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मुलायम भी तंग थे डाकू छविराम से

Sun, 14 Apr 2013 05:30 AM IST
Baghpat
Baghpat Updated Sun, 14 Apr 2013 05:30 AM IST
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बागपत। उलट जाती हैं तदबीरें, पलट जाती हैं तकदीरें। अगर ढूंढे नई दुनिया, तो इंसा पा ही जाता है।।
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यूपी पुलिस का सब इंस्पेक्टर बनकर अजय ने फिराक गोरखपुरी के इस शेर को सच कर दिखा दिया है। डाकू के बेटे का दरोगा बन जाना सपने के सच हो जाने जैसा ही तो है। डाकू भी कौन, छविराम। वो छविराम, जिसका खौफ फिल्म शोले के डाकू गब्बर सिंह जैसा था।
एटा, इटावा और मैनपुरी के लोग थर-थर कांपते थे, और बार-बार मुलायम सिंह यादव से कहते थे कि पुलिस से कहकर छविराम के कहर से बचाओ। मुलायम सिंह यादव तब बीकेडी में थे। उनकी परेशानी को दूर किया बागपत के रहने वाले दो बहादुर पुलिस वालों ने। तब बड़ौत के पास बूढ़पुर गांव के रहने वाले चौधरी सुकर्मपाल सिंह मैनपुरी में सीओ थे और बामनौली गांव निवासी डीबी चौधरी एसओ। तीन मार्च 1982 को हुए छविराम के एनकाउंटर में इन दोनों की अहम भूमिका रही।
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रिटायर्ड हो चुके सुकर्मपाल बताते हैं कि वो रनिंग एकाउंटर था। सुबह साढ़े नौ बजे से शाम के साढ़े पांच बजे तक मुठभेड़ चली। डकैत आगे-आगे, पुलिस पीछे-पीछे। एक-एक कर 10 डकैत तो मार दिए गए, लेकिन छविराम दो साथियों के साथ नदी की तलहटी में छिप गया। उसके हाथ में एलएमजी थी। पुलिस को निशाना बनाकर फायर किए जा रहा था, लेकिन पुलिस फोर्स बढ़ जाने के बाद घिर गया। तीनों डकैत वहीं पर ढेर कर दिए गए।
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सुकर्मपाल को याद है कि तब मुलायम सिंह यादव ने भी उन्हें शाबासी दी थी। इस एनकाउंटर में शामिल रही पूरी पुलिस टीम को वीरता का राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। एसओ डीबी चौधरी आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर हो गए। सुकर्मपाल को इससे पहले भी दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका था।


इंसेट-------------
मुठभेड़ ने दिलाया चुनाव का टिकट
बागपत। सुकर्मपाल की पोस्टिंग एटा, इटावा, मैनपुरी में काफी दिनों रही, इसलिए मुलायम सिंह से उनकी मुलाकात छविराम के एनकाउंटर से पहले भी कई बार हुई, लेकिन इस मुठभेड़ के बाद तो मुलायम सिंह उन्हें बहुत चाहने लगे। दोनों के बीच रिश्ते नजदीकी होते चले, जो सुकर्मपाल के रिटायरमेंट के बाद भी जारी रहे। कहा जाता है कि इन संबंधों के चलते उनके बेटे को लोकसभा चुनाव का टिकट मिला। जब 2014 चुनाव के लिए सपा की पहली सूची जारी हुई, तो इसमें बागपत सीट से सुकर्मपाल के बेटे डॉ. विजय कुमार को उम्मीदवार घोषित किया गया। हालांकि बाद में यह उम्मीदवारी सोमपाल शास्त्री को दे दी गई।
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