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रमजान मुबारक माह के दूसरे जुमे को अता की नमाज
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बागपत में दूसरे जुमे पर नमाज के बाद दुआं करते हुए
- फोटो : BAGHPAT
रोजा हर बालिग मर्द व औरत पर फर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/अग्रवाल मंडी टटीरी। रमजान मुबारक माह के दूसरे जुमे को काफी संख्या में मुस्लिमों ने जुमे व दो रकात नमाज अता की।
नमाज से पूर्व कस्बे की देशवाल पट्टी स्थित मस्जिद में मौलवी हाजी जहीर अहमद ने तकरीर करते हुए कहा कि रोजा हर बालिग मर्द व औरत पर फर्ज है। जो शख्स इस महीने में रोजा रखकर अपनी मगफिरत अल्लाह से नहीं करा सकता उसके लिए बर्बादी के सिवाय कुछ नहीं है। यह महीना निकल जाएगा न जाने फिर मिले या ना मिले। इसलिए बाकी रोजे उन लोगों को रखकर अल्लाह से गुनाहों की तौबा करें। रोजा बीमार व्यक्ति नहीं रख सकता है। बाकी सभी पर रोजा फर्ज है। कुछ लोग रोजे में खुलेआम बाजारों में खाते रहते हैं। इससे बचना चाहिए। रोजे की कद्र करनी चाहिए। माता-पिता की सेवाएं जन्नत हैं। तकरीर के बाद मौलवी ने कुतबा सुनाया फिर नमाज अता कराई। इसके बाद देश में अमन चैन, तरक्की व आपसी भाईचारा के लिए दुआ कराईं। कस्बे की बाजार वाली बड़ी मस्जिद में मौलाना मोहसिन ने जुमे की नमाज अता कराई। इसके अतिरिक्त बागपत की मस्जिदों में भी जुमे की नमाज अता कराई गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/अग्रवाल मंडी टटीरी। रमजान मुबारक माह के दूसरे जुमे को काफी संख्या में मुस्लिमों ने जुमे व दो रकात नमाज अता की।
नमाज से पूर्व कस्बे की देशवाल पट्टी स्थित मस्जिद में मौलवी हाजी जहीर अहमद ने तकरीर करते हुए कहा कि रोजा हर बालिग मर्द व औरत पर फर्ज है। जो शख्स इस महीने में रोजा रखकर अपनी मगफिरत अल्लाह से नहीं करा सकता उसके लिए बर्बादी के सिवाय कुछ नहीं है। यह महीना निकल जाएगा न जाने फिर मिले या ना मिले। इसलिए बाकी रोजे उन लोगों को रखकर अल्लाह से गुनाहों की तौबा करें। रोजा बीमार व्यक्ति नहीं रख सकता है। बाकी सभी पर रोजा फर्ज है। कुछ लोग रोजे में खुलेआम बाजारों में खाते रहते हैं। इससे बचना चाहिए। रोजे की कद्र करनी चाहिए। माता-पिता की सेवाएं जन्नत हैं। तकरीर के बाद मौलवी ने कुतबा सुनाया फिर नमाज अता कराई। इसके बाद देश में अमन चैन, तरक्की व आपसी भाईचारा के लिए दुआ कराईं। कस्बे की बाजार वाली बड़ी मस्जिद में मौलाना मोहसिन ने जुमे की नमाज अता कराई। इसके अतिरिक्त बागपत की मस्जिदों में भी जुमे की नमाज अता कराई गई।