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बागपत: 100 रुपये बीघा एकत्र करके पहले गोशाला को दिए
Sun, 12 Feb 2023 05:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sun, 12 Feb 2023 05:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। निराश्रित गोवंश से फसल बचाने के लिए किसान खेतों में पहरेदारी करने को मजबूर हैं। वहीं, अग्रवाल मंडी टटीरी, कासमाबाद दुड़भा व अहैड़ा गांव के किसानों ने उनसे निजात पाने के लिए अलग पहल की है। उन्होंने 100 रुपये बीघा के हिसाब से एक लाख 60 हजार रुपये एकत्र कर गोशाला में दिए। इसके गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छुड़वाया।
अग्रवाल मंडी टटीरी, कासमाबाद दुड़भा व अहैड़ा के किसानों के खेतों में 150 से अधिक निराश्रित गोवंश घूमते रहते थे। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद कर रहे थे। निराश्रित गोवंश की समस्या का समाधान कराने के लिए किसान रातभर खेतों में पहरेदारी करने को मजबूर थे। वे कई किसानों को निराश्रित गोवंश हमला कर घायल कर चुके थे। जिसके चलते किसानों द्वारा निराश्रित गोवंश को गोशाला भेजे जाने के कारण समस्या का समाधान हो गया।
उठानी पड़ रही परेशानी
खेत में खड़ी फसल बचाने के लिए किसानों को पहरेदारी करनी पड़ रही थी। जिस कारण किसानों के दूसरे कार्य अधूरे रह जाते थे। किसानों के सहयोग से निराश्रित गोवंश का समाधान होने से राहत मिली है।-धर्म सिंह शर्मा
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गोवंश छोड़ने वालों पर रखेंगे नजर
निराश्रित गोवंश को पकड़वाने से पहले गांव में मुनादी कराकर लोगों से न छोड़ने की अपील की गई थी। अब गोवंश छोड़ने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। गोवंश छोड़नं वालों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।-अहिराम सिंह
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जंगल गोवंश से मुक्त हुआ
निराश्रित गोवंश की समस्या को देखते हुए अक्सर लोग शिकायत लेकर आ जाते थे। इसके लिए बार-बार पशुपालन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता था। टटीरी, अहैड़ा व दुड़भा गांव के किसानों व ग्रामीणों के सहयोग से गोवंशों को गोशाला भिजवाया जा सका। जिसे जंगल गोवंशों से मुक्त हो गया।-हरकरण सिंह, प्रधान, अहैड़ा
वर्जन-किसानों ने गोशाला में गोवंश के चारे-पानी के लिए सहयोग दिया है। भविष्य में भी मदद करने का आश्वासन दिया है। किसानों व प्रधान के सहयोग से 150 से अधिक गोवंशों को सरूरपुरकलां, खट्टा समेत अन्य गोशाला में भिजवाया जा सका।-डाॅ. रमेश चंद्रा, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी
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बागपत। निराश्रित गोवंश से फसल बचाने के लिए किसान खेतों में पहरेदारी करने को मजबूर हैं। वहीं, अग्रवाल मंडी टटीरी, कासमाबाद दुड़भा व अहैड़ा गांव के किसानों ने उनसे निजात पाने के लिए अलग पहल की है। उन्होंने 100 रुपये बीघा के हिसाब से एक लाख 60 हजार रुपये एकत्र कर गोशाला में दिए। इसके गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छुड़वाया।
अग्रवाल मंडी टटीरी, कासमाबाद दुड़भा व अहैड़ा के किसानों के खेतों में 150 से अधिक निराश्रित गोवंश घूमते रहते थे। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद कर रहे थे। निराश्रित गोवंश की समस्या का समाधान कराने के लिए किसान रातभर खेतों में पहरेदारी करने को मजबूर थे। वे कई किसानों को निराश्रित गोवंश हमला कर घायल कर चुके थे। जिसके चलते किसानों द्वारा निराश्रित गोवंश को गोशाला भेजे जाने के कारण समस्या का समाधान हो गया।
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उठानी पड़ रही परेशानी
खेत में खड़ी फसल बचाने के लिए किसानों को पहरेदारी करनी पड़ रही थी। जिस कारण किसानों के दूसरे कार्य अधूरे रह जाते थे। किसानों के सहयोग से निराश्रित गोवंश का समाधान होने से राहत मिली है।-धर्म सिंह शर्मा
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गोवंश छोड़ने वालों पर रखेंगे नजर
निराश्रित गोवंश को पकड़वाने से पहले गांव में मुनादी कराकर लोगों से न छोड़ने की अपील की गई थी। अब गोवंश छोड़ने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। गोवंश छोड़नं वालों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।-अहिराम सिंह
जंगल गोवंश से मुक्त हुआ
निराश्रित गोवंश की समस्या को देखते हुए अक्सर लोग शिकायत लेकर आ जाते थे। इसके लिए बार-बार पशुपालन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता था। टटीरी, अहैड़ा व दुड़भा गांव के किसानों व ग्रामीणों के सहयोग से गोवंशों को गोशाला भिजवाया जा सका। जिसे जंगल गोवंशों से मुक्त हो गया।-हरकरण सिंह, प्रधान, अहैड़ा
वर्जन-किसानों ने गोशाला में गोवंश के चारे-पानी के लिए सहयोग दिया है। भविष्य में भी मदद करने का आश्वासन दिया है। किसानों व प्रधान के सहयोग से 150 से अधिक गोवंशों को सरूरपुरकलां, खट्टा समेत अन्य गोशाला में भिजवाया जा सका।-डाॅ. रमेश चंद्रा, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी