर्ष ने उन्हें स्टेट व नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। आयुषी चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि अगर कुछ करने का जुनून हो और मेहनत सच्ची हो तो छोटे गांव की गलियों से निकलकर भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।
किसान परिवार में जन्मी आयुषी देश-प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए मुजफ्फरनगर के जाट काॅलोनी में किराये पर रहती हैं। वह लगभग पांच साल से मुजफ्फरनगर के चौधरी चरण सिंह स्टेडियम में 200 मीटर और 400 मीटर की स्प्रिंट इवेंट्स का अभ्यास कर रही हैं। खेत-खलिहान के बीच पली-बढ़ी आयुषी ने जब ट्रैक पर कदम रखा तो शुरू से ही उनका आत्मविश्वास और मेहनत साफ दिखाई देती थी। उनकी मेहनत का नतीजा है कि उन्होंने अब तक अनेक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पदक अपने नाम किए हैं। आयुषी ने 2023 में लखनऊ में हुई 400 मीटर की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया था। इसके बाद 2024 में अंतर विश्वविद्यालय 400 मीटर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक पर कब्जा किया था। 2025 में लखनऊ में हुई 400 मीटर अंतरराज्यीय प्रतियोगिता में रजत पदक और अंडर-23 राज्य स्तरीय प्रतियोगिता प्रयागराज में 200 और 400 मीटर दोनों में स्वर्ण पदक झटका था। कुछ दिन पहले हुई प्रयागराज में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दो-दो स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने प्रदेश के एथलेटिक्स ट्रैक पर लोहा मनवाया। अब हाल ही में 15 अक्तूबर को तेलंगाना के वारंगल में हुई नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर देश में जिले व प्रदेश के लिए गौरव बढ़ाया।
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परिवार का मिला सहयोग, बढ़ाया हौसला
आयुषी कहती हैं कि उनकी सफलता के पीछे उनके कोच चौधरी विकुल बालियान और बड़े भाई चौधरी विजय तोमर के साथ परिवार का अहम योगदान है। कोच ने उन्हें ट्रैक पर अनुशासन, तकनीक और फिटनेस का महत्व समझाया। वहीं भाई ने हर समय उनका हौसला बढ़ाया। इनके अलावा उप क्रीड़ा अधिकारी भूपेंद्र सिंह यादव भी लगातार मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि गांव की साधारण पृष्ठभूमि और किसान परिवार से आने के कारण चुनौतियां कम नहीं थीं। अब आयुषी इंटरनेशनल और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के लिए तैयारी करेंगी।
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गांव रंगाना के किसान परिवार से आने वाली आयुषी चौधरी ने दौड़ के ट्रैक पर ऐसी रफ्तार पकड़ी कि अब उनका नाम राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक गूंज रहा है। लगभग पांच वर्षों की कड़ी मेहनत और संघर्ष ने उन्हें स्टेट व नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। आयुषी चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि अगर कुछ करने का जुनून हो और मेहनत सच्ची हो तो छोटे गांव की गलियों से निकलकर भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।
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किसान परिवार में जन्मी आयुषी देश-प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए मुजफ्फरनगर के जाट काॅलोनी में किराये पर रहती हैं। वह लगभग पांच साल से मुजफ्फरनगर के चौधरी चरण सिंह स्टेडियम में 200 मीटर और 400 मीटर की स्प्रिंट इवेंट्स का अभ्यास कर रही हैं। खेत-खलिहान के बीच पली-बढ़ी आयुषी ने जब ट्रैक पर कदम रखा तो शुरू से ही उनका आत्मविश्वास और मेहनत साफ दिखाई देती थी। उनकी मेहनत का नतीजा है कि उन्होंने अब तक अनेक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पदक अपने नाम किए हैं। आयुषी ने 2023 में लखनऊ में हुई 400 मीटर की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया था। इसके बाद 2024 में अंतर विश्वविद्यालय 400 मीटर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक पर कब्जा किया था। 2025 में लखनऊ में हुई 400 मीटर अंतरराज्यीय प्रतियोगिता में रजत पदक और अंडर-23 राज्य स्तरीय प्रतियोगिता प्रयागराज में 200 और 400 मीटर दोनों में स्वर्ण पदक झटका था। कुछ दिन पहले हुई प्रयागराज में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दो-दो स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने प्रदेश के एथलेटिक्स ट्रैक पर लोहा मनवाया। अब हाल ही में 15 अक्तूबर को तेलंगाना के वारंगल में हुई नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर देश में जिले व प्रदेश के लिए गौरव बढ़ाया।
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परिवार का मिला सहयोग, बढ़ाया हौसला
आयुषी कहती हैं कि उनकी सफलता के पीछे उनके कोच चौधरी विकुल बालियान और बड़े भाई चौधरी विजय तोमर के साथ परिवार का अहम योगदान है। कोच ने उन्हें ट्रैक पर अनुशासन, तकनीक और फिटनेस का महत्व समझाया। वहीं भाई ने हर समय उनका हौसला बढ़ाया। इनके अलावा उप क्रीड़ा अधिकारी भूपेंद्र सिंह यादव भी लगातार मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि गांव की साधारण पृष्ठभूमि और किसान परिवार से आने के कारण चुनौतियां कम नहीं थीं। अब आयुषी इंटरनेशनल और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के लिए तैयारी करेंगी।