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महाभारत की धरती पर तैयार हो रहे भविष्य के धर्नुधर
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बागपत। देश में तीरंदाजी के प्रति युवाओं का आकर्षण बढ़ता जा रहा है। ऐसे में महाभारतकालीन नगरी व्याघ्रप्रस्थ (बागपत) के बच्चे भला कैसे दूर रह सकते हैं। संसाधनों की कमी आगे आई तो गौरीपुर गांव के मनोज चौहान आगे आए। वे बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर भविष्य के धनुर्धर तैयार कर रहे हैं। उनके विद्यार्थी राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई मेडल जीत चुके हैं।
सरकारी कैंप खत्म हो गया तो खुद लगे सिखाने
मनोज चौहान गौरीपुर में ज्ञानदीप जूनियर हाईस्कूल चलाते हैं। वर्ष 2015 में उन्हें कलक्ट्रेट में तीरंदाजी के प्रशिक्षण कैंप की सूचना मिली तो इसके प्रति आकर्षण के चलते वे भी पहुंच गए। गांव के कई बच्चे इस कैंप में जाते थे। यह एक माह का कैंप था। कोच विकास वेदवान से उन्होंने एक माह में ही तीरंदाजी की बारीकियां सीखीं। इसके बाद कैंप बंद हो गया। इससे बच्चे भी मायूस हुए। इसके बाद मनोज चौहान ने खुद बच्चों को प्रशिक्षण देने का मन बनाया। इसमें शुरूआत में कई मुश्किलें आड़े आईं परंतु मनोज चौहान ने हार नहीं मानी। आसपास के लोगों से सहयोग मांगा और किट खरीदकर ज्ञानदीप आर्चरी शुरू कर दी। कई अभिभावक अपनी बेटियों को प्रशिक्षण के लिए भेजने से हिचकते थे। स्थानीय गण्यमान्य व्यक्तियों के सहयोग से उन्होंने ऐसे अभिभावकों को मनाया।
खेत किराए पर लेकर दे रहे प्रशिक्षण
तीरंदाजी के प्रशिक्षण के लिए बड़ी जगह की आवश्यकता होती है। मनोज चौहान के पास ऐसी कोई जगह उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में उन्होंने बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए तीन बीघा का खेत किराये पर लिया है। इसी खेत पर करीब छह वर्ष से वे बच्चों को तीरंदाजी के गुर सिखा रहे हैं। प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए यदि बच्चों को धन की आवश्यकता पड़ती है तो वे उसमें भी मदद करते हैं।
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इन विद्यार्थियों ने जीते हैं मेडल
ज्ञानदीप आर्चरी की तीरंदाज तनु चौहान ने 2019 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण व कांस्य पदक जीता था। स्वाति मौर्या ने 2020 में देहरादून में हुई नेशनल ओपन चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीता। काजल, वंदना, नेहा ने 2019 में एसजीएफआई की रांची में हुई प्रतियोगिता में पदक जीते। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर पर भी उनकी शिष्या स्वाति, आकांक्षा चौहान व अंशु कई पदक जीत चुकी हैं।
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सरकारी कैंप खत्म हो गया तो खुद लगे सिखाने
मनोज चौहान गौरीपुर में ज्ञानदीप जूनियर हाईस्कूल चलाते हैं। वर्ष 2015 में उन्हें कलक्ट्रेट में तीरंदाजी के प्रशिक्षण कैंप की सूचना मिली तो इसके प्रति आकर्षण के चलते वे भी पहुंच गए। गांव के कई बच्चे इस कैंप में जाते थे। यह एक माह का कैंप था। कोच विकास वेदवान से उन्होंने एक माह में ही तीरंदाजी की बारीकियां सीखीं। इसके बाद कैंप बंद हो गया। इससे बच्चे भी मायूस हुए। इसके बाद मनोज चौहान ने खुद बच्चों को प्रशिक्षण देने का मन बनाया। इसमें शुरूआत में कई मुश्किलें आड़े आईं परंतु मनोज चौहान ने हार नहीं मानी। आसपास के लोगों से सहयोग मांगा और किट खरीदकर ज्ञानदीप आर्चरी शुरू कर दी। कई अभिभावक अपनी बेटियों को प्रशिक्षण के लिए भेजने से हिचकते थे। स्थानीय गण्यमान्य व्यक्तियों के सहयोग से उन्होंने ऐसे अभिभावकों को मनाया।
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खेत किराए पर लेकर दे रहे प्रशिक्षण
तीरंदाजी के प्रशिक्षण के लिए बड़ी जगह की आवश्यकता होती है। मनोज चौहान के पास ऐसी कोई जगह उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में उन्होंने बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए तीन बीघा का खेत किराये पर लिया है। इसी खेत पर करीब छह वर्ष से वे बच्चों को तीरंदाजी के गुर सिखा रहे हैं। प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए यदि बच्चों को धन की आवश्यकता पड़ती है तो वे उसमें भी मदद करते हैं।
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इन विद्यार्थियों ने जीते हैं मेडल
ज्ञानदीप आर्चरी की तीरंदाज तनु चौहान ने 2019 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण व कांस्य पदक जीता था। स्वाति मौर्या ने 2020 में देहरादून में हुई नेशनल ओपन चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीता। काजल, वंदना, नेहा ने 2019 में एसजीएफआई की रांची में हुई प्रतियोगिता में पदक जीते। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर पर भी उनकी शिष्या स्वाति, आकांक्षा चौहान व अंशु कई पदक जीत चुकी हैं।