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डीएम, वैज्ञानिक और शिक्षाविद् ने विद्यार्थियों को किया प्रोत्साहित
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बागपत। छात्र-छात्राओं को बेहतर भविष्य के लिए गुर बताने को अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया। ऑनलाइन आयोजित सेमिनार में डीएम, विदेश में रहने वाले बागपत के वैज्ञानिक, शिक्षाविद ने छात्र-छात्राओं की शंकाओं को दूर किया और उनको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सेमिनार में देशभर से करीब 400 छात्र-छात्राओं व अभिभावकों ने हिस्सा लिया।
सऊदी अरब में रहने वाले बागपत के ट्योढ़ी गांव के वैज्ञानिक डॉ. रामकरण शर्मा ने ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया। इसमें डीएम राजकमल यादव ने छात्रों को प्रेरित करते हुए एक छोटे से शहर से आईएएस बनने के अपने सफर को साझा किया। डीएम ने परीक्षा के दबाव को दूर करने के लिए छात्र-छात्राओं को मंत्र देते हुए कहा कि उनको खेलना भी चाहिए और किसी भी स्थिति में हार नहीं माननी चाहिए।
इस दौरान डॉ. प्रियंका शर्मा ने कला वर्ग से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बताया कि वह किस तरह से सेना अधिकारी, शिक्षक, प्रोफेसर, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, पत्रकार बन सकते हैं। बिंदु सुभाष ने विज्ञान, इंजीनियरिंग व मेडिकल के क्षेत्र में अवसरों के बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया आईआईटी से इंजीनियरिंग किस तरह कर सकते हैं और इंजीनियरिंग करने के बाद आईईएस परीक्षा पास करने और डॉक्टर बनने के लिए छात्रों को क्या करना है।
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अनुपमा शर्मा ने विदेश में पढ़ाई के अवसरों के बारे में जानकारी दी। विदेशी संस्थानों से पढ़ाई करने के लिए जीआरई व टोफेल जैसी परीक्षा कैसे पास करने हैं, इस बारे में भी अनुपमा ने बताया। के. चेन्ना लक्ष्मी ने परीक्षा से होने वाले तनाव को दूर करने के टिप्स छात्रों को दिए तो बेमिसाल बागपत कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राम करन ने छात्रों को सलाह दी कि जीवन में असफलता से कैसे निपटा जाए। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वह बच्चों को प्रोत्साहित करें और बच्चों पर उच्च अंक प्राप्त करने का अधिक दबाव नहीं बनाना चाहिए। सेमिनार से जुड़े सवाल छात्रों से पूछे गए और सबसे पहले सही जवाब देने वाले पांच छात्र जमेश्वर प्रसाद साहू, प्रगति राजपूत, प्रांजलि शर्मा, गायत्री खट्टर व तुषार राजपूत को 50000 रुपये तक के पुरस्कार साईकोमेट्रिक टेस्ट व काउंसिंलिंग के रूप में दिए।
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सऊदी अरब में रहने वाले बागपत के ट्योढ़ी गांव के वैज्ञानिक डॉ. रामकरण शर्मा ने ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया। इसमें डीएम राजकमल यादव ने छात्रों को प्रेरित करते हुए एक छोटे से शहर से आईएएस बनने के अपने सफर को साझा किया। डीएम ने परीक्षा के दबाव को दूर करने के लिए छात्र-छात्राओं को मंत्र देते हुए कहा कि उनको खेलना भी चाहिए और किसी भी स्थिति में हार नहीं माननी चाहिए।
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इस दौरान डॉ. प्रियंका शर्मा ने कला वर्ग से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बताया कि वह किस तरह से सेना अधिकारी, शिक्षक, प्रोफेसर, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, पत्रकार बन सकते हैं। बिंदु सुभाष ने विज्ञान, इंजीनियरिंग व मेडिकल के क्षेत्र में अवसरों के बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया आईआईटी से इंजीनियरिंग किस तरह कर सकते हैं और इंजीनियरिंग करने के बाद आईईएस परीक्षा पास करने और डॉक्टर बनने के लिए छात्रों को क्या करना है।
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अनुपमा शर्मा ने विदेश में पढ़ाई के अवसरों के बारे में जानकारी दी। विदेशी संस्थानों से पढ़ाई करने के लिए जीआरई व टोफेल जैसी परीक्षा कैसे पास करने हैं, इस बारे में भी अनुपमा ने बताया। के. चेन्ना लक्ष्मी ने परीक्षा से होने वाले तनाव को दूर करने के टिप्स छात्रों को दिए तो बेमिसाल बागपत कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राम करन ने छात्रों को सलाह दी कि जीवन में असफलता से कैसे निपटा जाए। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वह बच्चों को प्रोत्साहित करें और बच्चों पर उच्च अंक प्राप्त करने का अधिक दबाव नहीं बनाना चाहिए। सेमिनार से जुड़े सवाल छात्रों से पूछे गए और सबसे पहले सही जवाब देने वाले पांच छात्र जमेश्वर प्रसाद साहू, प्रगति राजपूत, प्रांजलि शर्मा, गायत्री खट्टर व तुषार राजपूत को 50000 रुपये तक के पुरस्कार साईकोमेट्रिक टेस्ट व काउंसिंलिंग के रूप में दिए।