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दुनिया में फैली वैज्ञानिक एवं सुसंस्कृत विरासत को पुनर्जीवित करें
Updated Wed, 18 Apr 2018 01:44 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
हिंडन पुनरुज्जीवन योजना की ब्रांड एंबेसडर रह चुकी पर्यावरणविद् मनस्संज्ञिनी ने आज दुनिया भर में मनाए जा रहे विश्व विरासत दिवस पर समस्त मानव जाति के लिए संदेश दिया ।
दिल्ली पब्लिक स्कूल, सोनीपत की छात्रा, बागपत निवासी बेटी मनस्संज्ञिनी ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की हजारों साल से परिष्कृत विरासत का न केवल सम्मान करना चाहिए, अपितु उस विरासत को ही अपनी प्रगति और समृद्धि का आधार बनाना चाहिए । मनस्संज्ञिनी का विश्वास है कि यदि धरती को विनाश से बचाना है और उसके भविष्य को सतत विकास की ओर ले जाना है तो दुनिया भर में फैली वैज्ञानिक और सुसंस्कृत विरासत को पुनर्जीवित करना होगा ।
बिटिया ने कई ऐसे उदाहरण दिए है जहाँ लोगों ने अपनी परंपरागत विरासत को उच्चतम गुणवत्ता के साथ विश्व स्तर तक पहुंचाया और उसी के माध्यम से अपनी समृद्धि और खुशहाली की नींव रखी । ऐसा करते हुए ये जन समुदाय अपनी आने वाली कई पीढ़ियों का शहरों की ओर पलायन भी रोक सके, जो कि आज विश्व भर में एक विकराल समस्या बन चुका है । उसने अपने उदाहरणों में ओडिसा के रघुराजपुर के पट्ट चित्र, स्विट्जरलैंड की घड़ियों, स्पेन के सेरामिक कारीगरों आदि का उल्लेख किया । मनस्संज्ञिनी ने यह चिंता भी जताई कि हम अपनी विरासत की अमूल्य धरोहर को तेजी से खोते जा रहे हैं । आज भी हम चाहें तो कोणार्क के सूर्य मंदिर में निहित वास्तुकला और त्रिकोणमिति, वैदिक कृषि में निहित खाद्य एवं पर्यावरण सुरक्षा, जापानी रेकी में छिपे स्वास्थ्य विज्ञान, गोपथ ब्राह्मण में छिपे भूविज्ञान और न जाने ऐसी कितनी विरासतों को वैज्ञानिक आधार पर आधुनिक परिप्रेक्ष्य में पुनर्जीवित करके अपनी धरती को स्वर्ग बना सकते हैं ।
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मनस्संज्ञिनी ने अपनी पीढ़ी के साथियों के लिए यह संदेश भी दिया कि हमारे पूर्वजों ने विभिन्न विषयों को एकीकृत कर एक गहन विरासत हमारे लिए तैयार की है, इसलिए हमें भी अपनी शिक्षा के समस्त विषयों, जैसे कि भौतिकी, रसायन शास्त्र, गणित, सामाजिक विज्ञान, मनोविज्ञान, भाषा आदि को एकीकृत करके जीवन में प्रयोग करना चाहिए । शिक्षा के प्रति ऐसा दृष्टिकोण भी हमारे पूर्वजों की विरासत को सम्मान देने जैसा ही होगा । क्यों न आज सभी विश्ववासी यह संकल्प लें कि हम सब अपने पूर्वजों की साझा विरासत को हृदय से लगाएंगे, संजोकर रखेंगे और उसे और भी ऊंचाइयों तक ले जाएंगे ।
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हिंडन पुनरुज्जीवन योजना की ब्रांड एंबेसडर रह चुकी पर्यावरणविद् मनस्संज्ञिनी ने आज दुनिया भर में मनाए जा रहे विश्व विरासत दिवस पर समस्त मानव जाति के लिए संदेश दिया ।
दिल्ली पब्लिक स्कूल, सोनीपत की छात्रा, बागपत निवासी बेटी मनस्संज्ञिनी ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की हजारों साल से परिष्कृत विरासत का न केवल सम्मान करना चाहिए, अपितु उस विरासत को ही अपनी प्रगति और समृद्धि का आधार बनाना चाहिए । मनस्संज्ञिनी का विश्वास है कि यदि धरती को विनाश से बचाना है और उसके भविष्य को सतत विकास की ओर ले जाना है तो दुनिया भर में फैली वैज्ञानिक और सुसंस्कृत विरासत को पुनर्जीवित करना होगा ।
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बिटिया ने कई ऐसे उदाहरण दिए है जहाँ लोगों ने अपनी परंपरागत विरासत को उच्चतम गुणवत्ता के साथ विश्व स्तर तक पहुंचाया और उसी के माध्यम से अपनी समृद्धि और खुशहाली की नींव रखी । ऐसा करते हुए ये जन समुदाय अपनी आने वाली कई पीढ़ियों का शहरों की ओर पलायन भी रोक सके, जो कि आज विश्व भर में एक विकराल समस्या बन चुका है । उसने अपने उदाहरणों में ओडिसा के रघुराजपुर के पट्ट चित्र, स्विट्जरलैंड की घड़ियों, स्पेन के सेरामिक कारीगरों आदि का उल्लेख किया । मनस्संज्ञिनी ने यह चिंता भी जताई कि हम अपनी विरासत की अमूल्य धरोहर को तेजी से खोते जा रहे हैं । आज भी हम चाहें तो कोणार्क के सूर्य मंदिर में निहित वास्तुकला और त्रिकोणमिति, वैदिक कृषि में निहित खाद्य एवं पर्यावरण सुरक्षा, जापानी रेकी में छिपे स्वास्थ्य विज्ञान, गोपथ ब्राह्मण में छिपे भूविज्ञान और न जाने ऐसी कितनी विरासतों को वैज्ञानिक आधार पर आधुनिक परिप्रेक्ष्य में पुनर्जीवित करके अपनी धरती को स्वर्ग बना सकते हैं ।
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मनस्संज्ञिनी ने अपनी पीढ़ी के साथियों के लिए यह संदेश भी दिया कि हमारे पूर्वजों ने विभिन्न विषयों को एकीकृत कर एक गहन विरासत हमारे लिए तैयार की है, इसलिए हमें भी अपनी शिक्षा के समस्त विषयों, जैसे कि भौतिकी, रसायन शास्त्र, गणित, सामाजिक विज्ञान, मनोविज्ञान, भाषा आदि को एकीकृत करके जीवन में प्रयोग करना चाहिए । शिक्षा के प्रति ऐसा दृष्टिकोण भी हमारे पूर्वजों की विरासत को सम्मान देने जैसा ही होगा । क्यों न आज सभी विश्ववासी यह संकल्प लें कि हम सब अपने पूर्वजों की साझा विरासत को हृदय से लगाएंगे, संजोकर रखेंगे और उसे और भी ऊंचाइयों तक ले जाएंगे ।