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विदेशों में हिंदी का परचम लहरा रहे वैज्ञानिक डा. रामकरण
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डॉ.रामकरण शर्मा
- फोटो : BAGHPAT
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हिंदी दिवस पर विशेष
- चीन, अमेरिका, इटली, जापान में काम कर चुके बागपत के ट्योढ़ी गांव के डा. रामकरण, अब सऊदी अरब में रह रहे
- डा. रामकरण शर्मा ने कहा कि विदेशों में इंटरनेशनल स्कूल में हिंदी सिखाने को मिलते है विशेष शिक्षक
- विदेशों में डा. रामकरण शर्मा से हिंदी सीखते है लोग, विदेशियों में हिंदी सीखने का रहता है क्रेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले के ट्योढ़ी गांव के रहने वाले वैज्ञानिक डा. रामकरण शर्मा विदेशों में हिंदी का परचम लहरा रहे है। वह जिस देश में काम करते है, वहां रहने वाले भारतीय खुद हिंदी में बात करते है और अपने विदेशी दोस्तों तक को बातचीत के लिए हिंदी सिखाते है। वह बताते है कि विदेशों में इंटरनेशनल स्कूलों में हिंदी सिखाने के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की हुई है।
ट्योढी के बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले डा. रामकरण आईआईटी दिल्ली से पीएचडी करने के बाद फेलोशिप मिलने पर शोध करने के लिए अमेरिका चले गए। यह फेलोशिप एशिया में केवल एक व्यक्ति को मिलती है। डा. रामकरण शर्मा चीन, अमेरिका, इटली, जापान में काम कर चुके है। वह इस समय एंजाइम पर सऊदी अरब स्थित किंग अब्दुल्ला इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक के तौर पर यूरोप व अमेरिका के वैज्ञानिकों के साथ शोध कर रहे हैं। डा. रामकरण ने बताया कि वह पहले जिन देशों में काम कर चुके है, वहां भारतीय भी रहते थे। वहां सभी भारतीय मिलने पर कभी अंग्रेजी व अन्य भाषा में बातचीत नहीं करते है, बल्कि अपनी मातृभाषा हिंदी में बात करते थे। उनको बातचीत करते देखकर विदेशों के रहने वाले दोस्त भी हिंदी सीखने की इच्छा जताते है तो वह उनको हिंदी सिखाते है और उनके कई दोस्त हिंदी के जरूरी शब्द सीखकर बातचीत करने लगे है। इस तरह अभी तक काफी लोगों को हिंदी सिखा चुके है।
डा. रामकरण बताते है कि उनके दो बच्चे है, जिनको इंटरनेशनल स्कूल में हिंदी सिखाने के लिए विशेष शिक्षक मिलते है। उनके बच्चों के साथ ही अन्य कई बच्चे भी हिंदी सीखते है। उनके अनुसार भारतीय संस्कृति, भारतीय संगीत, हिंदी गाने, बॉलीवुड और तरह-तरह के खान-पान से कई देशों के लोग काफी प्रभावित हैं। वह कहते है कि अपनी मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए हर किसी को प्रयास करना चाहिए।
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- चीन, अमेरिका, इटली, जापान में काम कर चुके बागपत के ट्योढ़ी गांव के डा. रामकरण, अब सऊदी अरब में रह रहे
- डा. रामकरण शर्मा ने कहा कि विदेशों में इंटरनेशनल स्कूल में हिंदी सिखाने को मिलते है विशेष शिक्षक
- विदेशों में डा. रामकरण शर्मा से हिंदी सीखते है लोग, विदेशियों में हिंदी सीखने का रहता है क्रेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले के ट्योढ़ी गांव के रहने वाले वैज्ञानिक डा. रामकरण शर्मा विदेशों में हिंदी का परचम लहरा रहे है। वह जिस देश में काम करते है, वहां रहने वाले भारतीय खुद हिंदी में बात करते है और अपने विदेशी दोस्तों तक को बातचीत के लिए हिंदी सिखाते है। वह बताते है कि विदेशों में इंटरनेशनल स्कूलों में हिंदी सिखाने के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की हुई है।
ट्योढी के बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले डा. रामकरण आईआईटी दिल्ली से पीएचडी करने के बाद फेलोशिप मिलने पर शोध करने के लिए अमेरिका चले गए। यह फेलोशिप एशिया में केवल एक व्यक्ति को मिलती है। डा. रामकरण शर्मा चीन, अमेरिका, इटली, जापान में काम कर चुके है। वह इस समय एंजाइम पर सऊदी अरब स्थित किंग अब्दुल्ला इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक के तौर पर यूरोप व अमेरिका के वैज्ञानिकों के साथ शोध कर रहे हैं। डा. रामकरण ने बताया कि वह पहले जिन देशों में काम कर चुके है, वहां भारतीय भी रहते थे। वहां सभी भारतीय मिलने पर कभी अंग्रेजी व अन्य भाषा में बातचीत नहीं करते है, बल्कि अपनी मातृभाषा हिंदी में बात करते थे। उनको बातचीत करते देखकर विदेशों के रहने वाले दोस्त भी हिंदी सीखने की इच्छा जताते है तो वह उनको हिंदी सिखाते है और उनके कई दोस्त हिंदी के जरूरी शब्द सीखकर बातचीत करने लगे है। इस तरह अभी तक काफी लोगों को हिंदी सिखा चुके है।
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डा. रामकरण बताते है कि उनके दो बच्चे है, जिनको इंटरनेशनल स्कूल में हिंदी सिखाने के लिए विशेष शिक्षक मिलते है। उनके बच्चों के साथ ही अन्य कई बच्चे भी हिंदी सीखते है। उनके अनुसार भारतीय संस्कृति, भारतीय संगीत, हिंदी गाने, बॉलीवुड और तरह-तरह के खान-पान से कई देशों के लोग काफी प्रभावित हैं। वह कहते है कि अपनी मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए हर किसी को प्रयास करना चाहिए।
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