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क्रोध मानवता का शत्रु तो प्रेम प्रभु भक्ति का प्रतीक : हर्ष सागर
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-कस्बे के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा का आयोजन
फोटो-एक
संवाद न्यूज एजेंसी
अमीनगर सराय। कस्बे के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को धर्मसभा का आयोजन किया गया। संत हर्ष सागर महाराज ने कहा कि अहंकार मानव का सबसे बड़ा शत्रु है। भगवान की वाणी सुनने से ही जीवन बदल जाएगा।
उन्होंने कहा कि माफ कर देना वीरो की शान होती है। भगवान की वाणी को आचरण में उतरना होगा, तभी मानव जीवन सार्थक होगा। उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वह अपने बच्चों को धार्मिक व नैतिक संस्कार अवश्य प्रदान करें। अगर समाज ने बच्चों को धार्मिक ज्ञान प्रदान नहीं कराया तो उनका भविष्य अंधकार में हो जाएगा। धर्म सें गिरा मनुष्य कभी भी समाज का हिस्सा नहीं हो सकता। दिनेश जैन ने मेरी भावना का पाठ किया और भजन प्रस्तुत किए गए। धर्मसभा में विनोद जैन प्रधान, सुधीर जैन, अरुण जैन, प्रवीण जैन, नीरज जैन, राकेश जैन, उषा जैन, अनीता जैन मौजूद रहे।
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फोटो-एक
संवाद न्यूज एजेंसी
अमीनगर सराय। कस्बे के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को धर्मसभा का आयोजन किया गया। संत हर्ष सागर महाराज ने कहा कि अहंकार मानव का सबसे बड़ा शत्रु है। भगवान की वाणी सुनने से ही जीवन बदल जाएगा।
उन्होंने कहा कि माफ कर देना वीरो की शान होती है। भगवान की वाणी को आचरण में उतरना होगा, तभी मानव जीवन सार्थक होगा। उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वह अपने बच्चों को धार्मिक व नैतिक संस्कार अवश्य प्रदान करें। अगर समाज ने बच्चों को धार्मिक ज्ञान प्रदान नहीं कराया तो उनका भविष्य अंधकार में हो जाएगा। धर्म सें गिरा मनुष्य कभी भी समाज का हिस्सा नहीं हो सकता। दिनेश जैन ने मेरी भावना का पाठ किया और भजन प्रस्तुत किए गए। धर्मसभा में विनोद जैन प्रधान, सुधीर जैन, अरुण जैन, प्रवीण जैन, नीरज जैन, राकेश जैन, उषा जैन, अनीता जैन मौजूद रहे।
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