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Baghpat News: ग्रामीणों के लिए अभिशाप बना मलकपुर मिल से निकले वाला गंदा पानी
Mon, 06 Feb 2023 11:58 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Mon, 06 Feb 2023 11:58 PM IST
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मलकपुर चीनी मिल के नाले में भरा रसायन युक्त पानी
बड़ौत। मलकपुर गांव के बाहरी छोर से बहने वाले मलकपुर चीनी मिल के नाले में भरा रसायन युक्त पानी और लगातार उठती दुर्गंध ने यहां के निवासियों का जीना दूभर किया हुआ है। कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रामीण ग्रसित होते जा रहे हैं।
चीनी मिल का पहला पेराई सत्र 1999 में शुरू हुआ था मलकपुर चीनी मिल क्षेत्र का लगभग 23 हजार हेक्टेयर गन्ने का रकबा है। लगभग 35 हजार किसान चीनी मिल में अपना गन्ना डालते हैं। पिछले 10 साल के अंदर गांव में संक्रामक बीमारियों और सबसे अधिक गम्भीर कैंसर से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। गांव के लिए मलकपुर चीनी मिल का यह गंदा नाला किसी अभिशाप से कम नहीं है। मिल से निकलने वाला रसायन युक्त पानी नाले में डाला जाने लगा। यह पानी वहां के भूजल में मिल कर आसपास के हैंड़पंपों में पहुंच चुका है।13 हैंड़पंपों का सैंपल हो चुका है फेल
जल निगम द्वारा गांव के 25 हैंड़पंपों के पानी के नमूने लिए थे जिसमें आठ निजी हैंड़पंप तथा शेष सरकारी हैंड़पंप के नमूने शामिल थे। जांच के दौरान 13 हैंड़पंपों के नमूने फेल हो गए। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी थी। यह रिपोर्ट भी कागजों के ढेर में दबकर कहीं गुम हो गई है।
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पानी खरीदकर पीने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों विनोद, सुभाष, हरेंद्र, राजबीर का कहना है कि हैंडपंप से निकलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। पीने के लिए पानी का जग प्रतिदिन खरीदना पड़ता है। वहीं नहाने व अन्य
कार्य के लिए हैंडपंप का ही पानी प्रयोग में लाते हैं। यही कारण है कि प्रत्येक घर में त्वचा से संबंधित बीमारी से ग्रसित लोग मौजूद हैं।
क्या कहते है अधिकारी
सुभाष सिंह का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर वें मिल अधिकारियों से बात कर हल निकालने का प्रयास करेंगे। साथ ही खराब हो चुके हैंडपंप को जांच करा फिर से रिबोर कराया जाएगा।
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चीनी मिल का पहला पेराई सत्र 1999 में शुरू हुआ था मलकपुर चीनी मिल क्षेत्र का लगभग 23 हजार हेक्टेयर गन्ने का रकबा है। लगभग 35 हजार किसान चीनी मिल में अपना गन्ना डालते हैं। पिछले 10 साल के अंदर गांव में संक्रामक बीमारियों और सबसे अधिक गम्भीर कैंसर से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। गांव के लिए मलकपुर चीनी मिल का यह गंदा नाला किसी अभिशाप से कम नहीं है। मिल से निकलने वाला रसायन युक्त पानी नाले में डाला जाने लगा। यह पानी वहां के भूजल में मिल कर आसपास के हैंड़पंपों में पहुंच चुका है।13 हैंड़पंपों का सैंपल हो चुका है फेल
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जल निगम द्वारा गांव के 25 हैंड़पंपों के पानी के नमूने लिए थे जिसमें आठ निजी हैंड़पंप तथा शेष सरकारी हैंड़पंप के नमूने शामिल थे। जांच के दौरान 13 हैंड़पंपों के नमूने फेल हो गए। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी थी। यह रिपोर्ट भी कागजों के ढेर में दबकर कहीं गुम हो गई है।
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पानी खरीदकर पीने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों विनोद, सुभाष, हरेंद्र, राजबीर का कहना है कि हैंडपंप से निकलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। पीने के लिए पानी का जग प्रतिदिन खरीदना पड़ता है। वहीं नहाने व अन्य
कार्य के लिए हैंडपंप का ही पानी प्रयोग में लाते हैं। यही कारण है कि प्रत्येक घर में त्वचा से संबंधित बीमारी से ग्रसित लोग मौजूद हैं।
क्या कहते है अधिकारी
सुभाष सिंह का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर वें मिल अधिकारियों से बात कर हल निकालने का प्रयास करेंगे। साथ ही खराब हो चुके हैंडपंप को जांच करा फिर से रिबोर कराया जाएगा।