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पंचतत्व में विलिन हुई आर्यिका प्रत्यक्षमति माता
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बड़ौत में प्रत्यक्षमति माता की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़
- फोटो : BARAUT
बड़ौत (बागपत)। आर्यिका प्रत्यक्षमति माता की अंतिम यात्रा में श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अंतिम यात्रा अतिथि भवन से चलकर बैंडबाजों के साथ विभिन्न मार्गों से होती हुई दिगंबर जैन इंटर कॉलेज पांडुकशिला मैैदान पहुंची, जहां विधिविधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
दिगंबर जैन अतिथि भवन में विराजमान आर्यिका प्रत्यक्ष मति माता का सोमवार की रात समाधि मरण हो गया था। प्रत्यक्षमति माता की मृत्यु महामहोत्सव यात्रा मंगलवार की सुबह अतिथि भवन से शुरू हुई। नेहरू मूर्ति, संजय मूर्ति, भगवान महावीर मार्ग से होती हुई पांडुक शिला मैदान पहुंची, जहां विधिविधान पूर्वक अंतिम संस्कार क्रिया संपन्न की गई। अग्नि संस्कार बाल ब्रह्मचारी पंडित सुनील शास्त्री और राजेश जैन ने किया। मीडिया प्रभारी आदिश जैन ने बताया कि माता का जन्म राजस्थान के टीकमगढ़ जिले के महरौनी गांव में हुआ था। पिता का नाम मोती लाल और माता का नाम सरलमती था। आर्यिका प्रत्यक्षमति माता का गृहस्थ जीवन का नाम गजरा देवी था। माता बचपन से ही पूजा पाठ और उपवास किया करतीं थी। राजस्थान के उदयपुर में अभिनंदन सागर महाराज से दीक्षा धारण कर माता ने अनेकों पुस्तकों का संग्रह किया और ग्रंथ लिखे। 11 साल से माता ने सल्लेखना व्रत धारण किया हुआ था।
अंतिम समय में रत्नत्रय आराधना करते हुए गुप्तिसगर मुनि, वीर सागर मुनि, धवल सागर मुनि, विशाल सागर एवं आर्यिका पुराणमति माता, दिव्यामति माता के निर्देशन में समता पूर्वक समाधि मरण किया। अंतिम यात्रा में श्रद्धालुओं सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान प्रवीण जैन, अतुल जैन, विधायक केपी मालिक, चेयरमैन अमित राणा, जिलाध्यक्ष सूरजपाल सिंह गुर्जर, डॉ आरके जैन, पंकज, अजय, संदीप, नरेंद्र, सोनू, विनोद, जनेश्वर, आदिश, अनिल, सुरेंद्र आदि सहित सकल समाज नगर की सभी संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा मेरठ, कांधला, बुढ़ाना, छपरौली, बागपत, टिकरी, शामली, बिनौली, खड़गपुर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
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दिगंबर जैन अतिथि भवन में विराजमान आर्यिका प्रत्यक्ष मति माता का सोमवार की रात समाधि मरण हो गया था। प्रत्यक्षमति माता की मृत्यु महामहोत्सव यात्रा मंगलवार की सुबह अतिथि भवन से शुरू हुई। नेहरू मूर्ति, संजय मूर्ति, भगवान महावीर मार्ग से होती हुई पांडुक शिला मैदान पहुंची, जहां विधिविधान पूर्वक अंतिम संस्कार क्रिया संपन्न की गई। अग्नि संस्कार बाल ब्रह्मचारी पंडित सुनील शास्त्री और राजेश जैन ने किया। मीडिया प्रभारी आदिश जैन ने बताया कि माता का जन्म राजस्थान के टीकमगढ़ जिले के महरौनी गांव में हुआ था। पिता का नाम मोती लाल और माता का नाम सरलमती था। आर्यिका प्रत्यक्षमति माता का गृहस्थ जीवन का नाम गजरा देवी था। माता बचपन से ही पूजा पाठ और उपवास किया करतीं थी। राजस्थान के उदयपुर में अभिनंदन सागर महाराज से दीक्षा धारण कर माता ने अनेकों पुस्तकों का संग्रह किया और ग्रंथ लिखे। 11 साल से माता ने सल्लेखना व्रत धारण किया हुआ था।
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अंतिम समय में रत्नत्रय आराधना करते हुए गुप्तिसगर मुनि, वीर सागर मुनि, धवल सागर मुनि, विशाल सागर एवं आर्यिका पुराणमति माता, दिव्यामति माता के निर्देशन में समता पूर्वक समाधि मरण किया। अंतिम यात्रा में श्रद्धालुओं सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान प्रवीण जैन, अतुल जैन, विधायक केपी मालिक, चेयरमैन अमित राणा, जिलाध्यक्ष सूरजपाल सिंह गुर्जर, डॉ आरके जैन, पंकज, अजय, संदीप, नरेंद्र, सोनू, विनोद, जनेश्वर, आदिश, अनिल, सुरेंद्र आदि सहित सकल समाज नगर की सभी संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा मेरठ, कांधला, बुढ़ाना, छपरौली, बागपत, टिकरी, शामली, बिनौली, खड़गपुर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
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