{"_id":"649add609e103fb6c6060376","slug":"dedicated-16-arghyas-on-mandalay-in-shri-siddha-chakra-mahamandal-vidhan-baghpat-news-c-31-1-smrt1003-1348-2023-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान में मांडले पर समर्पित किए 16 अर्घ्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान में मांडले पर समर्पित किए 16 अर्घ्य
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो संख्या 8
बड़ौत। श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर चल रहे श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन मंगलवार को मांडले पर 16 अर्घ्य समर्पित किए गए।
मंगलवार सुबह सबसे पहले सौधर्म इंद्र संजय जैन ने शांतिनाथ भगवान को पांडुकशिला पर विराजमान किया। इसके बाद पंडित सुनील शास्त्री टीकमगढ़ वालों के निर्देशन में प्रासुक जल से सौधर्म इंद्र ने श्री जी का अभिषेक किया। कुबेर इंद्र अतुल जैन, सनत इंद्र विनय जैन, ईशान इंद्र सविन जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन और अन्य सभी इंद्रों ने भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद शांतिनाथ भगवान की शांति धारा की गई। इसके तुरंत बाद दैनिक पूजा में शांतिनाथ, नंदीश्वर दीप, 24 तीर्थंकरों को पूजा गया। विधान में श्रद्धालुओं ने मांडले पर 16 अर्घ्य समर्पित किए। विधान के बीच में सतीश जैन ने मधुर भजन सुनाकर सबको भक्ति रस से सराबोर कर दिया और इंद्र-इंद्राणियों ने भावविभोर होकर नृत्य किया। शाम के समय शांतिनाथ भगवान की संगीतमयी आरती की। कार्यक्रम को सफल बनाने में सतेंद्र जैन, नरेश चंद जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, आदिश जैन का सहयोग रहा।
विज्ञापन
बड़ौत। श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर चल रहे श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन मंगलवार को मांडले पर 16 अर्घ्य समर्पित किए गए।
मंगलवार सुबह सबसे पहले सौधर्म इंद्र संजय जैन ने शांतिनाथ भगवान को पांडुकशिला पर विराजमान किया। इसके बाद पंडित सुनील शास्त्री टीकमगढ़ वालों के निर्देशन में प्रासुक जल से सौधर्म इंद्र ने श्री जी का अभिषेक किया। कुबेर इंद्र अतुल जैन, सनत इंद्र विनय जैन, ईशान इंद्र सविन जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन और अन्य सभी इंद्रों ने भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद शांतिनाथ भगवान की शांति धारा की गई। इसके तुरंत बाद दैनिक पूजा में शांतिनाथ, नंदीश्वर दीप, 24 तीर्थंकरों को पूजा गया। विधान में श्रद्धालुओं ने मांडले पर 16 अर्घ्य समर्पित किए। विधान के बीच में सतीश जैन ने मधुर भजन सुनाकर सबको भक्ति रस से सराबोर कर दिया और इंद्र-इंद्राणियों ने भावविभोर होकर नृत्य किया। शाम के समय शांतिनाथ भगवान की संगीतमयी आरती की। कार्यक्रम को सफल बनाने में सतेंद्र जैन, नरेश चंद जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, आदिश जैन का सहयोग रहा।