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Baghpat News: घिसे टायरों पर बसों का फर्राटा, जान पर बनी हादसों की रफ्तार
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बड़ौत। बड़ौत डिपो में 70 से अधिक खटारा बसें घिसे टायरों के सहारे दौड़ रही हैं। 90 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती इन बसों से हमेशा हादसों का खतरा बना हुआ है। इन बसों के लिए नए टायरों का इंतजार है। कहा जा रहा है कि अगर टायर उपलब्ध नहीं कराए गए तो रूटों किसी भी समय बड़े हादसों से इन्कार नहीं किया जा सकता।
बड़ौत डिपो में 222 बसें बड़ौत-मुजफ्फरनगर, बड़ौत-दिल्ली, बड़ौत-शामली, बड़ौत-सहारनपुर, बड़ौत-बागपत, बड़ौत-मेरठ समेत अन्य लंबे रूटों पर संचालित हैं। इन बसों से रोजाना सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। टायरों की कमी के चलते अलवर, कानपुर और लखनऊ रूट पर बसों का संचालन बंद हो गया है। वहीं बड़ौत-मुजफ्फरनगर, बड़ौत-दिल्ली और बड़ौत-शामली रूट की करीब 40 बसें टायर बदलने के लिए डिपो में खड़ी हैं।
एक लाख किलोमीटर बसें चलने पर बदलना होता है टायर
रोडवेज बस में एक लाख किलोमीटर चलने के बाद टायर बदलने की जरूरत होती है। डिपो में टायरों की कमी के कारण बसों को दो से ढाई लाख किलोमीटर तक चलाया जा रहा है। इस तरह दोगुने से अधिक दूरी तक टायरों को इस्तेमाल करने से हादसा हो सकता है।
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केस नंबर-एक
बस संख्या यूपी 78 जेटी 4328 कानपुर रूट पर संचालित है। चार दिन पहले कानपुर से बड़ौत आई। बस दिल्ली बस स्टैंड पर सवारियों को उतारकर डिपो जा रही थी। औद्योगिक पुलिस चौकी के पास अचानक बस का टायर फट गया। उस समय बस में कोई सवारी नहीं थी। इसके बाद बस को डिपो में खड़ा कर दिया गया, लेकिन अभी तक नया टायर नहीं लगाया गया।
केस नंबर-दो
बस संख्या यूपी 78 जेडएन 2885 लखनऊ रूट पर चलती है। कई दिन पहले लखनऊ के लिए डिपो से निकलते ही खराब टायर से अचानक हवा निकल गई। इससे बस का संतुलन बिगड़ गया। बस नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे पर होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। बस को वर्कशॉप लाकर टायर बदलने के लिए भेजा गया, लेकिन टायर उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे भी डिपो में खड़ा करना पड़ा।
ये बोले यात्री
मैं बड़ौत डिपो से दिल्ली आवागमन करता हूं। कुछ बसों को छोड़ दें तो अधिकतर में पुराने और घिसे टायर दिखाई देते हैं। लंबे रूट पर चलने वाली बसों में टायरों की स्थिति ठीक रखना जरूरी है ताकि बसों में सफर सुरक्षित हो सके।
-अजय कुमार, यात्री
बस स्टैंड पर खड़ी और रूट पर चल रही कई बसों में पुराने टायर साफ दिखाई देते हैं। विभाग को खराब और घिसे टायरों को समय से बदलकर बसों को सड़क पर उतारना चाहिए ताकि सफर के दौरान यात्रियों के साथ कोई हादसा न हो।
-रविंद्र, यात्री
वर्जन
डिपो में टायरों की कमी चल रही है। टायरों को मंगवाने के लिए उच्च अधिकारियों को लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द टायर मिल जाएंगे। फिलहाल सभी रूटों पर बसों का संचालन सामान्य है।
-प्रमोद कुमार, बस संचालन प्रभारी, बड़ौत डिपो
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बड़ौत डिपो में 222 बसें बड़ौत-मुजफ्फरनगर, बड़ौत-दिल्ली, बड़ौत-शामली, बड़ौत-सहारनपुर, बड़ौत-बागपत, बड़ौत-मेरठ समेत अन्य लंबे रूटों पर संचालित हैं। इन बसों से रोजाना सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। टायरों की कमी के चलते अलवर, कानपुर और लखनऊ रूट पर बसों का संचालन बंद हो गया है। वहीं बड़ौत-मुजफ्फरनगर, बड़ौत-दिल्ली और बड़ौत-शामली रूट की करीब 40 बसें टायर बदलने के लिए डिपो में खड़ी हैं।
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एक लाख किलोमीटर बसें चलने पर बदलना होता है टायर
रोडवेज बस में एक लाख किलोमीटर चलने के बाद टायर बदलने की जरूरत होती है। डिपो में टायरों की कमी के कारण बसों को दो से ढाई लाख किलोमीटर तक चलाया जा रहा है। इस तरह दोगुने से अधिक दूरी तक टायरों को इस्तेमाल करने से हादसा हो सकता है।
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केस नंबर-एक
बस संख्या यूपी 78 जेटी 4328 कानपुर रूट पर संचालित है। चार दिन पहले कानपुर से बड़ौत आई। बस दिल्ली बस स्टैंड पर सवारियों को उतारकर डिपो जा रही थी। औद्योगिक पुलिस चौकी के पास अचानक बस का टायर फट गया। उस समय बस में कोई सवारी नहीं थी। इसके बाद बस को डिपो में खड़ा कर दिया गया, लेकिन अभी तक नया टायर नहीं लगाया गया।
केस नंबर-दो
बस संख्या यूपी 78 जेडएन 2885 लखनऊ रूट पर चलती है। कई दिन पहले लखनऊ के लिए डिपो से निकलते ही खराब टायर से अचानक हवा निकल गई। इससे बस का संतुलन बिगड़ गया। बस नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे पर होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। बस को वर्कशॉप लाकर टायर बदलने के लिए भेजा गया, लेकिन टायर उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे भी डिपो में खड़ा करना पड़ा।
ये बोले यात्री
मैं बड़ौत डिपो से दिल्ली आवागमन करता हूं। कुछ बसों को छोड़ दें तो अधिकतर में पुराने और घिसे टायर दिखाई देते हैं। लंबे रूट पर चलने वाली बसों में टायरों की स्थिति ठीक रखना जरूरी है ताकि बसों में सफर सुरक्षित हो सके।
-अजय कुमार, यात्री
बस स्टैंड पर खड़ी और रूट पर चल रही कई बसों में पुराने टायर साफ दिखाई देते हैं। विभाग को खराब और घिसे टायरों को समय से बदलकर बसों को सड़क पर उतारना चाहिए ताकि सफर के दौरान यात्रियों के साथ कोई हादसा न हो।
-रविंद्र, यात्री
वर्जन
डिपो में टायरों की कमी चल रही है। टायरों को मंगवाने के लिए उच्च अधिकारियों को लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द टायर मिल जाएंगे। फिलहाल सभी रूटों पर बसों का संचालन सामान्य है।
-प्रमोद कुमार, बस संचालन प्रभारी, बड़ौत डिपो