अमर उजाला एक्सक्लूसिव : इकोनॉमिक कॉरिडोर का काम अटका, टेंडर होगा रद्द, सामने आई ये बड़ी वजह
मोदी सरकार की बड़ी परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का निर्माण ही अटक गया है। बताया गया कि रोड बनाने वाली कंपनी का टेंडर रद्द हो जाएगा। जानिए टेंडर रद्द होने के पीछे क्या बड़ी वजह सामने आई है।
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भारत माला परियोजना के तहत बनने वाले दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का निर्माण ही अटक गया है। पहले चरण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से दिल्ली बॉर्डर तक एलिवेटेड रोड बनाने वाली कंपनी का 1326 करोड़ का टेंडर रद्द होगा। निर्माण कार्य धीमा होने और नेशनल हाईवे की हालत ठीक नहीं करने सहित अन्य मामलों में देरी करने को इसका कारण बताया गया है। इसके लिए एनएचएआई ने कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है। नई कंपनी को टेंडर जारी होने तक निर्माण नहीं होगा।
केंद्र सरकार की बड़ी परियोजनाओं में शामिल भारतमाला परियोजना के तहत दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण किया जाना है। इसके लिए पहले चरण की शुरुआत मार्च 2021 में हुई थी। पहले चरण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से दिल्ली-यूपी बॉर्डर तक करीब 17 किलोमीटर लंबी छह लेन की एलिवेटेड रोड का निर्माण होना था। इसमें 1326 करोड़ रुपये की लागत आनी थी और इसका टेंडर हैदराबाद की कंपनी गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड को दिया गया था। कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू जरूर किया, लेकिन वह दिसंबर 21 तक दस प्रतिशत काम भी नहीं कर सकी। इसीलिए एनएचएआई ने कंपनी का टेंडर रद्द करने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। इससे इकोनॉमिक कॉरिडोर का पहला ही चरण खटाई में पड़ गया है।
निर्माण की गति धीमी रही तो हाईवे की हालत ठीक नहीं कर सके
एनएचएआई ने कंपनी को टेंडर रद्द करने के लिए भेजे नोटिस में लिखा है कि अभी तक पूरे कार्य का दस प्रतिशत करना था, लेकिन वह केवल एक प्रतिशत ही कर सके। इस तरह निर्माण काफी धीमी गति से किया गया। इसका निर्माण होने तक नेशनल हाईवे को पूरी तरह गड्ढामुक्त करना भी कंपनी की जिम्मेदारी थी, जिससे वाहन चालकों को परेशानी न हो। जब से निर्माण शुरू हुआ था, तभी से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई थी। क्योंकि नेशनल हाईवे गड्ढामुक्त नहीं हुआ और निर्माण कार्य व्यवस्थित नहीं होने से जाम लगता है। इसकी शिकायत भी सुभानपुर के संजय त्यागी ने एनएचएआई व केंद्रीय मंत्रालय में कराई थी। इसके अलावा कॉरिडोर के निर्माण के लिए जितने पेड़ काटने की अनुमति मिली, वह अभी तक नहीं कटवाए गए। विद्युत लाइन शिफ्ट करने का कार्य भी नहीं किया गया। इन सभी कारणों से टेंडर रद्द किया जा रहा है।
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इस तरह होना है पहले व दूसरे चरण में निर्माण
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण के पहले चरण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से दिल्ली-यूपी बॉर्डर तक एलिवेटेड रोड बनना है। इसका 1326 करोड़ रुपये का बजट तैयार हुआ था। दूसरे चरण का शिलान्यास चार दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने देहरादून से किया था, जिस पर 8300 करोड़ रुपये खर्च होने है। इस पर हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली, यमुनानगर, बागपत, मेरठ व बड़ौत को जोड़ने के लिए सात जगह इंटरचेंज होंगे। इसके बनने पर दिल्ली से देहरादून छह घंटे की जगह केवल ढाई से तीन घंटे में पहुंच सकेंगे।
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इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण के लिए ईपीई से दिल्ली-यूपी बॉर्डर तक एलिवेटेड रोड का निर्माण करने वाली कंपनी का टेंडर रद्द करने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। वह कार्य को काफी धीमी गति से कर रही थी। नेशनल हाईवे का मरम्मत कार्य भी नहीं किया था। - अरविंद कुमार, परियोजना निदेशक एनएचएआई