फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Death Anniversary:Chaudhary Charan Singh was example of honesty, had only Rs 470 in his account on last day

पुण्यतिथि विशेष: ईमानदारी की मिसाल थे चौधरी चरण सिंह, निधन के समय खाते में थे मात्र 470 रुपये

Mon, 29 May 2023 11:10 AM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत
मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 29 May 2023 11:10 AM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की आज पुण्यतिथि है। रमाला चीनी मिल की स्थापना कराकर किसानों के लिए उन्होंने तरक्की की नई राह खोली थी। वह दो बार मुख्यमंत्री व देश के प्रधानमंत्री रहने के बावजूद सादगी की मूर्ति और आमजन के हितैषी थे। करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक वर्तमान राजनीतिज्ञों के लिए मिसाल हैं। 

विज्ञापन
Death Anniversary:Chaudhary Charan Singh was example of honesty, had only Rs 470 in his account on last day
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागपत जिला चौधरी साहब की कर्मभूमि रहा। कण-कण में चौधरी चरण सिंह की यादें हैं। बुजुर्ग उन्हें शिद्दत से याद करते हैं। किसान हित में किए गए उनके कार्य भुलाए नहीं भूलते। उन्होंने कभी लालच नहीं किया। 

विज्ञापन


विज्ञापन


इसका बड़ा उदाहरण उनके निधन के समय का है, उनके निधन के समय उनके खातें में मात्र 470 रुपयों थे, जबकि आज वर्तमान समय से राजनीति लोग करोड़ों रुपयों के मालिक बने हुए हैं। उन्होंने रमाला चीनी मिल की स्थापना कराकर किसानों के लिए तरक्की की नई राह खोली। सादगी और सच्चाई हमेशा उनकी बड़ी ताकत रही।

विज्ञापन
विज्ञापन

Death Anniversary:Chaudhary Charan Singh was example of honesty, had only Rs 470 in his account on last day
चौधरी चरण सिंह

दो बार मुख्यमंत्री व देश के प्रधानमंत्री रहे
एक जुलाई 1952 को यूपी मेें उनके बदौलत जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और गरीबों को अधिकार मिला। उन्होंने लेखपाल के पद का सृजन भी किया। किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उप्र भूमि संरक्षण कानून को पारित किया। 3 अप्रैल 1967 को उप्र के मुख्यमंत्री बने।

17 अप्रैल 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में मध्यावधि चुनाव में उन्हें अच्छी सफलता मिली और दोबारा से 17 फरवरी 1970 के वे मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे केंद्र में गृहमंत्री बने। 28 जुलाई 1989 को चौधरी चरण सिंह समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस यूथ के सहयोग से प्रधानमंत्री थे।

Death Anniversary:Chaudhary Charan Singh was example of honesty, had only Rs 470 in his account on last day
चौधरी चरण सिंह, अजित सिंह और जयंत चौधरी - फोटो : Amar Ujala

ग्रामीण जीवन की रखते थे गहरी समझ
चौधरी चरण सिंह किसान राजनीति के क्षीतिज पर लगभग पांच दशक तक छाए रहे। वह कृषि अर्थव्यवस्था की गहरी समझ रखने वाले उच्च कोटि के विद्धान, लेखक एवं अर्थशास्त्री थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता है।

उन्होंने गाजियाबाद में वकालत शुरू की और 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया और तीन बार कारावास झेला। उन्होंने सरकारी नौकरियों में कृषकों और कृषि मजदूरों के बच्चों के लिए 50 फीसदी आरक्षण की मांग की थी।

Death Anniversary:Chaudhary Charan Singh was example of honesty, had only Rs 470 in his account on last day
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय

उनकी स्पृष्टवादी, ईमानदारी ओर सादगी का विपक्ष भी मानता है लोहा
छपरौली विधायक डा अजय कुमार बताते हैं कि राजनीति में उन जैसी शख्सियत फिर कोई नहीं हुई। आम आदमी, गरीब और किसान के सच्चे हितैषी थे। राजनीति में गरीबों को आगे बढ़ाया।

लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा तक गरीब और खेती किसानी से जुड़े लोगों को वह लेकर गए। कहा कि स्पष्ट सोच और सटीक फैसले उनकी ताकत थी। वह किसान के लिए हमेशा फिक्रमंद रहे। किसी तरह के लोभ में कभी नहीं फंसे और कार्यकर्ताओं को भी हमेशा लालच से दूर रहने की प्रेरणा देते रहे। उनकी स्पृष्टवादी, ईमानदारी और सादगी का विपक्ष भी लोहा मानते हैं।

Death Anniversary:Chaudhary Charan Singh was example of honesty, had only Rs 470 in his account on last day
चौधरी चरण सिंह - फोटो : Twitter

पश्चिम यूपी में हाईकोर्ट की बेंच चाहते थे चौधरी साहब
वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बैंच का मुद्दा भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने 38 साल पहले उठाया था। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसे पश्चिम उत्तर प्रदेश के हक में बताया था। वर्ष 1981 में बागपत के अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उनके दिल्ली स्थित आवास पर जाकर मिला और हाईकोर्ट बैंच के लिए समर्थन मांगा। इस पर बड़े चौधरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर जनता की मांग न्यायोचित ठहराया था। इस पत्र की प्रतिलिपि बड़े चौधरी ने हाईकोर्ट बैंच की संघर्ष समिति मेरठ को भी भेजी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed