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पीड़िता बोली, जरूरी है तीन तलाक का खात्मा
Updated Thu, 20 Sep 2018 01:12 AM IST
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बागपत। केंद्रीय सरकार ने तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ की राह में हालांकि अभी भी कई बाधाएं हैं। तीन तलाक का दंश झेलने वाली पीड़ितों ने कहातीन तलाक का खात्मा जरूरी है, क्योंकि छोटी-छोटी बातों पर और धर्म और निकाह के पाक रिश्ते को समझे बगैर कितनी ही महिलाओं को तीन तलाक देकर जिल्लत की जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया गया। बेवजह थाने और कचहरी के अलावा पंचायतों में खड़ा होना पड़ा। बगैर किसी राजनीति के तीन तलाक का खात्मा जरूरी है।
छपरौली क्षेत्र के गांव की पीड़ित की अपने शौहर से तकरार हुई। मामला महिला थाने में पहुंचा। दोनों पक्ष थाने में जमा किया गया, इस बीच शौहर ने थाने में ही तीन बार तलाक कह दिया। मौके पर दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ। पीड़ित अपने परिवार के साथ चली गई। पंचायती दौर के बाद पीड़ित पक्ष ने रिश्ता खत्म कर दिया। पीड़ित कहती है कि आखिर उसका क्या कुसूर था।
दाहा क्षेत्र में निकाह के दौरा वर और वधू पक्ष के बीच झगड़ा हो गया। रुखसती के दौरान बात इतनी बढ़ी कि पंचायत बैठ गई। पंचायत ने मोबाइल पर ही नवविवाहिता को तीन तलाक दिला दिया। कुछ दिन बाद पीड़ित की दूसरी शादी हो गई, लेकिन वह कहती है कि आखिर उसका क्या कुसूर था। तीन तलाक से उसे बेवजह जिल्लत झेलनी पड़ी।
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क्या कहता है पक्ष
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह कहते हैं कि सरकार का कदम बेहद सही है। महिलाओं की इज्जत जरूरी है। अध्यादेश लाकर सरकार ने महिलाओं का मान बढ़ाया।
भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर कहते हैं कि मुस्लिम महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए सरकार का कदम सराहनीय है। विपक्ष को भी इसमें सहमति देनी चाहिए।
क्या कहता है विपक्ष
सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी कहते हैं कि भाजपा मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में लगी हुई है। भाजपा समाज की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है।
कांग्रेस नेता वकील अहमद का कहना है कि भाजपा राजनीति कर रही है। आम से आम आदमी भाजपा की चाल को समझता है। चुनाव नजदीक आते ही इस तरह के मुद्दे उछाले जाते हैं।
क्या कहते हैं धर्मगुरु
बागपत। शहर काजी हबीबुर्ररहमान कहते हैं कि धर्म और समाज के मामलों में राजनीति की बातें नहीं होनी चाहिए। शरीयत का फैसला मान्य है। सरकार को धैर्य से कोई भी निर्णय करना चाहिए। समाज की भावनाओं को आहत नहीं किया जाना चाहिए।
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छपरौली क्षेत्र के गांव की पीड़ित की अपने शौहर से तकरार हुई। मामला महिला थाने में पहुंचा। दोनों पक्ष थाने में जमा किया गया, इस बीच शौहर ने थाने में ही तीन बार तलाक कह दिया। मौके पर दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ। पीड़ित अपने परिवार के साथ चली गई। पंचायती दौर के बाद पीड़ित पक्ष ने रिश्ता खत्म कर दिया। पीड़ित कहती है कि आखिर उसका क्या कुसूर था।
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दाहा क्षेत्र में निकाह के दौरा वर और वधू पक्ष के बीच झगड़ा हो गया। रुखसती के दौरान बात इतनी बढ़ी कि पंचायत बैठ गई। पंचायत ने मोबाइल पर ही नवविवाहिता को तीन तलाक दिला दिया। कुछ दिन बाद पीड़ित की दूसरी शादी हो गई, लेकिन वह कहती है कि आखिर उसका क्या कुसूर था। तीन तलाक से उसे बेवजह जिल्लत झेलनी पड़ी।
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क्या कहता है पक्ष
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह कहते हैं कि सरकार का कदम बेहद सही है। महिलाओं की इज्जत जरूरी है। अध्यादेश लाकर सरकार ने महिलाओं का मान बढ़ाया।
भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर कहते हैं कि मुस्लिम महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए सरकार का कदम सराहनीय है। विपक्ष को भी इसमें सहमति देनी चाहिए।
क्या कहता है विपक्ष
सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी कहते हैं कि भाजपा मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में लगी हुई है। भाजपा समाज की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है।
कांग्रेस नेता वकील अहमद का कहना है कि भाजपा राजनीति कर रही है। आम से आम आदमी भाजपा की चाल को समझता है। चुनाव नजदीक आते ही इस तरह के मुद्दे उछाले जाते हैं।
क्या कहते हैं धर्मगुरु
बागपत। शहर काजी हबीबुर्ररहमान कहते हैं कि धर्म और समाज के मामलों में राजनीति की बातें नहीं होनी चाहिए। शरीयत का फैसला मान्य है। सरकार को धैर्य से कोई भी निर्णय करना चाहिए। समाज की भावनाओं को आहत नहीं किया जाना चाहिए।