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Baghpat News: मनरेगा में घोटाले के लिए 500-1000 रुपये में बिके बैंक खाते
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एक्सक्लूसिव
- मनरेगा के तहत वर्ष 2019-23 तक किए गए भुगतान का सोशल ऑडिट कराने पर हुआ खुलासा
- जिनके खाते में बिना कार्य कराए रुपये भेजे गए, उन्होंने कहा कि खाते में लेनदेन पर दिए जाते थे 500 से 1000 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। मनरेगा में घोटाला करने के लिए बैंक खाते भी खरीदे जाते हैं और एक बार लेनदेन करने पर खाते की कीमत 500-1000 रुपये होती है। यहां गांवों में मनरेगा के तहत वर्ष 2019-23 तक किए गए भुगतान का सोशल ऑडिट कराया गया तो इसका खुलासा हुआ। जिन लोगों के जॉब कार्ड बनाकर खातों में रुपये भेजे गए गए, उन्होंने खुद यही बताया है।
मनरेगा के तहत वर्ष 2019-23 के बीच रजबहों की सफाई और पाैधरोपण समेत अन्य कार्य कराए गए। गांवों में यह कार्य कराने की बात कहते हुए भुगतान भी कर दिया गया। अब इन कार्यों का सोशल ऑडिट कराया गया तो जिन लोगों के खातों में भुगतान किया गया, उनकी बात सुनकर अधिकारी भी चौंक गए। पता चला कि किसी ने कार्य नहीं किया और उनके खातों में रुपये भेजकर निकलवा लिए गए। इसके लिए किसी को 500 तो किसी को एक हजार रुपये दिए गए। इस रिपोर्ट के आधार पर सचिव से लेकर अन्य को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है।
- पौधरोपण के नाम पर महिलाओं के खाते में रुपये भेजकर निकलवाए
बरनावा गांव में वर्ष 2022-23 में मनरेगा के तहत वन क्षेत्र में पौधरोपण कराना दिखाया गया। गांव की दुलारी को 42 दिन कार्य करना दिखाकर 8568 रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह ही कमलेश को 13 दिन कार्य करना दिखाकर 2652 रुपये का भुगतान किया गया। इनके खातों से वन विभाग के कर्मियों ने रुपये निकलवाए और इनको बदले में 500-500 रुपये थमा दिए।
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- लोगों के खाते में रुपये भेजे, एक हजार देकर बाकी वापस लिए
गुराना गांव में 2021-22 में मनरेगा के तहत रजबहे की सफाई कराना दिखाया गया। इसके लिए सुभाष व राजेंद्र से 24 दिन कार्य कराने की बात कहते हुए उनके खातों में 4824-4824 रुपये का भुगतान किया गया। सोशल ऑडिट में पता चला कि इन्होंने काम नहीं किया। इन्होंने बताया कि इनके खाते में रुपये आने पर सिंचाई विभाग वाले निकलवा लेते थे और उसके बदले में 500 से एक हजार रुपये दिए जाते थे।
- खातों में रुपये भेजकर निकलवाए, बदले में 500 रुपये थमाए
ग्वालीखेड़ा में वर्ष 2019-20 में क्यामपुर रजबहे की सफाई का कार्य कराना दिखाया गया है। इसके लिए चमेली से 24 दिन कार्य कराना दिखाकर 4800 रुपये का भुगतान किया गया तो कौशल गृहिणी को 12 दिन कार्य करना दिखाकर 2100 रुपये खाते में भेजे गए। इन्होंने बताया कि बिलौचपुरा का ठेकेदार उनके खातों को इस्तेमाल करता था। वह रुपये निकलवाकर ले जाता था और इसके बदले में 500 रुपये देता था।
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मनरेगा के तहत हुए कार्यों के सोशल ऑडिट में जितनी भी आपत्ति लगाई गईं हैं। उनको लेकर सभी से जवाब मांगा जा रहा है। वह फाइलों के साथ अपना जवाब देंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - राहुल वर्मा, परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास विभाग
