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‘टोपी फेंक और चिलम तोड़ देते थे अंग्रेज’

Mon, 15 Aug 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Mon, 15 Aug 2016 01:15 AM IST
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British tyranny
सरजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचार आज भी लोग नहीं भूले। बिजरौल गांव के सरजीत सिंह की  उम्र 91 साल हैं। वह कहते ह तब वह युवा थे। बचपन से ही अंग्रेज देखे और उनके अत्याचार सहे।
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तब सामाजिक एकता थी। लोग मिल जुल कर रहते थे। अंग्रेज भारतीयों  की खादी टोपी सिरों से उतारकर फेंक देते थे। समाज में अगर कहीं हुक्का पीते लोग दिख जाए तो चिलम ही तोड़ देते थे।
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बिजरौल निवासी सरजीत सिंह ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संस्मरण साझा किए। वह बताते हैं कि परिवार के बुजुर्ग बच्चों को अंग्रेजों के सामने आने से रोकने की कोशिश करते थे। अंग्रेज बच्चों पर भी अत्याचार करते थे। वह देश की मजबूत सामाजिक व्यवस्था से दुखी थी।
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लोगों की एकता को वह कभी नहीं तोड़ पाए। देशवासियों ने अत्याचार सहे, लेकिन इसके बावजूद सब एक रहे। अंग्रेज लोगों को एक जगह देखते ही खीझ जाते थे। खादी की टोपी से वह बेहद चिढ़ते थे।

अंग्रेज खेतों में काम करने वाले किसानों की खादी की टोपी भी सिर से उतार देते थे। वह कहते थे, इस टोपी को मत लगाओ। इसी तरह वह हुक्के पर बैठे लोगों को भी इधर-उधर भगा देते थे। 


अंग्रेज तब भारतीयों की एकता से डरते थे, लेकिन कुछ चीजें ऐसी थी, जिनका बुजुर्ग लोहा मानते थे। तब अगर अपराध हो जाए तो अंग्रेज पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर मामले की सही पड़ताल करती थी, लेकिन अब देखने में आ रहा है  ऐसा नहीं होता। वर्तमान में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। 
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