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शिकोहपुर में लहलहा रही चने की फसल

Sun, 18 Feb 2018 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Sun, 18 Feb 2018 12:15 AM IST
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Cultivation of gram in Shikohpur
शिकोहपुर गांव के एक खेत में लहलहाती चने की फसल।  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
गेहूं और गन्ने की परंपरागत खेती को छोड़कर किसान आगे बढ़ने लगे हैं। शिकोहपुर गांव के किसानों ने गेहूं के बजाए खेतों में चने की किस्मों की बुवाई की है। खेतों में चना लहलहाने लगा है। खास बात यह है कि फसल तैयार करने में न पानी की जरूरत है और न ही रासायनिक खादों की। बेहतर पैदावार से किसान भी खुश नजर आ रहे हैं।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चार दशक पहले तक किसान चने की खेती भी करते थे, लेकिन इसके बाद किसान गन्ने को नगदी फसल माना जाने लगा। गेहूं और गन्ने का फसल चक्र बन गया। चना धीरे-धीरे खेतों से दूर होता चला गया, लेकिन शिकोहपुर गांव में एक बार फिर चने की खेती लहलहा रही है।
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गेहूं और गन्ने के चक्र को तोड़कर यहां के दस से अधिक किसानों ने खेती के नए तरीके को अपनाया है। किसान सतेंद्र सिंह बताते हैं कि छोले में प्रयोग किए जाने वाले चने की किस्मों की करीब दो सौ बीघा जमीन में बुआई की गई है। फसल बेहतर खड़ी है।
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धान की फसल कटाई के बाद किसानों ने गेहूं के बजाए चने की फसल की बुवाई की। फसल तैयार हो रही है। रबी की यह फसल भी करीब छह माह में ही तैयार हो जाती है। किसान बिल्लू का कहना है कि प्रयोग सफल माना जा सकता है। गेहूं से ज्यादा मुनाफा चने का किसान लेगा।

चने की फसल के लिए न अधिक पानी की जरूरत होती है। पानी की जरूरत नहीं तो बिजली की बचत होगी। इसके अलावा रासायनिक खादों के प्रयोग की जरूरत भी नहीं पड़ती। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से समय-समय पर छिड़काव किया जाता है।

कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के अध्यक्ष डॉ. गजेंद्र सिंह कहते हैं कि चने की फसल में पानी की जरूरत अधिक नहीं पड़ती। यह नई और अच्छी पहल है। किसान प्रयोग कर सकते हैं। चने के अलग-अलग किस्मों का मार्केट में अलग-अलग भाव है। बेहतर दाम मिल जाते हैं।

मुनाफा इतना, किसानों की बल्ले-बल्ले
किसान सतेंद्र सिंह का कहना है कि चने की फसल का उनका दूसरा साल है। चना इसलिए बोया गया, क्योंकि इसका प्रयोग छोले की सब्जी बनाने में किया जाता है। इसकी खपत अधिक है। एक बीघा खेत में दो क्विंटल की पैदावार होती है।

पिछले साल 10 हजार रुपये क्विंटल तक चना बिका है। इस बार देखते हैं कि उन्हें क्या भाव मिलता है। जबकि गेहूं का गणित देखें तो एक बीघा में औसत पैदावार तीन से चार क्विंटल की होती है। जबकि भाव 1735 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में चना किसान की जेब भरने के लिए फायदे का सौदा है।


पहले साल 50, दूसरे साल 200 बीघा
बागपत। चने की खेती करने वाला शिकोहपुर जिले में अकेला गांव है। पिछले वर्ष यहां पर सिर्फ 50 बीघा में पूसा से बीज लाकर किसानों ने चने की खेती की बुवाई शुरू की । अन्य किसानों ने फायदे को देखकर इस बार कुछ किसान बढ़े और दो सौ बीघा में चने की फसल की बुआई हुई है।
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