फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Bag was empty, Despair with budget

झोली खाली, बजट से मिली मायूसी

Sat, 17 Feb 2018 12:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Sat, 17 Feb 2018 12:35 AM IST
विज्ञापन
Bag was empty, Despair with budget
मास्टर काॅलोनी में टीवी पर बजट की खबर देखतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
प्रदेश सरकार के बजट में जिले के विकास के लिए कोई घोषणा नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। सड़कों की स्थिति ठीक नहीं है। जिले के लिए सरकार को बजट में वरीयता देनी चाहिए था।
विज्ञापन


योगी सरकार ने बजट से किसानों और युवाओं को लुभाने की कोशिश की है। वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल की ओर से जारी किए गए बजट में जिले के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। उपशा को हैंडओवर किए जा चुके गढ़-सोनीपत मार्ग के लिए घोषणा की उम्मीद थी।
विज्ञापन


पुल निर्माण के लिए बजट में एक हजार आठ सौ 17 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, देखने वाली बात यह होगी कि जिले में भी इस रकम से किसी पुल का निर्माण होता है या नहीं। छपरौली पुल के मुद्दे पर जिले में कई साल से सियासत गरम है। लेकिन इसकी कोई घोषणा अभी सरकार की ओर से नहीं की गई है। विधानसभा चुनाव से पहले  हरियाणा के मुख्यमंत्री ने शिलान्यास तक कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या कहते हैं किसान
किसान मनोज कुमार का कहना है कि फसलों के बेहतर दाम दिए जाने का प्रावधान होना चाहिए। जब तक किसान को उसकी लागत के हिसाब से दाम तय नहीं किए जाएंगे आय दोगुनी कैसे हो जाएगी।

किसान अनिल कुमार का कहना है कि सरकार को उनके भुगतान की चिंता नहीं है। मलकपुर मिल से भुगतान दिलाया जाना चाहिए, ताकि सैंकड़ों परिवारों की समस्या का समाधान हो सके। बजट में जमीनी स्तर पर किसान के लाभ के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं दिखा।

किसान ब्रह्मजीत का कहना है कि बजट से निराशा ही हुई है। किसान के नाम पर कई वायदे किए गए हैं, लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि जो बजट जारी हुआ, उसमें धरातल पर एक आम किसान के हिस्से में क्या आता है।

हैंडलूम के दिन बदलने की उम्मीद
एक जिला एक उत्पाद योजना के लिए बजट में सरकार ने ढाई सौ करोड़ की व्यवस्था की है। इससे जिले के हैंडलूम उद्योग के दिन बहुरने की उम्मीद जग गई है। निरपुड़ा में कंबल बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर होता था, लेकिन घाटे का सौदा साबित होने पर अधिकतर घरों में हाथ से संचालित होने वाली इकाई यानी खड्डियां बंद हो गई। कंबल बनाने वाले लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा।

बागपत में निरपुड़ा, अमीनगर सराय, अग्रवाल मंडी टटीरी समेत अन्य क्षेत्रों में हैंडलूम इकाईयां हैं। लेकिन सबसे अधिक इकाई निरपुड़ा में है। अब इन इकाईयों पर पायदान, लोई और बाण बनाए जा रहे हैं।

हाथ के बने इन उत्पादों को हरियाणा के पानीपत में बेचा जाता है। इकाईयों से जुड़े यामीन अहमद, आरिफ, हनीफ, तहसीम, अनीस, शमशाद, तैमूर का कहना है कि बजट से उम्मीद जगी है, लेकिन धरातल पर कार्य होने से लाभ हो सकेगा।


जीएसटी लगने के बाद उनका यह धंधा भी चौपट हो गया है। पहले कंबल इकाई बंद हो गई और अब पायदान बनाने का काम भी बंद करना पड़ेगा, क्योंकि उनके द्वारा बनाए गए पायदान पानीपत की मंडी में ही बिकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed