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Baghpat: 15 साल के इकलौते बेटे ने फंदे पर लटकर जान दी, रोते हुए बोला पिता- 'पबजी' है मेरे लाल का हत्यारा
Thu, 08 Jan 2026 08:54 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Thu, 08 Jan 2026 08:54 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के दमोह जिले का परिवार बागपत के पाली गांव के पास भवन निर्माण में मजदूरी के काम में लगा है। 15 साल का किशोर दिनभर पबजी खेलता था। बृहस्पतिवार को उसका शव फंदे पर लटका मिला। परिजनों का रोकर बुरा हाल है।
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सांकेतिक तस्वीर।
विस्तार
मोबाइल में पबजी खेलते हुए 15 साल के किशोर ने पाली गांव के पास झुग्गी में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पिता ने पबजी गेम खेलने की वजह से बेटे के आत्महत्या करने की बात कही है। पुलिसकर्मियों ने शव को फंदे से नीचे उतारकर घटना की जांच की। परिवार वाले शव को लेकर मध्य प्रदेश चले गए।
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मध्य प्रदेश के दमोह जिले के महागवा कलां गांव निवासी मजदूर ने बताया कि दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर पाली गांव में रामा अस्पताल का निर्माण चल रहा है, जिसमें उसका परिवार मजदूरी करता है। वहां परिसर में झुग्गी बनाकर अपनी दो बेटी और बेटे के साथ रहता है। बृहस्पतिवार सुबह अपनी पत्नी के साथ मजदूरी पर चला गया और उसका 15 साल का बेटा झुग्गी में ही था।
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कुछ देर बाद वापस आकर देखा तो झुग्गी में लगे सरिए पर उसके बेटे का शव फंदे पर लटका हुआ मिला। पिता ने बताया कि उसका बेटा दिन में कई-कई घंटे मोबाइल में पबजी गेम खेलता रहता था। जांच अधिकारी ब्रजेश कुमार का कहना है कि प्रथम दृष्टया जांच में पबजी गेम खेलने की वजह से आत्महत्या करना सामने आया है।
मोबाइल में गेम खेलने वाले बच्चों पर अभिभावक रखें नजर
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अजय कुमार ने बताया कि मोबाइल में ऑनलाइन गेम खेलने वाले बच्चों पर अभिभावकों को नजर रखने की जरूरत है। वह मोबाइल में बच्चों को गेम खेलने से रोकें। बच्चों को ऑनलाइन गेम खेलने की जगह दूसरे फिजिकल खेल सिखाएं, जिससे बच्चे स्वस्थ रहेंगे। बच्चों के साथ अधिक समय व्यतीत करें, जिससे वे अपनी परेशानी साझा कर समस्या का समाधान करा सकते हैं।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अजय कुमार ने बताया कि मोबाइल में ऑनलाइन गेम खेलने वाले बच्चों पर अभिभावकों को नजर रखने की जरूरत है। वह मोबाइल में बच्चों को गेम खेलने से रोकें। बच्चों को ऑनलाइन गेम खेलने की जगह दूसरे फिजिकल खेल सिखाएं, जिससे बच्चे स्वस्थ रहेंगे। बच्चों के साथ अधिक समय व्यतीत करें, जिससे वे अपनी परेशानी साझा कर समस्या का समाधान करा सकते हैं।