कृषि विवि दीक्षांत समारोह: राज्यपाल बोलीं-सपनों को दें उड़ान, किसानों के साथ बढ़ेगा देश का सम्मान
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावियों को सपनों को उड़ान देने और किसानों के साथ मिलकर देश का सम्मान बढ़ाने का संदेश दिया।
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मेरठ के मोदीपुरम स्थित सरदार वलभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित अन्य वक्ताओं ने मेधावियों व डिग्री लेने वाले छात्र-छात्राओं को संदेश दिया कि वे अपने सपनों को उड़ान दें। अनुसंधान के साथ किसानों के साथ मिलकर चलें। इससे देश का सम्मान बढ़ेगा।
कुलाधिपति ने कहा कि राजभवन की निरीक्षण टीम की रिपोर्ट के आधार पर चिन्हित कमियों को एक माह के भीतर दूर करने के निर्देश दिए। वहीं, बेहतर व्यवस्थाओं की खुले दिल से प्रशंसा भी की। इसमें छात्र-छात्राओं के छात्रावासों में कुछ सुविधाओं की कमी साफ-सफाई से जुड़े मुद्दों व खाली पड़े भवनों के समुचित उपयोग का उल्लेख किया गया।
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बताया गया कि निरीक्षण के दौरान कई व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं। अच्छे कार्यों को आगे भी प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने उपलब्ध बजट का प्रभावी उपयोग कर बेहतर शैक्षणिक और आवासीय सुविधाएं देने पर जोर दिया।
कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ें: अतुल धीरजलाल
विशिष्ट अतिथि सरदार पटेल के प्रपौत्र अतुल धीरजलाल पटेल ने कहा कि छात्र डिग्री लेने के बाद कृषि क्षेत्र में ही नहीं अन्य क्षेत्रों में भी कार्य करने के लिए आगे बढ़ सकेंगे। विवि से स्नातक होकर जीवन की नई यात्रा प्रारंभ करते हैं तो अनेक चुनौतियां भी आती हैं। उन्होंने कहा कि बड़े सपने देखें और आगे बढ़ें। युवाओं को किसानों के लिए भी काम करना चाहिए।
माइक पकड़कर बोलीं कुलाधिपति...शोर क्यों मचा रहे हो, मेरे पास आओ
समारोह के दौरान पीछे की और बैठे पीएचडी के कुछ छात्र-छात्राओं ने शोर मचा दिया। वह शोर कुलाधिपति के कानों तक पहुंचा तो उन्होंने माइक मंगाकर बीच में ही बोला शोर क्यों मचा रहे हो, क्या समस्या है। कोई भी पांच छात्र या छात्राएं मेरे पास आ जाओ।
कुलाधिपति के इतना कहते ही पूरा सभागार शांत हो गया। मंच पर चार छात्राएं पहुंचीं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- लड़कों में इतना भी दम नहीं कि खुद आगे आएं, लड़कियों को आगे कर दिया। राज्यपाल ने छात्रों से कहा कि कार्यक्रम गरिमापूर्ण ढंग से चल रहा है और यदि फोटो खिंचवाने या अन्य कोई दिक्कत है तो मुझे बताओ। सभी को फोटो खिंचवाना है तो खिंच जाएगा। बाद में सभी डिग्रीधारकों के साथ फोटो खिंचवाए गए।
25 साल के इतिहास में पहली बार कुर्ता-पायजामा में नजर आए कुलपति, डीन और निदेशक
कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में इस बार एक नई परंपरा ने 25 वर्ष के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। पहली बार कुलपति, सभी डीन, निदेशक प्रबंध परिषद के सदस्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पारंपरिक भारतीय वेशभूषा कुर्ता-पायजामा पहनकर समारोह में शामिल हुए।
अब तक विश्वविद्यालय के सभी दीक्षांत समारोहों में अकादमिक गाउन और औपचारिक पश्चिमी परिधान ही प्रमुख रूप से पहने जाते रहे हैं। इस बार भारतीय संस्कृति और स्वदेशी परंपरा को सम्मान देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन ने पारंपरिक भारतीय परिधान को अपनाया।
मंच पर सभी वरिष्ठ अधिकारियों का एक जैसी वेशभूषा में उपस्थित होना समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और अतिथियों ने इस बदलाव को सराहा। एक समान भारतीय परिधान ने सादगी और भारतीय संस्कृति के गौरव का संदेश दिया।
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कृषि अनुसंधान और नवाचार से बदलेगी खेती की तस्वीर: शाही
दीक्षांत समारोह में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कृषि को आधुनिक तकनीक अनुसंधान और नवाचार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं बल्कि किसानों की समृद्धि और देश की खाद्य सुरक्षा के मजबूत आधार हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवाचार से खेती की तस्वीर बदलेगी।
उन्होंने कहा कि योगी सरकार कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान, प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि यंत्रीकरण और नई तकनीकों पर ध्यान दे रही है। शाही ने कहा कि विश्वविद्यालयों में विकसित नई तकनीकों और शोध को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर खेतों तक पहुंचाना होगा। इससे उत्पादन बढ़ेगा खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा और शोध का उपयोग कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान खोजने में करें।
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि उत्पादन में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और इसमें कृषि विश्वविद्यालयों का महत्वपूर्ण योगदान है। सरकार कृषि शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी कार्य कर रही है।
इन्हें भी मिला सम्मान
कुलाधिपति आंनदीबेन पटेल ने कार्यक्रम में पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इनमें राकेश देवी, प्रतिभा, बबीता शर्मा, पूनम, बबीता इसके अलावा कृषक उत्पादक संगठन ने स्वयं के बनाए उत्पाद दिए।
अनीता एग्री फार्म बड़ी प्रोडयूसर कंपनी मुजफ्फरनगर, सुरेंद्र पाल किसान मल्टीपरपज प्रोडयूसर कंपनी मेरठ, हर्षवर्धन त्यागी आरंभशील किसान उत्पादक संगठन सहकारी समिति हापुड, सुनील कुमार चौहान शुगरकैन भोजपुर, निशा चौहान कीरतपुर, फेड फार्मर प्रोडयूसर कंपनी बिजनौर भी शामिल रहे।
प्राकृतिक खेती, भारतीय ज्ञान परंपरा से मजबूत होगी कृषि : आचार्य बालकृष्ण
दीक्षांत समारोह में पतंजलि विवि के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राकृतिक खेती से देश की कृषि व्यवस्था मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि खेती केवल अन्न उत्पादन तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से भी जुड़ी है। कार्यक्रम के दौरान कृषि विवि और पतंजलि भारतीय आयु विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान हरिद्वार और कृषि विवि के बीच कृषि आयुर्वेद एवं अनुसंधान क्षेत्र में भी सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
प्राकृतिक खेती, भारतीय ज्ञान परंपरा से मजबूत होगी कृषि : आचार्य बालकृष्ण
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती से लागत घटेगी और मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी। उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध होगा। उन्होंने किसानों को औषधीय पौधों और जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी।
कृषि वैज्ञानिकों और युवाओं से कहा कि वे कृषि विकास के क्षेत्र में आगे आएं। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य राष्ट्र निर्माण और मानवता की सेवा होना चाहिए।