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संस्कार और संयम से मिलता है सुख- प्रभावना भूषण
Updated Fri, 16 Feb 2018 12:57 AM IST
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बिनौली (बागपत)।
जैन संत ऐलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज ने कहा कि संस्कार और संयम से मनुष्य को जीवन में सुख शांति मिलती है। सत्य और अहिंसा को अंगीकार करने वाले का कल्याण होता है।
बृहस्पतिवार को बरनावा स्थित ज्ञान सागर गुरुकुल में धर्मसभा में उन्होंने कहा कि जीवन में संस्कारों का होना बहुत जरूरी है। जो व्यक्ति अपने संस्कारों को खो चुके हैं, वो जीवन में कभी सफल नही हो सकते क्योंकि संस्कारों और संयम से ही जीवन निर्माण होता है। संयम के बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है। संयम हमारे जीवन में ब्रेक का काम करता है। जिस गाड़ी में ब्रेक नही होता उसका दुर्घटनाग्रस्त होना निश्चित है। संयम रूपी ब्रेक मानव को अनाचार, अनिष्ट, क्रोध, लोभ, मोह से बचाता है। संयमी मनुष्य जीवन में परम पद को पा सकता। उन्होंने माता पिता से बच्चों को उत्तम संस्कार बचपन से ही देने का संदेश दिया। संस्कारों से परिपूर्ण मनुष्य जीवन में उन्नति प्राप्त कर सकता है।
इस दौरान गुरुकुल के बच्चों ने माता पिता के वात्सल्य और गुरु भक्ति से ओतप्रोत कविताएं प्रस्तुत कर भावविभोर कर दिया। धर्मसभा का संचालन गुरुकुल संस्थापक ब्रह्मचारी अतुल भैया ने किया। धर्मसभा में राकेश जैन, मुकेश जैन, विकास जैन, संयम, संकल्प जैन, उज्ज्वल जैन, विशाल जैन, विरेंद्र जैन, मोहित जैन आदि मौजूद रहे।
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जैन संत ऐलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज ने कहा कि संस्कार और संयम से मनुष्य को जीवन में सुख शांति मिलती है। सत्य और अहिंसा को अंगीकार करने वाले का कल्याण होता है।
बृहस्पतिवार को बरनावा स्थित ज्ञान सागर गुरुकुल में धर्मसभा में उन्होंने कहा कि जीवन में संस्कारों का होना बहुत जरूरी है। जो व्यक्ति अपने संस्कारों को खो चुके हैं, वो जीवन में कभी सफल नही हो सकते क्योंकि संस्कारों और संयम से ही जीवन निर्माण होता है। संयम के बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है। संयम हमारे जीवन में ब्रेक का काम करता है। जिस गाड़ी में ब्रेक नही होता उसका दुर्घटनाग्रस्त होना निश्चित है। संयम रूपी ब्रेक मानव को अनाचार, अनिष्ट, क्रोध, लोभ, मोह से बचाता है। संयमी मनुष्य जीवन में परम पद को पा सकता। उन्होंने माता पिता से बच्चों को उत्तम संस्कार बचपन से ही देने का संदेश दिया। संस्कारों से परिपूर्ण मनुष्य जीवन में उन्नति प्राप्त कर सकता है।
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इस दौरान गुरुकुल के बच्चों ने माता पिता के वात्सल्य और गुरु भक्ति से ओतप्रोत कविताएं प्रस्तुत कर भावविभोर कर दिया। धर्मसभा का संचालन गुरुकुल संस्थापक ब्रह्मचारी अतुल भैया ने किया। धर्मसभा में राकेश जैन, मुकेश जैन, विकास जैन, संयम, संकल्प जैन, उज्ज्वल जैन, विशाल जैन, विरेंद्र जैन, मोहित जैन आदि मौजूद रहे।
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