Baghpat: पांच हजार महिलाओं में खून की कमी, गर्भस्थ शिशु को जान का खतरा
गर्भावस्था में लापरवाही गर्भ में पल रहे शिशु पर भारी पड़ रही है। लापरवाही से शिशुओं का हृदय कमजोर हो रहा है। ये ही नहीं इसका असर शिशु के विकसित होते अंग पर भी हो रहा है। इसकी वजह बच्चों की मां ही बन रही हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस समय जनपद में 5000 से अधिक महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। वजह केवल खराब खानपान है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चों को भी जान का खतरा बना हुआ है। चिकित्सकों ने गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था में सर्तकता बरतने की अपील की है।
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती बिना डॉक्टर की राय के दवाओं का सेवन कर लेती हैं। गर्भावस्था के दौरान ये दवाएं शिशु के दिल पर असर करती हैं। इसके अलावा गलत खानपान भी इसका कारण है। ये ही नहीं लापरवाही से शिशु के विकसित हो रहे अंगों पर भी असर पड़ रहा है। इस वजह से शिशु के पैर टेड़-मेढ़े होते हैं और कई अन्य जन्मजात रोग हो जाते हैं।
10 हजार बच्चों की हुई स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले साल से अब तक 10 हजार से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जांच के दौरान 25 बच्चे ऐसे मिले, जिनके पैर टेढ़े-मेढ़ थे। इसके अलावा 30 बच्चों को होंठ कटे-फटे, 40 बच्चों के दिल में छेद और 250 बच्चों में जन्मजात रोग मिला।
बीमारी से ग्रस्त बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल में किया जाता है रेफर
सीएचसी अधीक्षक बड़ौत डॉ. विजय कुमार ने बताया कि खराब खानपान की वजह से इस समय जनपद में 30 फीसदी यानी 5000 से अधिक महिलाओं में खून की कमी है। गर्भवती महिला को ध्यान रखना चाहिए कि उसके गर्भ में पल रहा बच्चा घूम रहा है या नहीं। अगर बच्चा गर्भ में घूमना बंद कर दे तो तत्काल डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
खराब खानपान से शरीर में होती है खून की कमी
सीएचसी पर तैनात महिला चिकित्सक डॉ. मनोकामना दुबे ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को खानपान का पूरा ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पौष्टिक आहार लेना चाहिए। बाहरी चीजों से परहेज करना चाहिए। इस दौरान अगर बुखार आए तो बिना डाॅक्टर की सलाह के दवा न लें।
बुखार में गर्भवती महिला अगर बिना जांच के दवा लेती है तो यह गर्भवती और बच्चे दोनों को ही खतरा हो सकता है। इसके अलावा बच्चे की धड़कन चेक करानी चाहिए। इससे यह साफ होता है कि बच्चे को किसी प्रकार की कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है।
पांच और छह माह के अंदर होती है गर्भवती महिलाओं की जांच
पूर्व सीएचसी अधीक्षक एवं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजेन्द्र मलिक ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत माह में चार बार शिविर लगाकर गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। जब गर्भवती महिला पांच और छह माह में होती है तो लेवल-2 अल्ट्रासाउण्ट से गर्भ में पल रहे बच्चे के विकसित होने की स्थिति की पूरी जानकारी आसानी से मिल जाती है।
गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान सावधानियां बरतनी चाहिएं। किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर से परामर्श लिए बिना न लें। इसके अलावा खानपान का भी ध्यान रखें। गर्भावस्था में लापरवाही के कारण ही शिशुओं का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है। -डॉ. अजेन्द्र मलिक नगर स्वास्थ्य अधिकारी एवं उप मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी बागपत
गर्भावस्था में इन बातों का रखें ध्यान
- अधिक मात्रा में पानी पीएं, ज्यादा फाइबर वाली चीजों का सेवन करें।
- हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। फल और उनके रस का सेवन करें।
- ड्राईफ्रूट्स और अंडे खाएं। साबुत अनाज का सेवन करें। अपनी मर्जी से कोई दवा न लें।
- कैफीन से दूर रहें। कच्चा पपीता, मछली और अंकुरित अनाज न खाएं।
- हल्की फुल्की स्ट्रेचिंग करें। रोज टहलें, व्यायाम करें।
- थायराइड और प्रेगनेंसी की जांच करवाती रहें।