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सीबीआई अदालत भेज दी गई मुन्ना बजरंगी हत्याकांड़ की पत्रावलियां
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- गाजियाबाद की सीबीआई अदालत में होगी अब केस की सुनवाई
- अब तक जिला जज की अदालत में सुना जा रहा था मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। जिला जेल में हुए पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की सुनवाई अब सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद में होगी। जिला जज की अदालत से चर्चित प्रकरण की पत्रावलियां सीबीआई कोर्ट भेज दी गई है। सीबीआई ने मामले की जांच की है।
जिला कारागार में नौ जुलाई 2018 की सुबह पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई थी। हत्या का मुकदमा कुख्यात सुनील राठी के खिलाफ दर्ज कराया गया था। आरोपी सुनील राठी के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसके बाद ट्रायल शुरू हो गया था। मगर, मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह की याचिका पर मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे। सीबीआई ने मार्च 2020 में प्रकरण की जांच शुरू की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई अदालत में ही मुकदमे का ट्रायल चलेगा। जिला जज की अदालत से पत्रावलियां सीबीआई अदालत को भेज दी गई है।
सिपाही, डॉक्टर और जेलर की हो चुकी थी गवाही
बागपत। अब तक यह मामला जिला जज की अदालत में ट्रायल पर चल रहा था। सिपाही, डॉक्टर और तत्कालीन जेलर की गवाही जिला जज की अदालत में हो चुकी थी। मगर, सीबीआई जांच शुरू होने के बाद सुनील राठी को भी पेशी पर नहीं लाया गया।
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यह था मामला
बागपत। बड़ौत से बसपा के पूर्व विधायक एवं वर्तमान में भाजपा नेता लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से साल 2017 में मोबाइल के जरिये रंगदारी मांगी थी। पुलिस की जांच में मुन्ना बजरंगी का नाम सामने आया था। इसी मामले में आठ जुलाई 2018 की रात बजरंगी को बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था। नौ जुलाई की सुबह सवा छह बजे बजरंगी की तन्हाई बैरक के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद शासन ने प्रकरण की जांच कराई थी। लापरवाही उजागर होने पर तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, मुख्य बंदी रक्षक अरजिंदर सिंह और माधव कुमार को सस्पेंड किया था।
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- अब तक जिला जज की अदालत में सुना जा रहा था मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। जिला जेल में हुए पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की सुनवाई अब सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद में होगी। जिला जज की अदालत से चर्चित प्रकरण की पत्रावलियां सीबीआई कोर्ट भेज दी गई है। सीबीआई ने मामले की जांच की है।
जिला कारागार में नौ जुलाई 2018 की सुबह पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई थी। हत्या का मुकदमा कुख्यात सुनील राठी के खिलाफ दर्ज कराया गया था। आरोपी सुनील राठी के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसके बाद ट्रायल शुरू हो गया था। मगर, मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह की याचिका पर मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे। सीबीआई ने मार्च 2020 में प्रकरण की जांच शुरू की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई अदालत में ही मुकदमे का ट्रायल चलेगा। जिला जज की अदालत से पत्रावलियां सीबीआई अदालत को भेज दी गई है।
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सिपाही, डॉक्टर और जेलर की हो चुकी थी गवाही
बागपत। अब तक यह मामला जिला जज की अदालत में ट्रायल पर चल रहा था। सिपाही, डॉक्टर और तत्कालीन जेलर की गवाही जिला जज की अदालत में हो चुकी थी। मगर, सीबीआई जांच शुरू होने के बाद सुनील राठी को भी पेशी पर नहीं लाया गया।
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यह था मामला
बागपत। बड़ौत से बसपा के पूर्व विधायक एवं वर्तमान में भाजपा नेता लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से साल 2017 में मोबाइल के जरिये रंगदारी मांगी थी। पुलिस की जांच में मुन्ना बजरंगी का नाम सामने आया था। इसी मामले में आठ जुलाई 2018 की रात बजरंगी को बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था। नौ जुलाई की सुबह सवा छह बजे बजरंगी की तन्हाई बैरक के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद शासन ने प्रकरण की जांच कराई थी। लापरवाही उजागर होने पर तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, मुख्य बंदी रक्षक अरजिंदर सिंह और माधव कुमार को सस्पेंड किया था।