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सिनौली गांव मे उत्खनन तीसरे दिन भी जारी रहा
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बड़ौत (बागपत)। सिनौली गांव में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा एवं भारतीय पुरातत्व संस्थान लालकिला दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में उत्खनन का कार्य तीसरे दिन भी जारी रहा। मेघालय सहित अन्य जगहों से पहुंचे शोधकर्ता छात्र-छात्राओं की टीम यहां पहुंची हुई है।
बृहस्पतिवार को सिनौली गांव में सुबह से ही उत्खनन का कार्य शुरू हुआ। दोपहर को लंच के बाद शोध छात्र-छात्राओं ने यह कार्य पुन: शुरू किया। 2005 में हुए उत्खनन के दौरान भारतीय पुरातत्व विभाग को यहां भारी संख्या में मानव कंकाल, सोने के कंगन, मनके, तलवारों के साथ-साथ शवाधान केंद्र की भी पुष्टि हुई । पिछले वर्ष 15 फरवरी में भी सिनौली उत्खनन क्षेत्र पर एएसआई लाल किला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में तीन माह से अधिक तक उत्खनन का कार्य किया । उस समय भी भारतीय पुरातत्व विभाग को काफी संख्या में प्राचीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए । महत्वपूर्ण यह था कि यहां से सुसज्जित भारतीय योद्धाओं के तीन रथ प्राप्त हुए थे, जो इतिहास की बहुत बड़ी उपलब्धि थी। डॉ. संजय मंजुल ने बताया कि यह साइट पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार बहुत महत्वपूर्ण है और यहां से और भी पुरावशेष मिलने की संभावना है। इसमें हमारी 15 सदस्यीय टीम जुटी हुई है और भी उत्खनन के लिए अधिगृहीत किया जा सकता है।
किसी को भी जाने की नहीं है अनुमति
बड़ौत। उत्खनन क्षेत्र के पास भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने किसी को भी जाने की अनुमति नहीं दी है और चित्र खींचने पर भी प्रतिबंध है।
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बृहस्पतिवार को सिनौली गांव में सुबह से ही उत्खनन का कार्य शुरू हुआ। दोपहर को लंच के बाद शोध छात्र-छात्राओं ने यह कार्य पुन: शुरू किया। 2005 में हुए उत्खनन के दौरान भारतीय पुरातत्व विभाग को यहां भारी संख्या में मानव कंकाल, सोने के कंगन, मनके, तलवारों के साथ-साथ शवाधान केंद्र की भी पुष्टि हुई । पिछले वर्ष 15 फरवरी में भी सिनौली उत्खनन क्षेत्र पर एएसआई लाल किला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में तीन माह से अधिक तक उत्खनन का कार्य किया । उस समय भी भारतीय पुरातत्व विभाग को काफी संख्या में प्राचीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए । महत्वपूर्ण यह था कि यहां से सुसज्जित भारतीय योद्धाओं के तीन रथ प्राप्त हुए थे, जो इतिहास की बहुत बड़ी उपलब्धि थी। डॉ. संजय मंजुल ने बताया कि यह साइट पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार बहुत महत्वपूर्ण है और यहां से और भी पुरावशेष मिलने की संभावना है। इसमें हमारी 15 सदस्यीय टीम जुटी हुई है और भी उत्खनन के लिए अधिगृहीत किया जा सकता है।
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किसी को भी जाने की नहीं है अनुमति
बड़ौत। उत्खनन क्षेत्र के पास भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने किसी को भी जाने की अनुमति नहीं दी है और चित्र खींचने पर भी प्रतिबंध है।