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प्रशासन धरनास्थल किसानों की सुध लेता तो नहीं होती किसान की मौत
Updated Sun, 27 May 2018 01:36 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
किसानों के 21 मई से चल रहे तहसील में धरने को लेकर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। बार-बार किसान घोषण कर रहे थे कि गर्मी के चलते किसानों की हालत खराब हो रही है, यदि प्रशासन इसको गंभीरता से लेता तो शनिवार को किसान की जान बच सकती थी।
धरना स्थल किसान 21 मई से मांगों को लेकर धरने पर बैठे और उनकी प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकाल। धरने पर बैठे किसान भीषण गर्मी से पीड़ित थे, किसानों का कहना था कि उनके कई बार मांग की गयी यहां पर चिकित्सा कोई व्यवस्था नहीं की, इसके चलते एक किसान को मौत का मुंह देखना पड़ा। किसान की मौत के बाद प्रशासन हरकत मेें आया, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम राजीव त्यागी के नेतृत्व मेें धरना स्थल पर पहुंची और मृतक किसान की जांच के बाद धरना स्थल पर घायल जिले सिंह निवासी सिनौली की जांच की, जिनका बीपी 160-180 पाया। डॉ. राजीव त्यागी ने बताया कि यह हार्ट अटैक हाईटेंशन के कारण हो सकता है, लेकिन पीएम रिपोर्ट के बाद स्थिति का पता लगेगा। किसानों ने इस बात को लेकर आक्रोश था कि यदि प्रशासन धरने पर बैठे किसानों का स्वास्थ्य का लाभ देखता तो किसान की मौत नहीं होती।
शव को देखने पर रो पड़ी पत्नी और परिजन
बड़ौत। धरना स्थल पर जिवाना गांव के उदयवीर की मौत से उसका परिवार परेशान हो चला है, उसका छोटा भाई मुकुल और बेटे प्रहलाद, दीपक और सागर हैं और 16 बीघा जमीन है। वे अपने पिता की मौत पर आंसु बहा रहे थे। उनका कहना था कि उनका पिता किसानों के लिए यहां पर धरना देना आया था, लेकिन अब वह हमारे बीच नहीं रहा। शाम के समय मृतक उदयवीर की पत्नी भी धरना स्थल पर पहुंची और उन्होंने पति को देख रोने लगी। उसके साथ आयी महिलाएं उसे डांस बंधाकर उसे अलग ले गयी।
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नौ घंटे तक किसान की मौत के बाद तहसील में बनी रही हंगामे की स्थिति
बड़ौत। धरना स्थल किसान उदयवीर की मौत हार्ट अटैक से सुबह साढे़ दस बजे हुई। बार-बार किसान अधिकारियों को बुलाने की बात करते रहे, लेकिन रविवार को खेकड़ा मेें पीएम के कार्यक्रम मेें सभी अधिकारी जुटे थे। एक-एक कर पहले तहसीलदार, उसके बाद एसडीएम उनके बीच पहुंचे, लेकिन बात नहीं बनी और हंगामे की स्थिति बनी रही, यहां तक की धरना स्थल पर पहुंची अरविंद कुमार द्विवेदी के साथ किसान नेता नरेंद्र राणा ने अभद्रता का व्यवहार किया, इसे लेकर हंगामा हुआ और धरना समाप्ति तक साढे़ सात बजे तक हंगामे की स्थिति बनी रही। लोगों का कहना था कि जब पूरा प्रशासन खेकड़ा में आया हुआ है और एक किसान की मौत हो चुकी है, उन्हें किसान की सुध लेने की फुरसत नहीं है। इसको लेकर किसानों में काफी आक्रोश है और भाजपा पर किसान विरोध आरोप लगाएं।
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किसानों के 21 मई से चल रहे तहसील में धरने को लेकर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। बार-बार किसान घोषण कर रहे थे कि गर्मी के चलते किसानों की हालत खराब हो रही है, यदि प्रशासन इसको गंभीरता से लेता तो शनिवार को किसान की जान बच सकती थी।
धरना स्थल किसान 21 मई से मांगों को लेकर धरने पर बैठे और उनकी प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकाल। धरने पर बैठे किसान भीषण गर्मी से पीड़ित थे, किसानों का कहना था कि उनके कई बार मांग की गयी यहां पर चिकित्सा कोई व्यवस्था नहीं की, इसके चलते एक किसान को मौत का मुंह देखना पड़ा। किसान की मौत के बाद प्रशासन हरकत मेें आया, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम राजीव त्यागी के नेतृत्व मेें धरना स्थल पर पहुंची और मृतक किसान की जांच के बाद धरना स्थल पर घायल जिले सिंह निवासी सिनौली की जांच की, जिनका बीपी 160-180 पाया। डॉ. राजीव त्यागी ने बताया कि यह हार्ट अटैक हाईटेंशन के कारण हो सकता है, लेकिन पीएम रिपोर्ट के बाद स्थिति का पता लगेगा। किसानों ने इस बात को लेकर आक्रोश था कि यदि प्रशासन धरने पर बैठे किसानों का स्वास्थ्य का लाभ देखता तो किसान की मौत नहीं होती।
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शव को देखने पर रो पड़ी पत्नी और परिजन
बड़ौत। धरना स्थल पर जिवाना गांव के उदयवीर की मौत से उसका परिवार परेशान हो चला है, उसका छोटा भाई मुकुल और बेटे प्रहलाद, दीपक और सागर हैं और 16 बीघा जमीन है। वे अपने पिता की मौत पर आंसु बहा रहे थे। उनका कहना था कि उनका पिता किसानों के लिए यहां पर धरना देना आया था, लेकिन अब वह हमारे बीच नहीं रहा। शाम के समय मृतक उदयवीर की पत्नी भी धरना स्थल पर पहुंची और उन्होंने पति को देख रोने लगी। उसके साथ आयी महिलाएं उसे डांस बंधाकर उसे अलग ले गयी।
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नौ घंटे तक किसान की मौत के बाद तहसील में बनी रही हंगामे की स्थिति
बड़ौत। धरना स्थल किसान उदयवीर की मौत हार्ट अटैक से सुबह साढे़ दस बजे हुई। बार-बार किसान अधिकारियों को बुलाने की बात करते रहे, लेकिन रविवार को खेकड़ा मेें पीएम के कार्यक्रम मेें सभी अधिकारी जुटे थे। एक-एक कर पहले तहसीलदार, उसके बाद एसडीएम उनके बीच पहुंचे, लेकिन बात नहीं बनी और हंगामे की स्थिति बनी रही, यहां तक की धरना स्थल पर पहुंची अरविंद कुमार द्विवेदी के साथ किसान नेता नरेंद्र राणा ने अभद्रता का व्यवहार किया, इसे लेकर हंगामा हुआ और धरना समाप्ति तक साढे़ सात बजे तक हंगामे की स्थिति बनी रही। लोगों का कहना था कि जब पूरा प्रशासन खेकड़ा में आया हुआ है और एक किसान की मौत हो चुकी है, उन्हें किसान की सुध लेने की फुरसत नहीं है। इसको लेकर किसानों में काफी आक्रोश है और भाजपा पर किसान विरोध आरोप लगाएं।