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फिल्म निर्माता दो भाइयों समेत सात को आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो, बागपत
Updated Wed, 07 Sep 2016 01:02 AM IST
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बुढ़पुर ट्रिपल मर्डर में कोर्ट से सजा सुनाए जाने के दौरान सुरक्षा बल।
- फोटो : अमर उजाला
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बागपत के बूढ़पुर गांव में चुनावी रंजिश के चलते 21 साल पहले खूनी संघर्ष में गर्भवती महिला समेत तीन लोगों की हत्या के केस में दोषी फिल्म निर्माता दो चचेरे भाइयों समेत सात लोगों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें मुजफ्फरनगर की तितावी चीनी मिल के केन मैनेजर भी शामिल हैं। केस के आरोपी रिटायर डिप्टी एसपी सुक्रम पाल की दिमागी हालत ठीक नहीं होने के कारण उनकी फाइल अलग चल रही है।
बूढ़पुर गांव में वर्ष 1995 में ग्राम प्रधान चुनाव के मतदान के दिन तीन लोगों की हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। एक सितंबर को सात आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ। मंगलवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय संख्या 1) डॉ. मनु कालिया ने की। एडीजीसी चश्मवीर सिंह और अधिवक्ता राम कुमार तोमर ने बताया गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी सुरेंद्र पाल, प्रवीण, बलराज, राजेश, राजवीर, संजीव और जगशोरण को कोर्ट ने दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और डेढ़-डेढ़ लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। यह धनराशि मृतकों के परिजनों को देने के आदेश दिए हैं। राशि नहीं देने पर दो साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सजा पाने वाले सुरेंद्र पाल सिंह और बलराज चचेरे भाई हैं। दोनों फिल्म निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा के सहायक निर्देशक रहे, यही नहीं सुरेंद्र पाल ने संजय दत्त की ईमानदार फिल्म का निर्माण भी किया था।
इन सात लोगों को हुई आजीवन कारावास
1. सुरेंद्र पाल पुत्र प्रताप सिंह : इन्होंने चौधरी इंटर प्राइजेज के बैनर तले ईमानदार फिल्म के निर्माता निर्देशक के रूप में भूमिका निभाई थी। इसके अलावा शराबी, लावारिस, नमक हलाल, हेराफेरी, जुल्मी, मुकद्दर का सिकंदर समेत कई फिल्मों में प्रकाश मेहरा के साथ सहायक निर्माता की भूमिका निभाई थी।
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2. बलराज पुत्र महेंद्र : मुंबई में फिल्म जादूगर, जिंदगी एक जुआं, मोहब्बत के दुश्मन, लक्ष्मण रेखा, जुल्मी में प्रकाश मेहरा के साथ सहायक डायरेक्टर की भूमिका निभाई। फिलहाल चौधरी इंटर प्राइजेज के बैनर तले वेस्ट यूपी के किसानों से जुड़ी फिल्म रणसिंघा का निर्माण कर रहे थे।
3. प्रवीण पुत्र रणवीर : मुजफ्फरनगर की तितावी शुगर मिल में चीफ केन मैनेजर के पद पर तैनात थे।
4. संजीव पुत्र हरवीर सिंह : शामली के कांधला के नेशनल इंटर कॉलेज में टीचर थे।
5. राजेश पुत्र भवर सिंह: बूढ़पुर गांव में खेती करते थे।
6. राजवीर पुत्र ब्रजपाल सिंह : बूढ़पुर में रहकर खेती करते थे।
7. जगशोरण पुत्र महक सिंह: मेरठ के ढढरा गांव में रहकर खेती करते थे।
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बूढ़पुर गांव में वर्ष 1995 में ग्राम प्रधान चुनाव के मतदान के दिन तीन लोगों की हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। एक सितंबर को सात आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ। मंगलवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय संख्या 1) डॉ. मनु कालिया ने की। एडीजीसी चश्मवीर सिंह और अधिवक्ता राम कुमार तोमर ने बताया गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी सुरेंद्र पाल, प्रवीण, बलराज, राजेश, राजवीर, संजीव और जगशोरण को कोर्ट ने दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और डेढ़-डेढ़ लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। यह धनराशि मृतकों के परिजनों को देने के आदेश दिए हैं। राशि नहीं देने पर दो साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सजा पाने वाले सुरेंद्र पाल सिंह और बलराज चचेरे भाई हैं। दोनों फिल्म निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा के सहायक निर्देशक रहे, यही नहीं सुरेंद्र पाल ने संजय दत्त की ईमानदार फिल्म का निर्माण भी किया था।
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इन सात लोगों को हुई आजीवन कारावास
1. सुरेंद्र पाल पुत्र प्रताप सिंह : इन्होंने चौधरी इंटर प्राइजेज के बैनर तले ईमानदार फिल्म के निर्माता निर्देशक के रूप में भूमिका निभाई थी। इसके अलावा शराबी, लावारिस, नमक हलाल, हेराफेरी, जुल्मी, मुकद्दर का सिकंदर समेत कई फिल्मों में प्रकाश मेहरा के साथ सहायक निर्माता की भूमिका निभाई थी।
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2. बलराज पुत्र महेंद्र : मुंबई में फिल्म जादूगर, जिंदगी एक जुआं, मोहब्बत के दुश्मन, लक्ष्मण रेखा, जुल्मी में प्रकाश मेहरा के साथ सहायक डायरेक्टर की भूमिका निभाई। फिलहाल चौधरी इंटर प्राइजेज के बैनर तले वेस्ट यूपी के किसानों से जुड़ी फिल्म रणसिंघा का निर्माण कर रहे थे।
3. प्रवीण पुत्र रणवीर : मुजफ्फरनगर की तितावी शुगर मिल में चीफ केन मैनेजर के पद पर तैनात थे।
4. संजीव पुत्र हरवीर सिंह : शामली के कांधला के नेशनल इंटर कॉलेज में टीचर थे।
5. राजेश पुत्र भवर सिंह: बूढ़पुर गांव में खेती करते थे।
6. राजवीर पुत्र ब्रजपाल सिंह : बूढ़पुर में रहकर खेती करते थे।
7. जगशोरण पुत्र महक सिंह: मेरठ के ढढरा गांव में रहकर खेती करते थे।