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12 साल बाद भी नहीं मिले डॉक्टर
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 18 Jun 2016 12:48 AM IST
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बिजरौल गांव में झाड़ियों से अटा पशु चिकित्सालय।
- फोटो : amar ujala
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बागपत के बिजरौल के पौने तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार बिजरौल के एनीमल पॉली क्लीनिक में 14 साल बाद भी पदों के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है। ग्रामीण फरियाद करके थक चुके हैं, लेकिन बागपत से लखनऊ तक कोई सुनने को तैयार नहीं है। कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवास खाली पड़े है। परिसर में झाडिय़ां उग आई हैं।
वर्ष 2003-04 में बिजरौल क्षेत्र के पशुपालकों के पशुओं के बेहतर उपचार के लिए यहां पौने तीन करोड़ की लागत से एनीमल पॉली क्लीनिक का निर्माण कराया गया था। बसपा सरकार में भवन बनकर तैयार हो गया, लेकिन 14 साल बाद भी यहां पदों के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। आठ डॉक्टरों के अलावा यहां पांच साइंटिस्ट की नियुक्ति होनी थी। कुल स्वीकृत पदों की संख्या थी 27, लेकिन यहां वर्तमान में यहां केवल दो डॉक्टर ही तैनात हैं।
इसका खामियाजा क्षेत्र के पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है। पशुओं के बीमार होने की स्थिति में पशुपालकों को प्राइवेट डॉक्टरों के यहां महंगा इलाज कराना पड़ता है। ग्रामीण यशपाल चौधरी, रविंद्र प्रधान, गुल्लू, रणबीर, सतबीर, पंकज कुमार का कहना है कि बागपत के अधिकारियों से लेकर लखनऊ तक मामले की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी।
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ये मिलनी थीं सुविधाएं
पॉली क्लीनिक में पशुओं के एक्सरे, हड्डी रोग की जांच और इलाज, गंभीर बीमारी की हालत में पशुओं को क्लीनिक पर ही रोकने और अन्य जांच की सुविधा की जानी थी, लेकिन यह केवल फाइलों में दबकर रह गईं।
अस्पताल परिसर में घास ही घास
स्टाफ के लिए बनाए गए आवासीय भवन धीरे-धीरे जर्जर हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में ऊंची घास खड़ी हुई है। ग्रामीण कहते हैं कि सही इलाज नहीं मिलने के चलते प्राइवेट पशुपालक चांदी काट रहे हैं।
स्टाफ की तैनाती नहीं
बिजरौल के पूर्व प्रधान अशोक भूत का कहना है कि ग्रामीणों ने गांव में अस्पताल के निर्माण के लिए काफी संघर्ष किया था, लेकिन धरातल पर केवल भवन मिला। सपा सरकार से कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन यहां डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की तैनाती नहीं की गई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह कहते हैं कि यहां दो डॉक्टरों की तैनाती है। रिक्त पदों के विषय में शासन से समय-समय पर पत्र व्यवहार किया जाता है।
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वर्ष 2003-04 में बिजरौल क्षेत्र के पशुपालकों के पशुओं के बेहतर उपचार के लिए यहां पौने तीन करोड़ की लागत से एनीमल पॉली क्लीनिक का निर्माण कराया गया था। बसपा सरकार में भवन बनकर तैयार हो गया, लेकिन 14 साल बाद भी यहां पदों के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। आठ डॉक्टरों के अलावा यहां पांच साइंटिस्ट की नियुक्ति होनी थी। कुल स्वीकृत पदों की संख्या थी 27, लेकिन यहां वर्तमान में यहां केवल दो डॉक्टर ही तैनात हैं।
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इसका खामियाजा क्षेत्र के पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है। पशुओं के बीमार होने की स्थिति में पशुपालकों को प्राइवेट डॉक्टरों के यहां महंगा इलाज कराना पड़ता है। ग्रामीण यशपाल चौधरी, रविंद्र प्रधान, गुल्लू, रणबीर, सतबीर, पंकज कुमार का कहना है कि बागपत के अधिकारियों से लेकर लखनऊ तक मामले की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी।
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ये मिलनी थीं सुविधाएं
पॉली क्लीनिक में पशुओं के एक्सरे, हड्डी रोग की जांच और इलाज, गंभीर बीमारी की हालत में पशुओं को क्लीनिक पर ही रोकने और अन्य जांच की सुविधा की जानी थी, लेकिन यह केवल फाइलों में दबकर रह गईं।
अस्पताल परिसर में घास ही घास
स्टाफ के लिए बनाए गए आवासीय भवन धीरे-धीरे जर्जर हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में ऊंची घास खड़ी हुई है। ग्रामीण कहते हैं कि सही इलाज नहीं मिलने के चलते प्राइवेट पशुपालक चांदी काट रहे हैं।
स्टाफ की तैनाती नहीं
बिजरौल के पूर्व प्रधान अशोक भूत का कहना है कि ग्रामीणों ने गांव में अस्पताल के निर्माण के लिए काफी संघर्ष किया था, लेकिन धरातल पर केवल भवन मिला। सपा सरकार से कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन यहां डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की तैनाती नहीं की गई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह कहते हैं कि यहां दो डॉक्टरों की तैनाती है। रिक्त पदों के विषय में शासन से समय-समय पर पत्र व्यवहार किया जाता है।