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कौन दिलाए यम के फंदे से मुक्ति
Baghpat
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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बागपत। हमीदाबाद गांव से रजनी और उसका भाई सुरेश पक्का घाट पर यमुना में स्नान करने आए थे। सुना था भैयादूज पर जो भाई-बहन यमुना में डुबकी लगा लेते हैं, उन्हें यम के फंदे से मुक्ति मिल जाती है। लेकिन दोनों को यमुना का हाल देखकर बड़ी निराशा हुई। एक तो पानी बहुत कम था। दूसरा, नदी बह रही थी नाली की तरह, एकदम गंदी। मायूस होकर दोनों लौट गए।
सिर्फ रजनी और सुरेश ही नहीं, सैकड़ों भाई-बहन को यमुना का हाल देखकर इसी तरह झटका लगा। एक तो नदी में पानी आ ही कम रहा है। दूसरा, अवैध रूप से बने अस्थायी पुल ने नदी की धारा को बिल्कुल समेट दिया है। इसी घाट पर दस साल पहले तक भैयादूज पर हजारों लोग जुटते थे। नदी में स्नान करके बहने भाइयों के लिए लंबी आयु की प्रार्थना करती थीं। मेला सा लगता था, लेकिन अब त्योहार पर भी यमुना सूनी रहती है।
भैयादूज को यम द्वितीया इसीलिए कहा जाता है, क्योंकि इस दिन यमुना में स्नान करने से यम के फंदे से मुक्ति मिल जाती है। लेकिन अब यमुना सूखने के चलते यह स्नान नहीं हो पाता। यमुना के बारे में व्यापारी जगदीश अरोड़ा बताते हैं कि सिर्फ भैयादूज ही नहीं, नदी में रोजाना स्नान के लिए सैकड़ों लोग जाते थे। पदड़ा गांव के आदेश त्यागी कहते हैं कि भैयादूज पर तो पक्का घाट पर स्नान के चलते मेला सा लग जाता था।
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जान जोखिम में डाल पुल से गुजर रहे लोग
बागपत। यमुना में अवैध रूप से बनाया गया अस्थायी पुल किसी दिन हादसे का सबब न बन जाए। न तो इस पुल की मजबूती के बारे में किसी इंजीनियर से रिपोर्ट तक नहीं ली गई है। कच्चे पुल के दोनों ओर रेलिंग भी नहीं है, जबकि इस पर कार और ट्रैक्टर-ट्रॉली तक गुजारे जा रहे हैं। इस खतरे की जानकारी अफसरों को भी है, लेकिन प्रशासन बार-बार पुल को बंद कराने के लिए सिर्फ मौखिक आदेश जारी कर रहा है। शुरू में एक दो बार इसे बंद भी कराया गया था, लेकिन अब इस पर वाहन बेरोकटोक गुजर रहे हैं।
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सिर्फ रजनी और सुरेश ही नहीं, सैकड़ों भाई-बहन को यमुना का हाल देखकर इसी तरह झटका लगा। एक तो नदी में पानी आ ही कम रहा है। दूसरा, अवैध रूप से बने अस्थायी पुल ने नदी की धारा को बिल्कुल समेट दिया है। इसी घाट पर दस साल पहले तक भैयादूज पर हजारों लोग जुटते थे। नदी में स्नान करके बहने भाइयों के लिए लंबी आयु की प्रार्थना करती थीं। मेला सा लगता था, लेकिन अब त्योहार पर भी यमुना सूनी रहती है।
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भैयादूज को यम द्वितीया इसीलिए कहा जाता है, क्योंकि इस दिन यमुना में स्नान करने से यम के फंदे से मुक्ति मिल जाती है। लेकिन अब यमुना सूखने के चलते यह स्नान नहीं हो पाता। यमुना के बारे में व्यापारी जगदीश अरोड़ा बताते हैं कि सिर्फ भैयादूज ही नहीं, नदी में रोजाना स्नान के लिए सैकड़ों लोग जाते थे। पदड़ा गांव के आदेश त्यागी कहते हैं कि भैयादूज पर तो पक्का घाट पर स्नान के चलते मेला सा लग जाता था।
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जान जोखिम में डाल पुल से गुजर रहे लोग
बागपत। यमुना में अवैध रूप से बनाया गया अस्थायी पुल किसी दिन हादसे का सबब न बन जाए। न तो इस पुल की मजबूती के बारे में किसी इंजीनियर से रिपोर्ट तक नहीं ली गई है। कच्चे पुल के दोनों ओर रेलिंग भी नहीं है, जबकि इस पर कार और ट्रैक्टर-ट्रॉली तक गुजारे जा रहे हैं। इस खतरे की जानकारी अफसरों को भी है, लेकिन प्रशासन बार-बार पुल को बंद कराने के लिए सिर्फ मौखिक आदेश जारी कर रहा है। शुरू में एक दो बार इसे बंद भी कराया गया था, लेकिन अब इस पर वाहन बेरोकटोक गुजर रहे हैं।