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बसपा ने सीटें गवाईं, रालोद ने वजूद 

Sat, 11 Mar 2017 11:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Sat, 11 Mar 2017 11:21 PM IST
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BSP sittings, RLD emerges
- फोटो : demo pic
बागपत। विधानसभा चुनाव के नतीजे सबके सामने हैं। बसपा ने बड़ौत और बागपत सीट गवां दी, जबकि रालोद अपना वजूद बचाने में नाकाम रहा। सपा के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। दलित-मुस्लिम समीकरण भी परवान नहीं चढ़ सका। लोकसभा चुनाव की हार के बाद वापसी की तैयारी में जुटे रालोद को इस बार भी जोर का झटका लगा है। 
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वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बड़ौत से बसपा के लोकेश दीक्षित और बागपत से हेमलता चौधरी ने जीत दर्ज की थी। इस बार बसपा यह दोनों सीटें हार गई। बसपा प्रत्याशी लोकेश दीक्षित को सिर्फ 22,071 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर खिसक गए। इस बार दलित-मुस्लिम समीकरण फेल हो गया, जबकि ब्राह्मण वोट भी यहां अधिकतर भाजपा के खाते में चले गए। सपा प्रत्याशी शोकेंद्र तोमर को 28,376 वोट मिले, इससे जाहिर है कि उनके हिस्से में मुस्लिम मत अन्य प्रत्याशियों के सापेक्ष अधिक आए। यहां रालोद के परंपरागत जाट मतों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की तरफ गया। रालोद को अन्य बिरादरियों के वोट कम संख्या में मिले, जिस कारण यहां भाजपा की बड़ी जीत हो गई। 
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छपरौली में रालोद की जीत सिर्फ 3,842 मतों से हुई और यहां भी भाजपा को बड़ी संख्या में वोट मिले। इससे जाहिर है कि जाट मतों का ध्रुवीकरण हुआ है। बसपा का प्रदर्शन यहां बेहद निराशाजनक रहा। पिछले तीन चुनावों से बसपा दूसरे स्थान पर रही थी और वोट प्रतिशत बढ़ा था, लेकिन इस बार यहां बसपा चौथे स्थान पर चली गई। मुस्लिमों ने यहां भी साइकिल की सवारी की। सपा के उम्मीदवार मनोज चौधरी ने पिछले चुनाव में लगभग 14 हजार वोट हासिल किए थे, लेकिन इस बार वह 3,9841 वोट हासिल करने में कामयाब रहे। इससे जाहिर है कि मुस्लिम मतों के अलावा जाट मत भी उनके हिस्से में आए, जिसके कारण रालोद और भाजपा के बीच जीत-हार का अंतर कम रहा।
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बागपत सीट पिछले चुनाव में बसपा की हेमलता चौधरी ने जीती थी। इस बार यहां बसपा से चुनाव लड़े पूर्व मंत्री नवाब कोकब हमीद के लड़के अहमद हमीद। बसपा ने सीट गंवा दी। पिछले चुनाव में नवाब कोकब हमीद रालोद से इसी सीट पर चुनाव हार गए थे। बागपत सीट पर ध्रुवीकरण का चुनाव हुआ। सियासी पंडित नजदीकी जीत हार बता रहे थे, लेकिन योगेश धामा ने सबसे अधिक वोट हासिल कर समीकरण तोड़ दिए। छपरौली में रालोद की जीत जरूर हुई, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के सापेक्ष उनका वोट प्रतिशत कम हुआ। रालोद वजूद बचाने में नाकामयाब साबित हुआ, जबकि अपनी दोनों सीटें ही नहीं बचा सकी।


साइकिल चली जरूर, रफ्तार नहीं पकड़ी
साल 2012 के चुनाव के सापेक्ष अगर देखें तो इस बार सपा की साइकिल चल निकली, लेकिन जीत की रफ्तार नहीं पकड़ सकी। बड़ौत सीट पर पिछले चुनाव में अजय कुमार को सिर्फ 15212 वोट मिले थे, जबकि इस बार शोकेंद्र पहलवान को 28376 वोट मिले। पिछले चुनाव में छपरौली सीट पर मनोज चौधरी ने 14,103 वोट हासिल किए थे। हालांकि इस बार 39,841 वोट मिले। पिछले चुनाव में बागपत सीट पर सपा को 40 हजार से अधिक वोट मिले थे, लेकिन इस बार यह सीट कांग्रेस के हिस्से में आई।
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