{"_id":"5973a5f24f1c1ba3328b46fe","slug":"value-of-property-in-fir-showed-zero","type":"story","status":"publish","title_hn":"एफआईआर में संपत्ति की वैल्यू जीरो दिखाई","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एफआईआर में संपत्ति की वैल्यू जीरो दिखाई
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे निर्माण में 455 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ और एफआईआर में संपत्ति की वैल्यू जीरो दिखाई गई है। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के लिए आईएएस और पीसीएस अफसरों को बचा लिया गया है। इसका खुलासा आईटीआई से हुआ है।
आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया हाईवे निर्माण में 455 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इसकी उसने उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण से सूचना मांगी। जो सूचना मिली वह चौका देने वाली थी। हाईवे निर्माण में घोटाला हुआ 445 करोड़ का, लेकिन जमीन की वैल्यू जीरो दिखाई गई है।
जबकि 18 करोड़ रुपये के पेड़ बेचे गए हैं। इसकी भी वास्तविक कीमत ज्यादा है। उन्होंने बताया इस तरह से चालबाजी की गई है ताकि आईएएस और पीसीएस अफसरों पर कोई आंच न आए। जबकि दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे निर्माण का गाजियाबाद, बागपत, शामली और सहारनपुर के लिए डीएम सहित 13 विभागों के प्रमुख सचिव मॉनीटिंग कर रहे थे।
विज्ञापन
यह ही नहीं, सबसे कमजोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपियों पर 467, 468, 471 लोक संपत्ति अधिनियम के तहत मुकदमा होना चाहिए था। आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया हाईवे पर स्थित पेड़ों की कीमत की जांच और हाईवे निर्माण के लिए जिम्मेदार सभी विभागों के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए जनहित याचिका दायर की जाएगी।
विज्ञापन
आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया हाईवे निर्माण में 455 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इसकी उसने उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण से सूचना मांगी। जो सूचना मिली वह चौका देने वाली थी। हाईवे निर्माण में घोटाला हुआ 445 करोड़ का, लेकिन जमीन की वैल्यू जीरो दिखाई गई है।
विज्ञापन
जबकि 18 करोड़ रुपये के पेड़ बेचे गए हैं। इसकी भी वास्तविक कीमत ज्यादा है। उन्होंने बताया इस तरह से चालबाजी की गई है ताकि आईएएस और पीसीएस अफसरों पर कोई आंच न आए। जबकि दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे निर्माण का गाजियाबाद, बागपत, शामली और सहारनपुर के लिए डीएम सहित 13 विभागों के प्रमुख सचिव मॉनीटिंग कर रहे थे।
विज्ञापन
यह ही नहीं, सबसे कमजोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपियों पर 467, 468, 471 लोक संपत्ति अधिनियम के तहत मुकदमा होना चाहिए था। आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया हाईवे पर स्थित पेड़ों की कीमत की जांच और हाईवे निर्माण के लिए जिम्मेदार सभी विभागों के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए जनहित याचिका दायर की जाएगी।