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संयमरूपी नोका में बैठकर ही भवसागर पार होगा
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बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व माघ माह के उपलक्ष्य में चल रहे ग्यारह दिवसीय दशलक्षण पर्व के छठे सोपान शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म की पूजा-अर्चना कर भगवान चंद्रप्रभु को दस श्रीफ़ल समर्पित किए।
पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि वासनाओं में कैद मानव, पिंजरे में बंद पक्षी से भी बदतर होता है। कैद पक्षी तो मुक्त होने के लिए छटपटा रहा है, परंतु मानव वासनाओं में विषय भोगों में भी लिप्त है और छूटने का प्रयास नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि संयम रूपी नौका में सवार होकर ही मनुष्य संसार रूपी भवसागर को पार कर सकता है। इंद्रियां निगृह करना ही संयम है और स्वयं ही मुक्ति सोपान है। संयम के अभाव में इंद्रियां विद्रोह करती हैं। पेट को भोजन चाहिए तो रचना को स्वाद, नासिका को सुगंध, शरीर को आकर्षक वस्त्र और मानव भी इन सभी की पूर्ति में लिप्त रहता है। पंचेन्द्रिय विषयों का त्याग ही संयम है। संयम का अर्थ है जागरूक रहना काम, क्रोध, माया लोभ रूपी कुकर्मों से आत्मा को बचाना। उन्होंने कहा कि आपका शरीर वाहन है ओर मन उसका सारथी व आत्मा मालिक है। मालिक के संकेत पर ही वाहन को सारथी गंतव्य स्थान तक पहुंचाता है। संयम की टिकट लेकर आप शिवधाम जा सकते हैं। पूजा-अर्चना में लोकेश जैन, सरिता जैन, राजेन्द्र जैन, सीता जैन, राकेश जैन, विशांत जैन आदि उपस्थित रहे।
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पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि वासनाओं में कैद मानव, पिंजरे में बंद पक्षी से भी बदतर होता है। कैद पक्षी तो मुक्त होने के लिए छटपटा रहा है, परंतु मानव वासनाओं में विषय भोगों में भी लिप्त है और छूटने का प्रयास नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि संयम रूपी नौका में सवार होकर ही मनुष्य संसार रूपी भवसागर को पार कर सकता है। इंद्रियां निगृह करना ही संयम है और स्वयं ही मुक्ति सोपान है। संयम के अभाव में इंद्रियां विद्रोह करती हैं। पेट को भोजन चाहिए तो रचना को स्वाद, नासिका को सुगंध, शरीर को आकर्षक वस्त्र और मानव भी इन सभी की पूर्ति में लिप्त रहता है। पंचेन्द्रिय विषयों का त्याग ही संयम है। संयम का अर्थ है जागरूक रहना काम, क्रोध, माया लोभ रूपी कुकर्मों से आत्मा को बचाना। उन्होंने कहा कि आपका शरीर वाहन है ओर मन उसका सारथी व आत्मा मालिक है। मालिक के संकेत पर ही वाहन को सारथी गंतव्य स्थान तक पहुंचाता है। संयम की टिकट लेकर आप शिवधाम जा सकते हैं। पूजा-अर्चना में लोकेश जैन, सरिता जैन, राजेन्द्र जैन, सीता जैन, राकेश जैन, विशांत जैन आदि उपस्थित रहे।
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