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हवा की सेहत हुई खराब, सांसों के लिए मुसीबत
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- अस्थमा, टीबी, सांस रोगों के अलावा मानसिक रोगी भी बढ़ने का खतरा
- कोरोना संक्रमण काल में मुसीबत बढ़ा सकता है प्रदूषित हवा
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। सर्दी की दस्तक के साथ ही हवा की सेहत बिगड़ गई है। जिले में धुंध का असर साफ दिखने लगा है। यही वजह है कि वायु प्रदूषण के लिहाज से जिला रेड जोन में शामिल हो गया है। कोरोना संक्रमण से जूझ रहे लोगों के लिए खतरा बढ़ रहा है। बीमारियां पैर पसारने लगी हैं। सांस के रोगियों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागपत के प्रभारी डॉ विभाष राजपूत ने बताया कि अस्थमा, टीबी, सांस के रोगियों की मुश्किल प्रदूषित हवा से बढ़ रही है। शुक्रवार को एक्यूआई 322 पर पहुंच गया। जिला रेड जोन में शामिल हो गया है। 301 से 400 के बीच एक्यूआई सबसे खराब माना जाता है।
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मनोरोग और हृदय रोग बढ़ने का खतरा
बागपत। खराब हवा के कारण व्यक्ति मानसिक तौर पर भी परेशान होता है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार का कहना है कि खराब हवा से मानसिक तनाव बढ़ता है। यह बड़ा खतरा है। सीएचसी अधीक्षक डॉ विभाष राजपूत का कहना है कि खराब हवा से सिर्फ सांस संबंधी बीमारियां ही नहीं बढ़ती, बल्कि नेत्र रोग, एलर्जी और हृदय रोग भी बढ़ सकते हैं।
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छिड़काव तक सिमटी रही पालिका
बागपत। शहरी क्षेत्र में प्रदूषित धूल से निजात दिलाने के लिए पानी का छिड़काव कराया जाता है। ईओ ललित आर्य का कहना है कि सुबह शाम मुख्य मार्गों पर छिड़काव करा रहे हैं।
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किसानों पर दर्ज किए गए थे 24 मुकदमे
बागपत। पिछले साल पराली, पत्ती और कूड़ा जलाने पर जिले में 24 मुकदमे दर्ज किए गए थे। उपकृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि किसानों को जागरूक किया जा रहा है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ अनिल कुमार भारती ने बताया कि किसानों को चेतावनी दी गई है कि पत्ती या पराली जलाने पर उनका गन्ना बांड बंद कर दिया जाएगा।
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इस तरह खराब हुई हवा
दिनांक एक्यूआई
07 अक्तूबर 252
08 अक्तूबर 284
09 अक्तूबर 290
10 अक्तूबर 285
11 अक्तूबर 286
12 अक्तूबर 332
13 अक्तूबर 327
14 अक्तूबर 317
15 अक्तूबर 325
16 अक्तूबर 322
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खेतों में पराली मिलाने से बढ़ेगा जीवाश्म कार्बन
बागपत। किसान अगर जरा सी सावधानी बरतें तो पराली खेतों के लिए फायदेमंद हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ संदीप कुमार का कहना है कि पराली को मल्चर से कटवा दें, इससे यह बारीक होकर मिट्टी में मिल जाएगी और जमीन में जीवाश्म कार्बन की मात्रा को बढ़ाने में मददगार होगी। इसके अलावा किसानों के पास हैप्पी सीडर का विकल्प भी खुला है। इस मशीन के जरिए एक तरफ पराली को काटा जाता है और दूसरी तरफ किसान गेहूं की बुआई साथ में ही कर सकते हैं। इससे भी लाभ देखने को मिला है। समितियों, ब्लॉक और गन्ना विभाग भी पराली कटाई के यंत्र किराए पर उपलब्ध करा रहा है।
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पराली को चारे में इस्तेमाल कर रहे जिले के किसान
बागपत। जिले में अधिकतर बासमती धान की पैदावार होती है। धान की किस्म 1509 और 1121 की पराली को किसान पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल कर लेते हैं। डेयरी संचालकों को भी यह पराली बेच दी जाती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ संदीप चौधरी का कहना है कि जिन इलाकों में मोटा धान होता है, वहां पर पराली जलाने के मामले सामने आते हैं। इसकी वजह यह है कि मोटा धान की पराली को पशु नहीं खाते। इसमें पोषक तत्व कम होते हैं। जिले में अधिकतर पराली को पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल कर लिया जाता है।
