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पूर्वजों की ऋणि मुक्ति का साधन है श्राद्ध : शास्त्री
Updated Wed, 06 Sep 2017 01:32 AM IST
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बागपत। श्राद्ध का शुभारंभ आज बुधवार से शुरू होगा। श्राद्ध आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से प्रारंभ होते हैं। पूर्णिमा होने के कारण भी उदय तिथि का प्रभाव नहीं माना जाता है। श्राद्ध पूर्वजों की ऋण मुक्ति का साधन है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया श्राद्ध का 12:33 बजे तक पूर्णिमा है, इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रवेश कर जाएगी। 15 दिन का यह पक्ष पितरों को प्रसन्न करने के लिए निर्धारित किए हैं। इन दिनों में नये कार्य नहीं करने चाहिए। पितरों को ध्यान कर उनके लिए कर्म करें। नित्य गाय, कोया, कुत्ते के लिए नियमित भोजन निकालें। जिस दिन पूर्वजों का श्राद्ध हो उस दिन ब्राह्मण को बुलाकर तर्पण करवाए। इसके बाद दान पुण्य करने से पितर प्रसन्न होते हैं। तर्पण सिर्फ पितरों के लिए ही नहीं होता है, बल्कि इसमें ऋषि, देव, माता पक्ष के पितरों के लिए तर्पण करना चाहिए। अमावस्या में भूले बिसरे का श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष की अमावस्या का महत्व अलग होता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया श्राद्ध का 12:33 बजे तक पूर्णिमा है, इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रवेश कर जाएगी। 15 दिन का यह पक्ष पितरों को प्रसन्न करने के लिए निर्धारित किए हैं। इन दिनों में नये कार्य नहीं करने चाहिए। पितरों को ध्यान कर उनके लिए कर्म करें। नित्य गाय, कोया, कुत्ते के लिए नियमित भोजन निकालें। जिस दिन पूर्वजों का श्राद्ध हो उस दिन ब्राह्मण को बुलाकर तर्पण करवाए। इसके बाद दान पुण्य करने से पितर प्रसन्न होते हैं। तर्पण सिर्फ पितरों के लिए ही नहीं होता है, बल्कि इसमें ऋषि, देव, माता पक्ष के पितरों के लिए तर्पण करना चाहिए। अमावस्या में भूले बिसरे का श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष की अमावस्या का महत्व अलग होता है।
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