अमर उजाला एक्सक्लूसिव: यूपी बोर्ड के रिजल्ट में बड़ा झटका, यहां अटका 1150 छात्र-छात्राओं का परीक्षा परिणाम
यूपी बोर्ड के रिजल्ट में इस बार एक बड़ी समस्या सामने आई है। बागपत में 1150 छात्र-छात्राओं का रिजल्ट अटक गया है।
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यूपी बोर्ड ने कोरोना काल में बिना परीक्षा कराए हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का परिणाम जारी कर दिया। इस बार जहां परीक्षा परिणाम ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए है, वहीं विद्यार्थियों को नंबर भी खूब मिले हैं। लेकिन उसके साथ ही बागपत जिले के 1150 से अधिक विद्यार्थियों का परिणाम अटक गया है। उनकी मार्कशीट जारी कर दी गई है, लेकिन उसमें नंबर नहीं दर्शाए गए है और क्रास का निशान लगा दिया गया है। विद्यार्थी परीक्षा परिणाम अटकने का कारण पता करने के लिए स्कूलों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनको सही कारण ही नहीं बताया जा रहा है। जिससे विद्यार्थियों में आक्रोश बना हुआ है।
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में हाईस्कूल में 16049 और इंटरमीडिएट में 15820 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। हाईस्कूल में 9307 छात्र व 6535 छात्राएं संस्थागत तो 123 छात्र व 84 छात्राएं व्यक्तिगत पंजीकृत थे, जबकि इंटरमीडिएट में 8656 छात्र व 5794 छात्राएं संस्थागत और 1103 छात्र व 267 छात्राएं व्यक्तिगत पंजीकृत थे। यूपी बोर्ड ने 31 जुलाई को हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम जारी किया तो अधिकतर विद्यार्थियों के अंक 80-90 प्रतिशत के बीच आए, वहीं जिले के 1150 से अधिक विद्यार्थियों को बड़ा झटका लगा है। इन विद्यार्थियों का परिणाम रोक दिया गया है। इनमें अधिकतर विद्यार्थी वाणिज्य व कला वर्ग के है।
पहली बार हुई इस तरह की समस्या
यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम जारी करने के बाद पहली बार ऐसी समस्या विद्यार्थी व शिक्षकों को झेलनी पड़ी, जब कोई भी जिलास्तर पर परिणाम नहीं देख सका। विद्यालयों के कोड डालकर कुछ प्रधानाचार्यों ने संस्थान का परीक्षा परिणाम देखना चाहा तो अधूरा परिणाम ही देख सके। वहीं प्रधानाचार्यों ने देखा कि कुछ विद्यार्थियों का परिणाम अटक गया है। ऐसे विद्यार्थी न पास किए गए और न उनको फेल दिखाया गया।
केस नंबर - 1
दिगंबर जैन इंटर कॉलेज में विवेक पुत्र अमरेश शर्मा वाणिज्य वर्ग का छात्र है, उसकी मार्कशीट में नंबर नहीं दर्शाए गए है और क्रास का निशान दर्शाया गया है। अब छात्र विवेक व उसके परिजन परेशान है। इस कालेज के दूसरे छात्र मन्नान पुत्र हाशिम की मार्कशीट में भी क्रास का निशान दर्शाया गया है। वह भी वाणिज्य वर्ग का छात्र है।
केस नंबर - 2
जनता वैदिक कॉलेज में मलकपुर की रहने वाली शिखा इंटरमीडिएट की कला वर्ग की छात्रा है। उसका भी रिजल्ट इस तरह रोका गया है। उसकी मार्कशीट में भी क्रास का निशाना लगाया गया है।
केस नंबर - 3
नगर के छात्र यश पुत्र प्रदीप पांचाल का भी इंटरमीडिएट का रिजल्ट भी रोका गया है। उसकी मार्कशीट में नंबर नहीं दर्शाए गए है और क्रास लगाया गया है।
अंक खूब दिए गए, इसलिए भी बढ़ी परेशानी
शिक्षा विशेषज्ञ श्रीराम शिक्षा मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य राजीव तोमर कहते हैं कि यह समस्या खूब अंक देने के कारण भी बनी है। जब यूपी बोर्ड ने विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन, छमाही परीक्षा, प्री-बोर्ड परीक्षा, नौवीं के अंक या 11वीं के अंक की जानकारी मांगी तो विद्यार्थियों को खूब नंबर दिए गए। इसमें यह भी नहीं देखा गया कि किसी विद्यार्थी ने विद्यालय से अपना नाम वापस लेकर किसी अन्य जगह पर पंजीकरण तो नहीं करा लिया। कोरोना काल के चलते विद्यार्थी भी पूर्व के विद्यालय में अपना पंजीकरण निरस्त कराने नहीं गए और दूसरी जगह पर पंजीकरण करा लिया गया। जब नंबर देने की बारी आई तो दोनों ही संस्थानों से नंबर दे दिए गए। बोर्ड की साइट पर ऐसे विद्यार्थियों के अंक दो बार दिखाई दे रहे हैं। इसलिए उनका परिणाम भी अटक गया है।
ऐसे मामलों का समाधान तभी होगा, जब बोर्ड की ओर से पहले वाले विद्यालय से पंजीकरण निरस्त कर डिलीट किया जाए और नए विद्यालय में नाम जोड़ा जाए। तभी एक परिणाम को हटाकर विद्यार्थी का परिणाम जारी हो सकेगा। इसके अलावा ही गजट आने के बाद छात्रों के आवेदन मंगाकर बोर्ड को भेजा जाएगा। - प्रीति शर्मा, कार्यवाहक डीआईओएस