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रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 से
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:32 AM IST
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बागपत के शौकत बाजार में राखी की खरीदारी करती बहनें।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रक्षाबंधन का पर्व 12 साल बाद चंद्रग्रहण के साये में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रक्षाबंधन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 बजे के बाद और दोपहर 01:52 बजे से पूर्व का है । भद्रा काल में पर्व ज्यादा कष्टकारी माना जाता है। चंद्रग्रहण का सूतक नौ घंटे पूर्व शुरू हो जाता है। इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं होते।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन का पर्व पर चंद्रग्रहण का साया रहेगा। यह संयोग बारह साल बाद आया है। भद्रा काल में रक्षाबंधन और होली का पर्व नहीं मनाना चाहिए। इस दिन होली के जलाने से नगर या गांव में पूरे वर्ष अग्नि का भय रहता है। विशेष क्षति पहुंचती है। शास्त्री ने बताया कि सूर्पनखा ने भद्रा काल में रावण को राखी बांधी थी, इस कारण उसका सर्वनाश हो गया।
रक्षाबंधन पर्व शुभ मुर्हुत में ही मनाया जाए। सूतक काल में भोजन, पानी किसी का सेवन नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्रहण का स्पर्श 10:40 मिनट, ग्रहण का मध्य 11:39, ग्रहण मोक्ष 12:35 तक होगा। कुल मिलाकर ग्रहण की अवधि एक घंटा 55 मिनट रहेगी।
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चंद्रग्रहण मकर राशि ओर श्रवण नक्षत्र के बीच होगा। इसका अलग-अलग राशि पर असर पड़ेगा। मेष, सिंह, कन्या, वृश्चिक, मीन इन पांच राशियों के लिए ग्रहण अत्यंत शुभ और लाभ प्रद रहेगा। वृष, कर्क, धनु राशि के लिए यह ग्रहण मिश्रित फल देगा, यानी थोड़ा लाभ और थोड़ी होनी हो सकती है। मकर, मिथुन, तुला और कुंभ राशि के लिए यह ग्रहण अशुभ कारक होगा।
शारीरिक, मानसिक, आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। शिव के मंत्र का जाप से अशुभ फल में कटौती हो सकती है। गेहूं, नमक, लाल-काला वस्त्र, मिष्ठान का दान करने से कुंडली में ग्रहण का दोष दूर हो जाता है।
बहनों को लुभा रहीं आकर्षक राखियां
बाजार में रक्षाबंधन की तैयारियां जोरों पर चल रही है। दुकानों पर सजी एक से बढ़कर एक राखी बहनों को भा रही है। बहनें भाइयों के लिए खरीदारी कर रही हैं। दुकानों पर सजी एक से बढ़कर आकर्षित राखियां खरीदने के लिए बहनें दुकानें पर पहुंच रही हैं। सोने और चांदी से बने डोरे और अन्य प्रकार की राखी की डिमांड बढ़ रही है। बाजारों में भीड़ उमड़ गई है। वहीं मिठाइयों की दुकानों पर भी लोग पहुंच रहे हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन का पर्व पर चंद्रग्रहण का साया रहेगा। यह संयोग बारह साल बाद आया है। भद्रा काल में रक्षाबंधन और होली का पर्व नहीं मनाना चाहिए। इस दिन होली के जलाने से नगर या गांव में पूरे वर्ष अग्नि का भय रहता है। विशेष क्षति पहुंचती है। शास्त्री ने बताया कि सूर्पनखा ने भद्रा काल में रावण को राखी बांधी थी, इस कारण उसका सर्वनाश हो गया।
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रक्षाबंधन पर्व शुभ मुर्हुत में ही मनाया जाए। सूतक काल में भोजन, पानी किसी का सेवन नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्रहण का स्पर्श 10:40 मिनट, ग्रहण का मध्य 11:39, ग्रहण मोक्ष 12:35 तक होगा। कुल मिलाकर ग्रहण की अवधि एक घंटा 55 मिनट रहेगी।
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चंद्रग्रहण मकर राशि ओर श्रवण नक्षत्र के बीच होगा। इसका अलग-अलग राशि पर असर पड़ेगा। मेष, सिंह, कन्या, वृश्चिक, मीन इन पांच राशियों के लिए ग्रहण अत्यंत शुभ और लाभ प्रद रहेगा। वृष, कर्क, धनु राशि के लिए यह ग्रहण मिश्रित फल देगा, यानी थोड़ा लाभ और थोड़ी होनी हो सकती है। मकर, मिथुन, तुला और कुंभ राशि के लिए यह ग्रहण अशुभ कारक होगा।
शारीरिक, मानसिक, आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। शिव के मंत्र का जाप से अशुभ फल में कटौती हो सकती है। गेहूं, नमक, लाल-काला वस्त्र, मिष्ठान का दान करने से कुंडली में ग्रहण का दोष दूर हो जाता है।
बहनों को लुभा रहीं आकर्षक राखियां
बाजार में रक्षाबंधन की तैयारियां जोरों पर चल रही है। दुकानों पर सजी एक से बढ़कर एक राखी बहनों को भा रही है। बहनें भाइयों के लिए खरीदारी कर रही हैं। दुकानों पर सजी एक से बढ़कर आकर्षित राखियां खरीदने के लिए बहनें दुकानें पर पहुंच रही हैं। सोने और चांदी से बने डोरे और अन्य प्रकार की राखी की डिमांड बढ़ रही है। बाजारों में भीड़ उमड़ गई है। वहीं मिठाइयों की दुकानों पर भी लोग पहुंच रहे हैं।