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प्रत्यंचा चढ़ाते ही खंडित हुआ धनुष, सीता स्वयंवर में होती है पुष्पो की वर्षा

Sat, 09 Oct 2021 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 09 Oct 2021 12:00 AM IST
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broken bow
बागपत में रामलीला देखते लोग - फोटो : BAGHPAT
बागपत। रघुवर रामलीला समिति ठाकुरद्वारा मंदिर की ओर से चल रही रामलीला में सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। रावण व बाणासुर का संवाद सुन लोग आश्चर्यचकित हो गए। रावण व बाणासुर के अभिनय की प्रस्तुति आशु शर्मा व मोंटी चौहान ने दी। सीता स्वयंवर में देश-विदेश के आए राजा और राजकुमार धनुष की प्रत्यंचा नहीं चढ़ा पाए तो जनक चिंतित हो जाते हैं।
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सीता स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर लक्ष्मण को पृथ्वी का भार संभालने के लिए कहते हैं। वह धनुष का विखंडन कर देते हैं। धनुष टूटने से क्रोधित भगवान परशुराम जनक नगरी को हिला देते हैं। वह पूछते हैं कि यह पाप किसने किया है। श्रीराम परशुराम के आगे नतमस्तक होकर क्षमा याचना करते हैं। वहीं, लक्ष्मण परशुराम पर क्रोधित हो जाते हैं। कलाकारों ने लक्ष्मण-परशुराम के संवाद की प्रभावशाली प्रस्तुित दी। सीता माता के श्रीराम के गले में जयमाला डालते ही आतिशबाजी और फूलों की वर्षा की जाती है। यहां कमेटी के अध्यक्ष संजय रोहिल्ला, मोंटी चौहान, सुजीत लखेरा, नरेश गुप्ता, अमित अग्रवाल, कमल वशिष्ठ, सुमित अरोरा, महेश शर्मा, नंदलाल डोगरा, बॉबी चौहान आदि मौजूद रहे।
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पिता के वचनों को पूरा करने के लिए वन गए श्रीराम
अमीनगर सराय। नगर के शिव मंदिर प्रांगण में चल रही रामलीला में शुक्रवार को माता सीता का विवाह और दशरथ-कैकेयी संवाद का मंचन किया गया। सीताजी का कन्यादान ब्रजमोहन मित्तल, हिमांशु मित्तल ने किया। इसके उपरांत दशरथ कैकेयी संवाद और पिता की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम के वनवास जाने के प्रसंग का मंचन किया गया।
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राजा दशरथ सभा बुलाकर भगवान श्रीराम का राजतिलक के लिए सुझाव लेते हैं। अयोध्यावासी श्रीराम के राजतिलक पर सहमति जताते हैं। सभा की सहमति पर राजा दशरथ भगवान श्रीराम के राजतिलक की मुनादी कराते हैं। मंथरा दासी कैकेयी के महल में पहुचंती है और उन्हें सारा वृतांत सुनाती है। मंथरा रानी से अपने दो वरदान में भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए अयोध्या का राज्य मांगने के लिए कहती है। राजा दशरथ कैकेयी के वचनों को सुनकर अचेत हो जाते हैं। भगवान श्रीराम कैकेयी और कौशल्या माता से आज्ञा लेकर लक्ष्मण और सीता के साथ वनगमन को प्रस्थान करते हैं। यहां अनिल गुप्ता, यज्ञदत्त शर्मा, नवीन गुप्ता, मनोज शर्मा उर्फ पिंटू, हरिशंकर प्रजापति, जयपाल प्रजापति, मुकेश शर्मा, सुमित प्रजापति, आदेश मिश्रा रहे।

कैकेयी ने राजा दशरथ से मांगे वरदान
चांदीनगर। रटौल के शिव मंदिर में चल रही रामलीला में शुक्रवार को श्रीराम के राजतिलक की घोषणा व केकैयी के कोपभवन में जाने की लीला का मंचन किया गया। राजा दशरथ, महर्षि वशिष्ठ से विमर्श के उपरांत श्रीराम का राजतिलक करने की घोषणा करते हैं। श्रीराम के राजतिलक की सूचना पाकर मंथरा चिंतित हो जाती है। भरत के राजतिलक के लिए कुटिल चाल चलती है। मंथरा कैकेयी को राजा दशरथ, श्रीराम और कौशल्या के खिलाफ भड़काती है। मंथरा कहती है कि श्रीराम के राजा बनने पर भरत राम के दास बन जाएंगे। मंथरा उससे कोप भवन में जाने और दशरथ के दिए दो वरदानों को मांगती है। रामलीला में देवेंद्र अरोरा, पंडित कुश प्रसाद शास्त्री, संजय अरोरा, मानसिंह, बंटी गुप्ता, अंकुर, लीलू, महेंद्र शर्मा, पम्मी कश्यप, राजूपाल मौजूद रहे।
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