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मेडिकल ऑफिसर और एएनएम पर प्रसव जिम्मेदारी
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जिले में महज दो महिला रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल में हैं तैनात
प्रवीण शर्मा
बागपत। मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने की सलाह दी जाती है। वहीं, प्रसव महिला रोग विशेषज्ञ की देखरेख में कराने का दावा किया जाता है। जिले में प्रसव की जिम्मेदारी महज दो महिला चिकित्सकों पर है। जिला अस्पताल के अतिरिक्त सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसव की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर और एएनएम पर है। यहां कोई महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हैं।
जिले में एक संयुक्त जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और सरूरपुर व टीकरी की अपग्रेड सीएचसी समेत आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके अतिरिक्त 23 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिला संयुक्त अस्पताल के अतिरिक्त किसी भी सरकारी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। जिसके चलते प्रसव के दौरान गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञों के अभाव में लोग निजी अस्पतालों को अधिक तव्वजो देते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अप्रैल में सरकारी अस्पतालों में 470 जबकि प्राइवेट अस्पतालों में 1259 प्रसव हुए हैं। वहीं, मई में सरकारी अस्पताल में 484 और निजी अस्पतालों में 1531 डिलिवरी हुई हैं।
रेफर कर दिए जाते हैं गंभीर मरीज
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि जिले में दो महिला रोग विशेषज्ञ हैं और उनकी तैनाती जिला संयुक्त अस्पताल में है। सीएचसी पर प्रसव की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर और एएनएम की है। महिला रोग विशेषज्ञ के अभाव में गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है।
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वर्जन
जिले में महिला रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसलिए सभी सीएचसी पर डिलिवरी की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर पर है। मरीज की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल में प्रसव कराया जाता है।-सीएमओ डॉ. आरके टंडन
मई में हुई डिलीवरी
ब्लॉक सरकारी निजी
बागपत 23 268
बड़ौत 140 390
छपरौली 52 190
बिनौली 64 294
पिलाना 127 133
खेकड़ा 01 256
जिला अस्पताल 77 ---
कुल 484 1531
नोट- (आंकड़े सीएमओ कार्यालय से लिए गए हैं।)
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प्रवीण शर्मा
बागपत। मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने की सलाह दी जाती है। वहीं, प्रसव महिला रोग विशेषज्ञ की देखरेख में कराने का दावा किया जाता है। जिले में प्रसव की जिम्मेदारी महज दो महिला चिकित्सकों पर है। जिला अस्पताल के अतिरिक्त सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसव की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर और एएनएम पर है। यहां कोई महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हैं।
जिले में एक संयुक्त जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और सरूरपुर व टीकरी की अपग्रेड सीएचसी समेत आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके अतिरिक्त 23 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिला संयुक्त अस्पताल के अतिरिक्त किसी भी सरकारी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। जिसके चलते प्रसव के दौरान गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञों के अभाव में लोग निजी अस्पतालों को अधिक तव्वजो देते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अप्रैल में सरकारी अस्पतालों में 470 जबकि प्राइवेट अस्पतालों में 1259 प्रसव हुए हैं। वहीं, मई में सरकारी अस्पताल में 484 और निजी अस्पतालों में 1531 डिलिवरी हुई हैं।
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रेफर कर दिए जाते हैं गंभीर मरीज
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि जिले में दो महिला रोग विशेषज्ञ हैं और उनकी तैनाती जिला संयुक्त अस्पताल में है। सीएचसी पर प्रसव की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर और एएनएम की है। महिला रोग विशेषज्ञ के अभाव में गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है।
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जिले में महिला रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसलिए सभी सीएचसी पर डिलिवरी की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर पर है। मरीज की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल में प्रसव कराया जाता है।-सीएमओ डॉ. आरके टंडन
मई में हुई डिलीवरी
ब्लॉक सरकारी निजी
बागपत 23 268
बड़ौत 140 390
छपरौली 52 190
बिनौली 64 294
पिलाना 127 133
खेकड़ा 01 256
जिला अस्पताल 77 ---
कुल 484 1531
नोट- (आंकड़े सीएमओ कार्यालय से लिए गए हैं।)