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अहोई पर्व पर विशेष: बच्चों की सलामती के लिए निर्जला व्रत रख रहे पिता, माता व पिता दोनों का निभा रहे फर्ज

Sun, 05 Nov 2023 02:15 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत/बड़ौत
मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत/बड़ौत Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 05 Nov 2023 02:15 PM IST
सार

अहोई अष्टमी के दिन न सिर्फ माताएं बल्कि पिता भी संतान की सलामती के लिए व्रत रख रहे हैं। कुछ पिता ऐसे भी है जो पत्नी के निधन के बाद बच्चों के लालन-पालन करने में माता व पिता दोनों का धर्म व फर्ज निभा रहे हैं। 

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Ahoi Ashtami: Fathers are observing Nirjala fast for the safety of children
वृद्ध सुखपाल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

एक तरफ जहां रविवार को महिलाएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि की कामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रख रही हैं। वहीं कुछ पिता ऐसे भी हैं, जो पत्नी के निधन के बाद अपने बच्चों की सलामती के लिए अहोई पर निर्जला व्रत रखते आ रहे हैं। इतना ही नहीं वे लालन-पालन करने में माता व पिता दोनों का धर्म व फर्ज निभा रहे हैं। इसलिए वे महिलाओं की तरह विधि-विधान से व्रत रखकर पूजा करते हैं।

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रविववार यानी आज अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। महिलाएं निर्जला व्रत रख भगवान शिव व पार्वती की आराधना व संतान की सलामती की कामना करेंगी। इसको लेकर शनिवार को महिलाओं ने घटटा बाजार, नेहरू मूर्ति सहित अन्य जगहों पर खरीददारी की, ताकि अहोई पर्व पर व्रत रखकर अपने बच्चों के लिए व्रत रख सकें। 
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आज हम आपको ऐसे व्यक्तियों से परिचय कराते हैं, जो पत्नी के निधन के बाद सालों से अहोई पर्व पर निर्जला व्रत रखकर अपने बच्चों की सलामती के लिए कामना करते हैं। इनमें सबसे पहले नाम 85 साल के हो चुके सुखपाल का आता है।

सुखपाल की पत्नी बुगली का वर्ष 2003 में निधन हो गया था। बुगली अपने पीछे एक बेटा व पांच बेटियां छोड़ गई थी। इसके बाद से ही सुखपाल लालन-पालन करने में माता व पिता दोनों का फर्ज व धर्म निभाते आ रहे है।

वह अहोई पर निर्जला व्रत रखते है और अपने बच्चों की सलामती के लिए अहोई माता की महिलाओं की तरह विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। सुखपाल का कहना है कि निर्जला व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और अनहोनी को टालकर संतान को दीर्घायु प्रदान करती हैं और घर में सुख समृद्धि लाती हैं।

इसके अलावा आजाद नगर कालोनी निवासी कृष्णपाल भी अपने बेटों के लिए अहोई का व्रत रखते हैं। कृष्णपाल की पत्नी सवित्री का भी निधन हो गया था। उनके पास दो बेटे हैं, जिनकी सलामती के लिए कृष्णपाल भी अहोई माता का व्रत रखकर बच्चों की लंबी आयु की कामना करते है। 

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