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- मनरेगा के तहत वर्ष 2019-23 तक किए गए भुगतान का सोशल ऑडिट कराने पर हुआ खुलासा
- जिनके खाते में बिना कार्य कराए रुपये भेजे गए, उन्होंने कहा कि खाते में लेनदेन पर दिए जाते थे 500 से 1000 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। मनरेगा में घोटाला करने के लिए बैंक खाते भी खरीदे जाते हैं और एक बार लेनदेन करने पर खाते की कीमत 500-1000 रुपये होती है। यहां गांवों में मनरेगा के तहत वर्ष 2019-23 तक किए गए भुगतान का सोशल ऑडिट कराया गया तो इसका खुलासा हुआ। जिन लोगों के जॉब कार्ड बनाकर खातों में रुपये भेजे गए गए, उन्होंने खुद यही बताया है।
मनरेगा के तहत वर्ष 2019-23 के बीच रजबहों की सफाई और पाैधरोपण समेत अन्य कार्य कराए गए। गांवों में यह कार्य कराने की बात कहते हुए भुगतान भी कर दिया गया। अब इन कार्यों का सोशल ऑडिट कराया गया तो जिन लोगों के खातों में भुगतान किया गया, उनकी बात सुनकर अधिकारी भी चौंक गए। पता चला कि किसी ने कार्य नहीं किया और उनके खातों में रुपये भेजकर निकलवा लिए गए। इसके लिए किसी को 500 तो किसी को एक हजार रुपये दिए गए। इस रिपोर्ट के आधार पर सचिव से लेकर अन्य को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है।
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- पौधरोपण के नाम पर महिलाओं के खाते में रुपये भेजकर निकलवाए
बरनावा गांव में वर्ष 2022-23 में मनरेगा के तहत वन क्षेत्र में पौधरोपण कराना दिखाया गया। गांव की दुलारी को 42 दिन कार्य करना दिखाकर 8568 रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह ही कमलेश को 13 दिन कार्य करना दिखाकर 2652 रुपये का भुगतान किया गया। इनके खातों से वन विभाग के कर्मियों ने रुपये निकलवाए और इनको बदले में 500-500 रुपये थमा दिए।
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- लोगों के खाते में रुपये भेजे, एक हजार देकर बाकी वापस लिए
गुराना गांव में 2021-22 में मनरेगा के तहत रजबहे की सफाई कराना दिखाया गया। इसके लिए सुभाष व राजेंद्र से 24 दिन कार्य कराने की बात कहते हुए उनके खातों में 4824-4824 रुपये का भुगतान किया गया। सोशल ऑडिट में पता चला कि इन्होंने काम नहीं किया। इन्होंने बताया कि इनके खाते में रुपये आने पर सिंचाई विभाग वाले निकलवा लेते थे और उसके बदले में 500 से एक हजार रुपये दिए जाते थे।
- खातों में रुपये भेजकर निकलवाए, बदले में 500 रुपये थमाए
ग्वालीखेड़ा में वर्ष 2019-20 में क्यामपुर रजबहे की सफाई का कार्य कराना दिखाया गया है। इसके लिए चमेली से 24 दिन कार्य कराना दिखाकर 4800 रुपये का भुगतान किया गया तो कौशल गृहिणी को 12 दिन कार्य करना दिखाकर 2100 रुपये खाते में भेजे गए। इन्होंने बताया कि बिलौचपुरा का ठेकेदार उनके खातों को इस्तेमाल करता था। वह रुपये निकलवाकर ले जाता था और इसके बदले में 500 रुपये देता था।
मनरेगा के तहत हुए कार्यों के सोशल ऑडिट में जितनी भी आपत्ति लगाई गईं हैं। उनको लेकर सभी से जवाब मांगा जा रहा है। वह फाइलों के साथ अपना जवाब देंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - राहुल वर्मा, परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास विभाग