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जन्मजात गूंगे और बहरे बच्चे भी बोलेंगे और सुनेंगे
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खेकड़ा (बागपत)।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के जन्मजात मूक बधिर बच्चे भी अब खिलखिला सकेंगे। ऐसे बच्चों की दिल्ली के एम्स समेत कई बड़े निजी अस्पतालों में मुफ्त कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी हो पाएगी।
बृहस्पतिवार को बीआरसी केंद्र खेकड़ा में शिक्षकों को प्रशिक्षण देते समय सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद मलिक ने बताया कि गरीब परिवारों के जन्मजात मूक बधिर बच्चे भी अब खिलखिला सकेंगे। ऐसे बच्चों की दिल्ली के एम्स समेत कई बड़े निजी अस्पतालों में मुफ्त कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी हो पाएगी। केंद्रीय दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने इसके लिए अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक और श्रवण दिव्यांगजन संस्थान से राष्ट्रीय स्तर पर अनुबंध किया है। बताया कि एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 40 लाख मूक बधिर बच्चे हैं। तमाम बच्चों में यह बीमार जन्मजात होती है। ऐसे बच्चों का इलाज कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी है। यह सुविधा देश के चुनिंदा अस्पतालों में है। सात और आठ लाख रुपये खर्च होने की वजह से गरीब लोग इन अस्पतालों में बच्चों का इलाज नहीं करा पाते हैं। इन विकृतियों की वजह सुनने और बोलने वाली नस की क्षमता में कमी होना होता है। तीन साल के ऐसे बच्चों की पहले जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन जांच करेंगे। कॉकलियर इंप्लांट की जरूरत होने पर सर्जन सीएमओ कार्यालय को बताएंगे। यहां से प्रस्ताव संस्थान को भेजा जाएगा। संस्थान के कर्मचारी नजदीकी अस्पताल से संपर्क करेंगे। बच्चे को भर्ती करने व सर्जरी की डेट मांगेंगे। डेट मिलते ही सीएमओ कार्यालय को पत्र भेजकर बच्चे को बुलाया जाएगा।
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सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के जन्मजात मूक बधिर बच्चे भी अब खिलखिला सकेंगे। ऐसे बच्चों की दिल्ली के एम्स समेत कई बड़े निजी अस्पतालों में मुफ्त कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी हो पाएगी।
बृहस्पतिवार को बीआरसी केंद्र खेकड़ा में शिक्षकों को प्रशिक्षण देते समय सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद मलिक ने बताया कि गरीब परिवारों के जन्मजात मूक बधिर बच्चे भी अब खिलखिला सकेंगे। ऐसे बच्चों की दिल्ली के एम्स समेत कई बड़े निजी अस्पतालों में मुफ्त कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी हो पाएगी। केंद्रीय दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने इसके लिए अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक और श्रवण दिव्यांगजन संस्थान से राष्ट्रीय स्तर पर अनुबंध किया है। बताया कि एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 40 लाख मूक बधिर बच्चे हैं। तमाम बच्चों में यह बीमार जन्मजात होती है। ऐसे बच्चों का इलाज कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी है। यह सुविधा देश के चुनिंदा अस्पतालों में है। सात और आठ लाख रुपये खर्च होने की वजह से गरीब लोग इन अस्पतालों में बच्चों का इलाज नहीं करा पाते हैं। इन विकृतियों की वजह सुनने और बोलने वाली नस की क्षमता में कमी होना होता है। तीन साल के ऐसे बच्चों की पहले जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन जांच करेंगे। कॉकलियर इंप्लांट की जरूरत होने पर सर्जन सीएमओ कार्यालय को बताएंगे। यहां से प्रस्ताव संस्थान को भेजा जाएगा। संस्थान के कर्मचारी नजदीकी अस्पताल से संपर्क करेंगे। बच्चे को भर्ती करने व सर्जरी की डेट मांगेंगे। डेट मिलते ही सीएमओ कार्यालय को पत्र भेजकर बच्चे को बुलाया जाएगा।
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