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कड़वा सच : और कम न हो जाएं बिटिया

Wed, 02 Jan 2013 05:30 AM IST
Baghpat
Baghpat Updated Wed, 02 Jan 2013 05:30 AM IST
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बागपत। लिंगानुपात के बिगड़ते समीकरणों के लिए बदनाम बागपत जनपद में लड़कियों की संख्या और कम न हो जाए। यह डरावनी आशंका इसलिए पैदा हुई है, क्योंकि यहां गर्भपात के मामले अचानक तेजी से बढ़ गए हैं। 2012 के आखिरी नौ महीनों में ही 59 महिलाओं ने किसी न किसी वजह से अबॉर्शन कराया जबकि इससे पहले एक साल में सिर्फ 10 ने ही गर्भपात कराया था। कहीं यह संख्या कन्या भ्रूण हत्या से तो नहीं बढ़ रही है।
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बेटियों को जन्म लेने से पहले ही भ्रूण रूप में मौत की नींद सुला देना नई बात नहीं है। यह जिला तो इसके लिए बहुत समय से बदनाम रहा है। इसी क्रूर मानसिकता के चलते यहां 2011 की जनगणना में 1000 पुरुषों पर 858 महिलाएं मिली थीं। छह साल तक के बच्चों में तो यह अंतर और भी ज्यादा है। बेटियां सिर्फ 837 हैं।
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इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह बात भी सामने आ चुकी है कि इस जिले से सटे सोनीपत, शामली और गाजियाबाद में अल्ट्रासाउंड से लिंग परीक्षण चल रहे हैं। अब शासन को जाने वाली स्वास्थ्य विभाग की 31 मार्च से 20 दिसंबर 2012 तक की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अवधि में जनपद में कुल 59 महिलाओं ने अबॉर्शन कराया। इससे पहले 31 मार्च 2011 से 31 मार्च 2012 तक सिर्फ 10 महिलाओं ने गर्भपात कराया था। आखिर यह आंकड़ा अचानक से क्यों बढ़ गया? इस पर सीएमओ डाक्टर जेपी शर्मा का कहना है कि यह रिपोर्ट अभी उनके सामने नहीं आई है। अगर ऐसा है, तो गंभीर मामला है। वे दिखवाएंगे कि इसके कारण क्या रहे?
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उधर, स्वास्थ्य विभाग से एक और चौंकाने वाली जानकारी यह मिली है कि वर्ष 2012 में जनपद के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जो 35 मुआयने किए गए, उनमें छह सेंटरों ने अधूरा रिकार्ड ही दिखाया। इसकी सूचना डीएम ऑफिस को भी भेजी गई है।
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