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- कोरोना संक्रमण काल में मुसीबत बढ़ा सकता है प्रदूषित हवा
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। सर्दी की दस्तक के साथ ही हवा की सेहत बिगड़ गई है। जिले में धुंध का असर साफ दिखने लगा है। यही वजह है कि वायु प्रदूषण के लिहाज से जिला रेड जोन में शामिल हो गया है। कोरोना संक्रमण से जूझ रहे लोगों के लिए खतरा बढ़ रहा है। बीमारियां पैर पसारने लगी हैं। सांस के रोगियों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागपत के प्रभारी डॉ विभाष राजपूत ने बताया कि अस्थमा, टीबी, सांस के रोगियों की मुश्किल प्रदूषित हवा से बढ़ रही है। शुक्रवार को एक्यूआई 322 पर पहुंच गया। जिला रेड जोन में शामिल हो गया है। 301 से 400 के बीच एक्यूआई सबसे खराब माना जाता है।
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मनोरोग और हृदय रोग बढ़ने का खतरा
बागपत। खराब हवा के कारण व्यक्ति मानसिक तौर पर भी परेशान होता है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार का कहना है कि खराब हवा से मानसिक तनाव बढ़ता है। यह बड़ा खतरा है। सीएचसी अधीक्षक डॉ विभाष राजपूत का कहना है कि खराब हवा से सिर्फ सांस संबंधी बीमारियां ही नहीं बढ़ती, बल्कि नेत्र रोग, एलर्जी और हृदय रोग भी बढ़ सकते हैं।
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छिड़काव तक सिमटी रही पालिका
बागपत। शहरी क्षेत्र में प्रदूषित धूल से निजात दिलाने के लिए पानी का छिड़काव कराया जाता है। ईओ ललित आर्य का कहना है कि सुबह शाम मुख्य मार्गों पर छिड़काव करा रहे हैं।
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किसानों पर दर्ज किए गए थे 24 मुकदमे
बागपत। पिछले साल पराली, पत्ती और कूड़ा जलाने पर जिले में 24 मुकदमे दर्ज किए गए थे। उपकृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि किसानों को जागरूक किया जा रहा है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ अनिल कुमार भारती ने बताया कि किसानों को चेतावनी दी गई है कि पत्ती या पराली जलाने पर उनका गन्ना बांड बंद कर दिया जाएगा।
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इस तरह खराब हुई हवा
दिनांक एक्यूआई
07 अक्तूबर 252
08 अक्तूबर 284
09 अक्तूबर 290
10 अक्तूबर 285
11 अक्तूबर 286
12 अक्तूबर 332
13 अक्तूबर 327
14 अक्तूबर 317
15 अक्तूबर 325
16 अक्तूबर 322
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खेतों में पराली मिलाने से बढ़ेगा जीवाश्म कार्बन
बागपत। किसान अगर जरा सी सावधानी बरतें तो पराली खेतों के लिए फायदेमंद हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ संदीप कुमार का कहना है कि पराली को मल्चर से कटवा दें, इससे यह बारीक होकर मिट्टी में मिल जाएगी और जमीन में जीवाश्म कार्बन की मात्रा को बढ़ाने में मददगार होगी। इसके अलावा किसानों के पास हैप्पी सीडर का विकल्प भी खुला है। इस मशीन के जरिए एक तरफ पराली को काटा जाता है और दूसरी तरफ किसान गेहूं की बुआई साथ में ही कर सकते हैं। इससे भी लाभ देखने को मिला है। समितियों, ब्लॉक और गन्ना विभाग भी पराली कटाई के यंत्र किराए पर उपलब्ध करा रहा है।
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पराली को चारे में इस्तेमाल कर रहे जिले के किसान
बागपत। जिले में अधिकतर बासमती धान की पैदावार होती है। धान की किस्म 1509 और 1121 की पराली को किसान पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल कर लेते हैं। डेयरी संचालकों को भी यह पराली बेच दी जाती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ संदीप चौधरी का कहना है कि जिन इलाकों में मोटा धान होता है, वहां पर पराली जलाने के मामले सामने आते हैं। इसकी वजह यह है कि मोटा धान की पराली को पशु नहीं खाते। इसमें पोषक तत्व कम होते हैं। जिले में अधिकतर पराली को पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल कर लिया जाता है।