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पाकिस्तानी नूरजहां के घर कैसे पहुंची मतदाता पर्ची?

Thu, 30 Nov 2017 01:14 AM IST
Updated Thu, 30 Nov 2017 01:14 AM IST
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पाकिस्तानी नूरजहां के घर कैसे पहुंची मतदाता पर्ची?
बागपत। पिछले 55 साल से पाकिस्तानी नागरिक की हैसियत से एलटीवी यानि लांग टर्म वीजा पर शहर में रह रही नूरजहां के घर निकाय चुनाव की मतदाता पर्ची पहुंच गई। पाकिस्तानी नागरिक होने के बाद भी आखिर वोटर लिस्ट में नूरजहां का नाम कैसे जुड़ा इस पर सवाल है। प्रशासनिक चूक का यह बड़ा मामला है। पहचान पत्र नहीं होने के कारण नूरजहां मतदान नहीं कर सकती।
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बागपत के पुराने कस्बे में रह रही नूरजहां की उम्र 62 साल है। पिछले 55 साल से वह नागरिकता की लड़ाई लड़ रही है। निकाय चुनाव के लिए उसके घर राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता पर्ची पहुंच गई, जबकि वह प्रमाण पत्रों में पाकिस्तान की नागरिक हैं। एसडीएम विवेक कुमार यादव ने कहा एलटीवी पर रह रहे किसी भी व्यक्ति का वोट नहीं बन सकता, वह मामले की जांच कराएंगे। गौरतलब है कि मेरठ के मोहल्ला बनी सराय निवासी इमामुद्दीन वर्ष 1959 में अपनी पत्नी आशिया और तीन साल की बेटी नूरजहां के साथ पाकिस्तान के कराची चला गया । वहीं की नागरिकता ली और जिंदगी बसर करने लगा, लेकिन वर्ष 1961 में इमामुदीन का इंतकाल हो गया। आशिया अकेली हुई तो सिवाल खास से उसका भाई जाकर मां-बेटी को फिर से अपने वतन ले आया। तब नूरजहां की उम्र थी, पांच साल। पेंच यह था कि यह परिवार वापस आ गया, लेकिन अब वह पाकिस्तानी नागरिक थे। पांच साल की नूरजहां बड़ी होती गई और इसी तरह बढ़ता गया उसका वीजा। बागपत के केतीपुरा के हनीफ के साथ उसका निकाह किया गया। अब नूरजहां की उम्र करीब 62 साल है। पति का भी इंतकाल हो चुका है, लेकिन 55 साल बाद भी उसे अपने ही वतन की नागरिकता नहीं मिली। परिवार के लोग भी परेशान हैं।
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55 साल का संघर्ष और एक मतदाता पर्ची
बागपत। नूरजहां कहती है कि उसे न पाकिस्तान जाना याद है और न ही आना। जब से होश संभाला घर में वीजा, पुलिस, नागरिकता यही सब सुनती रही। बड़ी हुई तो पता चला उसे कैसे पाकिस्तान की नागरिकता मिल गई। अब घर की तीसरी पीढ़ी चल पड़ी है। पिछले 55 साल से वीजा बढ़ जाता है, फिर एक साल कटता है। उसके घर मतदाता पर्ची पहुंच गई। कैसे पहुंची, इस विषय में वह कुछ नहीं जानती है।
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इसलिए बन गई पाकिस्तानी
बागपत। केतीपुरा मोहल्ले की नूरजहां अपने वालिद और अम्मी के साथ कराची गई । मां-बाप ने वहीं की नागरिकता ले ली। इसलिए जब वह भारत लौटी, तब वह पाक नागरिक की हैसियत से लौटी। कानूनी तौर पर उसे अब भी यहां की नागरिकता नहीं है, वह लांग टर्म वीजा पर रही रह रही है। प्रत्येक वर्ष उसे यह वीजा बढ़वाना पड़ता है।
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