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गणेश महोत्सव के चलतें श्रद्धालुओं ने गणेश की पूजा-अर्चना की
Updated Thu, 31 Aug 2017 01:08 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
महाराष्ट्र गणेश मंडल के सौजन्य से सराफा बाजार में चल रहे गणेश महोत्सव में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की और मोधक का प्रसाद बांटा।
पूजा के दौरान पंडित पवन शास्त्री ने बताया पार्वती पुत्र गणेश किस प्रकार गज मुख हुए। मस्तक हीन पार्वती नंदन पर दृष्टिपात कर श्री हरि ने सब को मूर्छित देखा तो तुरंत गरूड़ पर विराजमान हो तीव्र गति से उत्तर दिशा की ओर चल पड़े। वहां उन्होंने भद्रा नदी के तट पर एकांत वन में एक गजेंद्र को हथनी और बच्चों को एक साथ सोते देखा। एक बालक का सिर उत्तर दिशा की ओर था। हरि ने सर्व मंगल कर तुरंत अपने चक्र से उसका मस्तक उतारकर गरूड़ पर रख लिया। बच्चे के कटे अंग के गिरने से हथनी की नींद खुल गई। वह निर्जीव शरीर देखकर रोने लगी। वह हरि स्तवन करने लगी। हरि ने ब्रहम ज्ञान से उसे जीवित कर दिया। वह वायु वेग से उड़कर कैलाश पहुंच गए। हरि ने पार्वती पुत्र को उठाकर अपने वक्ष से लगा लिया और गज मुख को सुंदर बनाकर शिवानंदन के धड़ से जोड़ दिया। इस प्रकार बालक जीवत हो गया। सभी देवताओं ने अनेक अस्त्र-शस्त्र तथा वरदान प्रदान कर सभी देवों ने प्रथम पूजनीय बना दिया। रात्रि में भजनों की प्रस्तुति की । इसमें आदेश गुप्ता, तानाजी, प्रकाश, विजय, मारुति, अरविंद, शाहजी, विट्ठल, महेश, अनिल गुप्ता, सोनाली, ओमकार, आकाश आदि रहे।
महाराष्ट्र गणेश मंडल के सौजन्य से सराफा बाजार में चल रहे गणेश महोत्सव में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की और मोधक का प्रसाद बांटा।
पूजा के दौरान पंडित पवन शास्त्री ने बताया पार्वती पुत्र गणेश किस प्रकार गज मुख हुए। मस्तक हीन पार्वती नंदन पर दृष्टिपात कर श्री हरि ने सब को मूर्छित देखा तो तुरंत गरूड़ पर विराजमान हो तीव्र गति से उत्तर दिशा की ओर चल पड़े। वहां उन्होंने भद्रा नदी के तट पर एकांत वन में एक गजेंद्र को हथनी और बच्चों को एक साथ सोते देखा। एक बालक का सिर उत्तर दिशा की ओर था। हरि ने सर्व मंगल कर तुरंत अपने चक्र से उसका मस्तक उतारकर गरूड़ पर रख लिया। बच्चे के कटे अंग के गिरने से हथनी की नींद खुल गई। वह निर्जीव शरीर देखकर रोने लगी। वह हरि स्तवन करने लगी। हरि ने ब्रहम ज्ञान से उसे जीवित कर दिया। वह वायु वेग से उड़कर कैलाश पहुंच गए। हरि ने पार्वती पुत्र को उठाकर अपने वक्ष से लगा लिया और गज मुख को सुंदर बनाकर शिवानंदन के धड़ से जोड़ दिया। इस प्रकार बालक जीवत हो गया। सभी देवताओं ने अनेक अस्त्र-शस्त्र तथा वरदान प्रदान कर सभी देवों ने प्रथम पूजनीय बना दिया। रात्रि में भजनों की प्रस्तुति की । इसमें आदेश गुप्ता, तानाजी, प्रकाश, विजय, मारुति, अरविंद, शाहजी, विट्ठल, महेश, अनिल गुप्ता, सोनाली, ओमकार, आकाश आदि रहे।