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Baghpat News: पति की जिंदगी बची...पत्नी का प्रेम अमर हो गया
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बड़ौत। करवाचौथ पर पत्नियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, मगर यहां गरिमा व दीपांजलि जैसी भी महिलाएं हैं, जो केवल व्रत तक सीमित नहीं हैं। इन्होंने अपनी किडनी देकर पति की जिंदगी बचाई है, इसलिए ही इनका प्रेम अमर हो गया और हर कोई इनकी मिसाल दे रहा है।
दर्द निवारक दवाइयों से बिगड़ी हालत, पत्नी गरिमा ने दी किडनी
कान्हड़ गांव के रहने वाले सैनिक कमल की वर्ष 2014 में पटियाला में तैनाती थी। वहां खेलते समय उनकी कमर में दर्द हुआ। उन्होंने मुजफ्फरनगर के एक चिकित्सक से उपचार कराया। उनको दर्द निवारक दवाइयां दी गईं, जिसके बाद उनकी किडनी पर असर पड़ा। धीरे-धीरे किडनी खराब हो गई। चिकित्सकों ने साफ कह दिया कि अब किडनी प्रत्यारोपण से जान बचाई जा सकती है।
ऐसे में पत्नी गरिमा ने पति को अपनी देकर उनकी जान बचाने का फैसला लिया। 15 मार्च 2018 में उनका किडनी प्रत्यारोपण हुआ। पत्नी के इस फैसले से कमल को नया जीवन मिला। गरिमा का कहना है कि पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का होता है। जब जीवनसाथी की जिंदगी पर संकट आए तो उसका साथ देना सबसे जरूरी है। पति की जिंदगी बचाने के लिए किडनी दान करना उनके लिए अपने रिश्ते की जिम्मेदारी निभाना था। उनके लिए कमल का स्वस्थ रहना और परिवार में खुशियां लौटना सबसे बड़ी बात है।
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कोरोना के बाद बिगड़ी नवीन की सेहत, पत्नी दीपांजलि ने दिया साथ
बागपत के मोहल्ला ठाकुरद्वारा में रहने वाली दीपांजलि बाल संरक्षण अधिकारी के पद पर तैनात रह चुकी हैं। उनके पति नवीन कुमार केंद्रीय विद्यालय बावली में पीजीटी के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद नवीन का शुगर बढ़ गया और वर्ष 2022 में उनकी किडनी संबंधी परेशानी बढ़ने लगी। जब समस्या ज्यादा हो गई तो चिकित्सकों ने किडनी प्रत्यारोपण के लिए कहा।
ऐसे में दीपांजलि ने पति को किडनी देने का फैसला किया। 10 जुलाई 2024 को नवीन का किडनी प्रत्यारोपण हुआ। दीपांजलि के इस फैसले ने परिवार को नई उम्मीद दी। दीपांजलि का कहना है कि शादी के समय एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा किया जाता है। इस वादे की असली अहमियत तब होती है, जब पति का कठिनाइयों में साथ दिया जाए। पति की बीमारी के दौरान उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही थी कि नवीन स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकें। उनके अनुसार जीवनसाथी का रिश्ता प्रेम और विश्वास पर टिका होता है और मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहना ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
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दर्द निवारक दवाइयों से बिगड़ी हालत, पत्नी गरिमा ने दी किडनी
कान्हड़ गांव के रहने वाले सैनिक कमल की वर्ष 2014 में पटियाला में तैनाती थी। वहां खेलते समय उनकी कमर में दर्द हुआ। उन्होंने मुजफ्फरनगर के एक चिकित्सक से उपचार कराया। उनको दर्द निवारक दवाइयां दी गईं, जिसके बाद उनकी किडनी पर असर पड़ा। धीरे-धीरे किडनी खराब हो गई। चिकित्सकों ने साफ कह दिया कि अब किडनी प्रत्यारोपण से जान बचाई जा सकती है।
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ऐसे में पत्नी गरिमा ने पति को अपनी देकर उनकी जान बचाने का फैसला लिया। 15 मार्च 2018 में उनका किडनी प्रत्यारोपण हुआ। पत्नी के इस फैसले से कमल को नया जीवन मिला। गरिमा का कहना है कि पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का होता है। जब जीवनसाथी की जिंदगी पर संकट आए तो उसका साथ देना सबसे जरूरी है। पति की जिंदगी बचाने के लिए किडनी दान करना उनके लिए अपने रिश्ते की जिम्मेदारी निभाना था। उनके लिए कमल का स्वस्थ रहना और परिवार में खुशियां लौटना सबसे बड़ी बात है।
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कोरोना के बाद बिगड़ी नवीन की सेहत, पत्नी दीपांजलि ने दिया साथ
बागपत के मोहल्ला ठाकुरद्वारा में रहने वाली दीपांजलि बाल संरक्षण अधिकारी के पद पर तैनात रह चुकी हैं। उनके पति नवीन कुमार केंद्रीय विद्यालय बावली में पीजीटी के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद नवीन का शुगर बढ़ गया और वर्ष 2022 में उनकी किडनी संबंधी परेशानी बढ़ने लगी। जब समस्या ज्यादा हो गई तो चिकित्सकों ने किडनी प्रत्यारोपण के लिए कहा।
ऐसे में दीपांजलि ने पति को किडनी देने का फैसला किया। 10 जुलाई 2024 को नवीन का किडनी प्रत्यारोपण हुआ। दीपांजलि के इस फैसले ने परिवार को नई उम्मीद दी। दीपांजलि का कहना है कि शादी के समय एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा किया जाता है। इस वादे की असली अहमियत तब होती है, जब पति का कठिनाइयों में साथ दिया जाए। पति की बीमारी के दौरान उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही थी कि नवीन स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकें। उनके अनुसार जीवनसाथी का रिश्ता प्रेम और विश्वास पर टिका होता है और मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहना ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।