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Baghpat: तमंचा बनाने की फैक्टरी समेत पांच पकड़े, 38 तमंचे और एक पिस्टल बरामद, जानें कितने रुपये में बेचते थे
Fri, 25 Apr 2025 05:10 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Fri, 25 Apr 2025 05:10 PM IST
सार
चमरावल मार्ग पर इंद्रदेव इंस्टीट्यूट के पास अवैध तमंचा फैक्टरी पकड़ी गई। 38 में से आधे तमंचे अधबने हैं। पुलिस तमंचे खरीदने वालों को भी चिह्नित कर रही है।
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पकड़े गए तमंचा बनाने के आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पुलिस ने चमरावल मार्ग पर इंद्रदेव इंस्टीट्यूट के पास अवैध तमंचा बनाने की फैक्टरी पकड़ी। साथ ही पांच हथियार तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। एक पिस्टल, 19 तमंचे और 19 अधबने तमंचों के साथ कारतूस बरामद किए।
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बरामद तमंचे।
- फोटो : अमर उजाला
चमरावल मार्ग पर इंद्रदेव इंस्टीट्यूट के पास से पुलिस ने सोहेल निवासी पांची, सिद्धार्थ उर्फ वीशू निवासी राजपुर खामपुर, अंकुर निवासी हिलवाड़ी, अनुज निवासी बड़ौली और सुशील निवासी तितरौदा को गिरफ्तार किया। एसपी सूरज कुमार राय ने बताया कि पूछताछ में हथियार तस्करों ने कई अहम जानकारी दी हैं।
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पकड़े गए पांचो आरोपी मिलकर तमंचा फैक्टरी चला रहे थे और आसपास के गांवों के अलावा दूसरे जिले के लोगों से संपर्क कर तमंचे बेचते थे। तमंचे सप्लाई करने वाले और खरीदने वालों के नाम प्रकाश में आए हैं, उनका सत्यापन कर विवेचना में आरोपी बनाया जाएगा।
आरोपियों के पास से तमंचे, अधबने तमंचों के अलावा एक पिस्टल, चार कारतूस और शस्त्र बनाने में प्रयुक्त उपकरण, इमरजेंसी लाइट, दो गैस सिलिंडर बरामद किए गए। आरोपी अंकुर के खिलाफ चार और अनुज के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हैं। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। एसपी ने कोतवाली और स्वॉट टीम को दस हजार रुपये इनाम दिया।
3500 से सात हजार तक बिक रहे तमंचे
पुलिस ने बताया कि तमंचा तैयार करने के बाद 3500 रुपये में सप्लायरों को दिया जाता था। इसके बाद आसपास के जनपदों में संपर्क कर सप्लायर सात हजार रुपये में एक तमंचा बेच देता था। पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि मुनाफे को आपस में बराबर बांट लेते थे।
पुलिस ने बताया कि तमंचा तैयार करने के बाद 3500 रुपये में सप्लायरों को दिया जाता था। इसके बाद आसपास के जनपदों में संपर्क कर सप्लायर सात हजार रुपये में एक तमंचा बेच देता था। पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि मुनाफे को आपस में बराबर बांट लेते थे।