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.... तो गेहूं की कम होगी पैदावार
Updated Mon, 15 Jan 2018 12:53 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
किसानों को अब मौसम भी दगा देने लगा है, जिस कारण अब गेहूं की पैदावार अच्छी नहीं होने का डर सता रहा है। बरसात न होने व सहीं ढंग से पाला न पड़ने से गेहूं का दाना सिकुड़कर अब जीरे की तरह हो सकता है। इससे उपज कम होगी।
दिसंबर माह बीत चुका है और जनवरी का दूसरा सप्ताह भी निकल गया है, लेकिन अभी तक बरसात नहीं हुई है। कुछ दिनों तक कोहरा पड़ने के बाद दोबारा से मौसम में दोपहर के समय गर्मी का एहसास होने लगा है। दिन भर तेज धूप निकल रही है और गरमी बढ़ रही है। अब तो किसानों को और अधिक बेचैनी हो रही है, क्योंकि ऐसे में गेहूं की सिर्फ लंबाई में वृद्धि होगी। उसके फलने-फूलने की क्षमता प्रभावित होने से उत्पादन मेें गिरावट आ जाएगी। मौसम के मिजाज को देखकर किसानों से लेकर कृषि वैज्ञानिकों तक में चिंता देखी जा रही है। एसडीओ कृषि तेजपाल चौहान ने कहा गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए दिसंबर एवं जनवरी मेें अच्छी ठंड होनी चाहिए, लेकिन मौसम का मिजाज एकदम उलट हो रहा है। कुछ दिनों से सर्दी पड़ने के बाद दोबारा से दोपहर के समय गर्मी जैसा एहसास होता है, जो फसल के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि किसानों को मौसम के प्रभाव से बचना है तो समय-समय पर फसलों की सिंचाई करना आवश्यक है।
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किसानों को अब मौसम भी दगा देने लगा है, जिस कारण अब गेहूं की पैदावार अच्छी नहीं होने का डर सता रहा है। बरसात न होने व सहीं ढंग से पाला न पड़ने से गेहूं का दाना सिकुड़कर अब जीरे की तरह हो सकता है। इससे उपज कम होगी।
दिसंबर माह बीत चुका है और जनवरी का दूसरा सप्ताह भी निकल गया है, लेकिन अभी तक बरसात नहीं हुई है। कुछ दिनों तक कोहरा पड़ने के बाद दोबारा से मौसम में दोपहर के समय गर्मी का एहसास होने लगा है। दिन भर तेज धूप निकल रही है और गरमी बढ़ रही है। अब तो किसानों को और अधिक बेचैनी हो रही है, क्योंकि ऐसे में गेहूं की सिर्फ लंबाई में वृद्धि होगी। उसके फलने-फूलने की क्षमता प्रभावित होने से उत्पादन मेें गिरावट आ जाएगी। मौसम के मिजाज को देखकर किसानों से लेकर कृषि वैज्ञानिकों तक में चिंता देखी जा रही है। एसडीओ कृषि तेजपाल चौहान ने कहा गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए दिसंबर एवं जनवरी मेें अच्छी ठंड होनी चाहिए, लेकिन मौसम का मिजाज एकदम उलट हो रहा है। कुछ दिनों से सर्दी पड़ने के बाद दोबारा से दोपहर के समय गर्मी जैसा एहसास होता है, जो फसल के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि किसानों को मौसम के प्रभाव से बचना है तो समय-समय पर फसलों की सिंचाई करना आवश्यक है।
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