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आंगनबाड़ी केंद्र बना दिया तबेला

Thu, 07 Oct 2021 11:31 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 11:31 PM IST
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Anganwadi center made tabela
बागपत के गौरीपुर ज्वाहरनगर गांव स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र पर बंधे पशु - फोटो : BAGHPAT
- निवाड़ा के आंगनबाड़ी केंद्र का अब भी ताला नहीं खुलता, परिसर में जम गई घास
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- गौरीपुर के केंद्र में बांधे जाते है पशु, कार्यकर्ता को अपने घर चलाना पड़ रहा केंद्र
- किसी जगह केवल पोषाहार देकर घंटों पहले घर भेज दिए जाते है बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बच्चों के स्कूल में कदम रखने से पहले प्री-प्राइमरी शिक्षा देने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्रों की होती है। मगर, यहां आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बदहाल है और सबकुछ अव्यवस्थित है। किसी जगह आंगनबाड़ी केंद्र तबेला बना हुआ है और उसमें पशुओं को बांधा जाता है तो किसी जगह ताले लटके रहते है। कार्यकर्ताओं को मजबूरी में अपने घरों में एक कमरे में केंद्र चलाना पड़ रहा है। किसी जगह पर पोषाहार देकर घंटों पहले ही बच्चों को घर भेज दिया जाता है। इन हालात में आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों को शिक्षित करने की उम्मीद कर सकते है।
गौरीपुर का आंगनबाड़ी केंद्र बना तबेला, पशु बांधे जा रहे
गौरीपुर में तीन आंगनबाड़ी केंद्र है, जिनमें एक को यमुना के किनारे श्मशान घाट के पास बनाया गया है। उस आंगनबाड़ी केंद्र का ताला ही नहीं खुलता है। केंद्र के अंदर पशुओं को बांधा जाता है। अन्य दो केंद्रों के लिए भवन नहीं होने के कारण एक कार्यकर्ता अपने घर के एक कमरे में केंद्र चलाती है। उसमें ही दोनों केंद्रों के बच्चे बुलाए जाते है और कोई सुविधा नहीं होने के कारण बच्चे नीचे बैठाए जाते है।
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निवाड़ा के आंगनबाड़ी केंद्र पर लटका ताला, घास भी उग गई
निवाड़ा में उच्च प्राथमिक विद्यालय के परिसर में आंगनबाड़ी केंद्र चलाया जा रहा है। केंद्र का ताला तक नहीं खुलता है। ताले पर जंग भी लगना शुरू हो गया है। अब आंगनबाड़ी केंद्र खुलने के आदेश हो गए है, लेकिन उसके बाद भी उसे खोला नहीं जा रहा है और वहां घास भी जम गई है। अब पोषाहार किस तरह से बांटा जा रहा है, यह किसी को नहीं पता है।
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सिसाना में घंटों पहले भेज दिए जाते है बच्चे
सिसाना गांव में आंगनबाड़ी के भवन में दो केंद्र चलाए जा रहे है। जहां एक केंद्र में 26 व दूसरे में 20 बच्चे है। आंगनबाड़ी केंद्र खुलने का समय सुबह नौ बजे से एक बजे तक है, लेकिन उसे सुबह को समय नहीं खोला जाता है तो दोपहर को घंटे भर पहले ही बच्चों को भेज दिया जाता है। हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना था कि केंद्र में रखरखाव का कार्य चल रहा है, इसलिए बच्चों को जल्दी भेज दिया गया।

आंगनबाड़ी केंद्र काफी समय से नहीं खुल रहे थे, इसलिए कुछ समस्या हो सकती है। अब व्यवस्था को बेहतर किया जा रहा है और सभी केंद्रों को दिखवाकर व्यवस्था ठीक कराई जाएगी। - विपिन मैत्रेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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